Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 09 जुलाई 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 09 जुलाई 2023
09 जुलाई 2093 दिन रविवार को भानु सप्तमी का पावन पर्व है। आज भगवान सूर्य देवता की पुजा अर्चना करने से सूर्य ग्रहण काल में किये गये जप के समान सिद्धि मिल जाती है। सूर्य देवता धन और प्रतिष्ठा के कारक ग्रह हैं, इसलिए जीवन में धन एवं प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। आज रविवार भी है, अतः यह संयोग और भी प्रभावी हो जाता है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनी बंधुओं को भानु सप्तमी बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।* *रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन*
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि 08:00 PM तक उपरांत अष्टमी
📝 तिथि के स्वामी – सप्तमी के स्वामी भगवान सूर्य देव हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 07:29 PM तक उपरांत रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी : उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
📣 योग : शोभन योग 02:43 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 08:50 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 07:59 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:15:00 PM
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:45:00 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:09 ए एम से 04:50 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:29 ए एम से 05:30 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:21 पी एम से 07:41 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 07:22 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 02:54 पी एम से 04:26 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जुलाई 10 से 12:47 ए एम, जुलाई 10
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:30 ए एम से 07:29 पी एम
❄️ रवि योग : 05:30 ए एम से 07:29 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में आठ बादाम चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/मूल प्रारंभ/ भानु सप्तमी/ शीतला सप्तमी (उड़ीसा)/ कालाष्टमी/ पंचक जारी/ सत्य नारायण सिन्हा जयन्ती, बालाचंदर जन्म दिवस, संजीव कुमार जयंती, बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित दिवस, सुखबीर सिंह बादल जयन्ती, उप्पलुरी गोपाल कृष्णमूर्ति जन्म दिवस, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज स्थापना दिवस, भारत की पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56) प्रारम्भ दिवस, राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस
✍🏼 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है।
🗽 Vastu Tips 🗺️
घर में पक्षियों की तस्वीर लगाने से क्या होता है?
पक्षियों की तस्वीरें घर में पॉजिटिव रिजल्टस लेकर आती हैं। कई लोगों को काफी मेहनत और लगन से काम करने के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती, तो ऐसे लोगों को अपने घर में पक्षियों की तस्वीर लगानी चाहिए। वास्तु की दृष्टि में पक्षियों को शुभ माना जाता है। जहां पक्षी होते हैं वहां का वातावरण अपने आप ही आनंनदित हो जाता है।
वास्तु के अनुसार, पक्षियों की तस्वीर अथवा मूर्ति घर में रखने से भी सकरात्मक ऊर्जा का निवास होता है और नकारात्मक उर्जा से छुटकारा मिलता है। इससे आपकी सफलता के योग बनने शुरू हो जाते हैं। पक्षियों की तस्वीर लगाने के लिये पूर्व दिशा का चुनाव करना सबसे अच्छा होता है।
जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दुर्भाग्य कभी हाथ धोकर पीछे पड़ जाये, ऐसा लगे कि एक भी उपाय प्रगति पथ पर स्थिर रखने में समर्थ नहीं, सभी ओर असफलता ही असफलता, अंधकार ही अंधकार प्रतीत हो रहा हो तब तुम महापुरुषों के ग्रंथ पढ़ना, विचारों का सत्संग तुम्हारे जीवन में फिर से प्रकाश लायेगा, तुम्हारे दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की शक्ति उत्तम ज्ञान में सन्निहित है उसे जब कभी ऐसा अवसर आये ज्ञान-देवता की ही शरण ग्रहण करना।
समस्त जातियाँ साथ छोड़ दें, मित्र, पड़ोसी और कुटुम्बी भी अपने स्वार्थ के लिए संघर्ष कर दें अथवा तुम्हें जीवन पथ पर चलने के लिए असहाय एकाकी छोड़ दें तब तुम उत्तम पुस्तकों को मित्र बनाकर आगे बढ़ना एकाकी और असह्यपन के बीच तुम्हें मौन मैत्री और प्रकाश की वह किरण मिल जायेगी जो तुम्हारा हाथ पकड़ कर तुम्हें निर्दिष्ट लक्ष्य तक पहुँचा देगी।
मन्दिर, गिरजे, मस्जिद गुरुद्वारे टूटकर खंडहर बन जाते हैं, गिरकर नष्ट हो जाते हैं। लेकिन उत्तम ज्ञान और सच्चे विचार कभी नष्ट नहीं होते। ज्ञान देवता का वरदान पाकर मनुष्य निहाल हो जाता है। ज्ञान वह सीपी है जिसमें प्रवेश कर मनुष्य का जीवन मोती बन जाता है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए ताकि पाचन शक्ति बढ़े?
सुबह सबसे पहले बिना कुला किए सादा पानी पीना चाहिए ।
पुराने समय मे सबसे पहले ब्रश करने पर जोर दिया जाता था । लेकिन अब कहा जाता है । आपके शरीर के लिए अल्काइन का होना जरूरी होता है ।इससे भोजन का पाचन आसान हो जाता है जो बासी मुंह पानी पिया जाता है वह पेट के लिए अच्छा होता है । इसे पाने के लिए किसी दवाई की जरूरत नहीं होगी । यह मुफ़्त की दवा है । जिसे पाने के लिए कही जाने की जरूरत नहीं होती है ।
इसके बाद नीबू पानी पीना चाहिए । फिर आप चाहे
एक गिलास दूध,एक फल,कुछ मेवे
अंकुरित अनाज खाने से पोशतिक्ता मिलती है , ताकत और पेट भरा रहता है । आलस नहीं आता है । मन एक नए उत्साह से भरा रहता है
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
महाभारत कालीन हस्तिनापुर नगर वास्तव में वर्तमान का मेरठ और उसके आस पास का इलाका था। जब धृतराष्ट्र ने हस्तिनापुर का विभाजन कर उजड़ा हुआ भाग, जिसका नाम खांडवप्रस्थ था, पांडवों को दे दिया। तब उन्होंने अपने सामर्थ्य से उस वीरान भूमि को राहने योग्य बनाया। उसी नवीन नगर का नाम उन्होंने इंद्रप्रस्थ कर दिया जो वर्तमान का दिल्ली और उसके आस पास का प्रदेश है। तो दिल्ली वास्तव में प्राचीन खांडवप्रस्थ या इंद्रप्रस्थ थी, ना कि हस्तिनापुर।
रही बात युद्ध कुरुक्षेत्र में करवाने की तो उसके कई कारण थे। पितामह भीष्म के अनुरोध पर स्वयं श्रीकृष्ण ने इस भूमि का चुनाव किया था। बहुत विस्तार में नही जाऊंगा क्योंकि इस पर मैंने एक अलग उत्तर[1] लिखा है। विस्तृत जानकारी के लिए आप उसे पढ़ सकते हैं। संक्षेप में कुछ कारण बताता हूँ।
श्रीकृष्ण को ये भय था कि चूंकि कौरव और पांडव संबंधी हैं इसीलिए युद्धक्षेत्र में सुलह ना कर बैठे। इसी कारण उन्होंने कुरुक्षेत्र की भूमि का चुनाव किया क्योंकि वो भूमि स्वभाव से ही तामसिक थी जहाँ किसी का मेल नही हो सकता।
कुरूक्षेत्र की भूमि के तामसिक होने का कारण ये था कि इसी भूमि पर बहुत पहले भगवान परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों का नाश कर वहाँ रक्त के 5 सरोवर बना दिये थे। इसी कारण यहाँ किसी प्रकार की सात्विकता जन्म नही ले सकती थी।
कुरुक्षेत्र की भूमि इतनी अधिक तामसिक थी कि इस भूमि पर कदम रखते ही श्रवण कुमार जैसे पुत्रभक्त ने भी अपने माता पिता को पालकी से उतार दिया था।
जब भगवान परशुराम ने क्षत्रियों का संहार बंद किया तब देवराज इंद्र ने रक्त के उन 5 सरोवरों को जल के सरोवरों में बदल कर तीर्थ बना दिया। साथ ही इंद्र ने परशुराम को ये वरदान दिया था कि इस भूमि पर जो कोई भी मृत्यु प्राप्त करेगा वो स्वर्ग पायेगा। भीष्म और श्रीकृष्ण इस रहस्य जानते थे इसी कारण उन्होंने इस भूमि का चयन किया ताकि जो भी योद्धा वीरगति को प्राप्त हो उसे स्वर्ग मिले।
तो महाभारत के लिए कुरुक्षेत्र की भूमि केवल दूरी के आधार पर नही चुनी गई थी बल्कि इसके ये कुछ अन्य कारण थे। आशा है आपके प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा।
जय श्रीकृष्ण। 🙏🚩
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⚜️ सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।


