मध्य प्रदेश

माध्यमिक शाला करौंदी सिंगोरगढ़ में बच्चों के साथ मनाया दीपावली महोत्सव, दीपों से जगमगाया विद्यालय

शिक्षक महेंद्र कुमार दीक्षित की अनूठी पहल, बच्चों को उपहार और आतिशबाजी देकर बांटी खुशियां
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
तेजगढ़ । दमोह जिले के तेजगढ़ के समीपी माध्यमिक शाला करौंदी सिंगोरगढ़ में दीपावली का पर्व बच्चों के साथ हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां लक्ष्मी की आरती के साथ हुई। इसके बाद बच्चों ने दीपक जलाकर विद्यालय की खिड़कियों और दरवाजों पर सजाए।
इस अवसर पर शिक्षक महेंद्र कुमार दीक्षित ने बच्चों को समझाया कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि मां सरस्वती का मंदिर है। यहां बच्चों को विद्या का ज्ञान मिलता है और शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। इसलिए विद्यालय में भी दीपावली जैसे त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर त्योहार बच्चों के साथ मिलकर मनाना चाहिए, चाहे होली हो, दीपावली, रक्षाबंधन या जन्माष्टमी। इसी क्रम में आगामी 14 नवंबर को बाल दिवस भी सभी बच्चों के साथ मनाने की रूपरेखा तैयार की गई।
दीपावली के अवसर पर सभी बच्चों को मां लक्ष्मी के स्टीकर, छोटी-छोटी उपहार सामग्री, फटाके, फुलझड़ियां और अनार वितरित किए गए। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। छोटी-छोटी खुशियों ने बच्चों के मन में बड़ा उत्साह भर दिया।
सहयोगी शिक्षक प्रशांत निगम ने भी बच्चों को दीपावली की परंपरा, उसके उद्देश्य और त्योहार को मनाने के सही तरीकों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान सभी शाला नायकों को दीपावली की फोटो भेंट कर सम्मानित किया गया।
शिक्षक महेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया कि वे विगत 15 वर्षों से अपनी शालाओं में दीपावली, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी सहित विभिन्न त्योहार बच्चों के साथ मनाते आ रहे हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी नवीन पदस्थापना वाली शाला में भी इस वर्ष दीपावली महोत्सव आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक शिक्षक यह संकल्प ले कि विद्यालय में बच्चों के साथ हर त्योहार मनाया जाएगा और उन्हें घर जैसा अपनापन व आनंदमय वातावरण दिया जाएगा, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकती है। ऐसा माहौल बने कि बच्चे विद्यालय को भी अपने घर की तरह आनंद का स्थान समझें। बच्चों की नियमित उपस्थिति और शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने मां लक्ष्मी के जयकारे लगाते हुए विद्यालय से विदाई ली। यह आयोजन बच्चों के लिए दीपावली की खुशियों के साथ-साथ एक यादगार अनुभव बन गया।

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