ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग रविवार, 11 जून 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
••• जय श्री हरि ••
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 11 जून 2023

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – आषाढ़ मास
🌓 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 12:06 PM तक उपरांत नवमी
🖍️ तिथि स्वामी – नवमी तिथि की स्वामी देवी दुर्गा हैं ऎसे में जातक को दुर्गा की उपासना अवश्य करनी चाहिए.
💫 नक्षत्र : पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र 02:32 PM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाभाद्रपदनक्षत्र का स्वामी गुरु ग्रह है।नक्षत्र के देवता हैं, अज एकपाद।
🔔 योग – प्रीति योग 10:10 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
प्रथम करण : कौलव – 12:05 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 11:17 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : रविवार का शुभ (गलिक काल) 03:37 पी एम से 05:16 पी एम
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00 A.M
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00 P.M
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:53 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:40 पी एम से 03:36 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:18 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:19 पी एम से 08:19 पी एम
💧 अमृत काल : 06:54 ए एम से 08:26 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, जून 12 से 12:41 ए एम, जून 12
सर्वार्थ सिद्धि योग : 02:32 पी एम से 05:23 ए एम, जून 12
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शीतला माता मंदिर में आम चढ़ाएं।
🌴 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/ शीतलाष्टमी, नेशनल मेकिंग लाइफ ब्यूटीफुल डे, के एस हेगड़े जन्म दिवस, डॉ जेपियार जन्म दिवस, लालू प्रसाद यादव जन्मोत्सव, नटराजन सुब्रमण्यन जयंती, (महान् स्वतन्त्रता सेनानी) राम प्रसाद बिस्मिल जयन्ती, इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थापना दिवस, पंचक जारी
✍🏼 विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।
🏜️ Vastu Tips 🗽
खाना खाते समय इन बातों का रखें विशेष ख्याल वास्तु के मुताबिक, सबसे पहली बात भोजन की थाली को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए और खुद भी सीधे जमीन पर बैठकर नहीं खाना चाहिए। भोजन की थाली को हमेशा किसी चटाई पर या टेबल पर आराम से रखकर ही भोजन करना चाहिए और आपको भी भोजन करते समय किसी चटाई, आसन या फिर कुर्सी पर बैठना चाहिए।
वास्तु के अनुसार, किसी को खाना परोसते समय खाने की थाली को एक हाथ से नहीं पकड़ना चाहिए। थाली को हमेशा दोनों हाथों से पकड़कर ही खाना परोसना चाहिए। इससे दूसरों के साथ आपके रिश्ते अच्छे रहते हैं और जीवन में प्रसन्नता बनी रहती है। वास्तु शास्त्र में ये थी चर्चा भोजन करते समय ध्यान रखने योग्य कुछ जरूरी बातों के बारे में। उम्मीद है आप वास्तु टिप्स को अपनाकर जरूर लाभ उठाएंगे।
🔑 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
होंठों के लिए चीनी का स्क्रब चीनी में शहद मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इस पेस्ट से अपने होंठों की हल्के हाथों से 2 मिनट तक मसाज करें। इसके बाद इसे पानी से धो लें। चीनी के इस स्क्रब से होंठों के ऊपर जमीं मृत कोशिकाएं हट जाएंगी, जिसके बाद आपके होंठ गुलाबी दिखने लगेंगे। इस स्क्रब को आप हफ्ते में 2 बार करें।
नींबू के रस से गुलाबी होंगे होंठों की रंगत निखारने के लिए नींबू के रस का इस्तेमाल करना सही रहता है। होंठों पर नींबू का रस प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट का काम करता है और कालेपन को दूर करता है। नींबू के रस को शहद के साथ मिलाकर होंठों पर 20 मिनट के लिए लगाएं। ऐसा हफ्ते में 3 से 4 बार करें आपके होंठ पिंक दिखने लगेंगे।
खीरे के जूस के पाएं गुलाबी होंठ होंठों को प्राकृतिक गुलाबी बनाने के लिए खीरे के रस को बेसन में शहद के साथ मिलाकर लगाएं। इस पेस्ट को 20 मिनट तक होंठों पर लगा रहने दें और फिर मसाज करते हुए साफ कर लें।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
उल्टी का तुरंत इलाज क्या है?
पहाड़ों के सफर पर निकलने से पहले अपने साथ अदरक जरूर लेकर जाएं। जब भी आपको सफर के दौरान उल्टी जैसा महसूस हो तो आप अदरक को अपने मुंह में रख लें। ऐसा करने से उल्टी और मोशन सिकनेस से राहत मिलती है।
शहद के साथ मिलाकर होंठों पर 20 मिनट के लिए लगाएं। ऐसा हफ्ते में 3 से 4 बार करें आपके होंठ पिंक दिखने लगेंगे।
खीरे के जूस के पाएं गुलाबी होंठ होंठों को प्राकृतिक गुलाबी बनाने के लिए खीरे के रस को बेसन में शहद के साथ मिलाकर लगाएं। इस पेस्ट को 20 मिनट तक होंठों पर लगा रहने दें और फिर मसाज करते हुए साफ कर लें।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
उल्टी का तुरंत इलाज क्या है?
पहाड़ों के सफर पर निकलने से पहले अपने साथ अदरक जरूर लेकर जाएं। जब भी आपको सफर के दौरान उल्टी जैसा महसूस हो तो आप अदरक को अपने मुंह में रख लें। ऐसा करने से उल्टी और मोशन सिकनेस से राहत मिलती है।
सफर के दौरान पुदीने की फ्रेश पत्तियां अपने साथ लेकर जाएं और अगर फ्रेश पत्तियां नहीं हैं तो पेपरमिंट ऑयल लेकर जाएं। जब भी उल्टी आए तो आप पुदीने की पत्तियां चबा लें या फिर पेपरमिंट ऑयल को किसी कपड़े पर डालकर सूंघें।
नींबू से उल्टी को कंट्रोल किया जा सकता है। सफर पर अपने साथ नींबू जरूर रखें। जब भी आपको उल्टी महसूस हो या फिर आ जाए तो नींबू को पानी में मिलाकर पिएं। इससे आपको आराम मिलेगा।
सफर के दौरान काला नमक भी अपने साथ रखें। जब भी उल्टी महसूस हो आप काले नमक को नींबू और पानी के साथ मिलाकर पिएं, तुरंत आराम मिलेगा।
🪔 गुरु भक्ति योग 🕯️
हर हिंदू घर में छोटा ही सही एक मंदिर जरूर होता है। मंदिर होने से आसपास का माहौल शुद्ध और सकरात्मक ऊर्जा से भरा रहता है। लेकिन आपको यहां बता दें कि मंदिर को सही दिशा में रखना बेहद जरूरी है वरना अशुभ फल मिल सकता है। घर में पूजा स्थल/मंदिर हमेशा ईशान कोण में रहना चाहिए। यह कोई देवी-देवताओं का माना जाता है। वहीं वास्तु शास्त्र में मंदिर में धार्मिक चिन्हों का भी खास महत्व बताया गया है। वास्तु के मुताबिक, पूजा स्थल पर स्वास्तिक, श्री और ओम जैसी धार्मिक चिन्ह होने से धन की देवी लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। साथ जीवन सुखमय और खुशहाल बना रहता है।
स्वास्तिक बनाने के फायदे घर के मुख्य द्वार और मंदिर में स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष दूर होता है। इन दोनों जगहों पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं और उसके नीचे शुभ लाभ लिख दें। ऐसा करने से आपके घर में हमेशा सकरात्मकता बनी रहेगी। साथ देवी लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहेगी। ध्यान रखें कि स्वास्तिक का चिन्ह 9 उंगली लंबा और चौड़ा होना चाहिए।
कलश बनाने के फायदे घर के पूजा स्थल पर सिंदूर से मंगल कलश का चिन्ह बनाने से हर तरह की अड़चन दूर हो जाती है। वास्तु के मुताबिक, मंगल कलश मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इसे बनाने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि बनी रहती है।
ओम चिन्ह बनाने के फायदे घर के मंदिर में केसर या चंदन से ओम चिन्ह बनाना काफी शुभ माना जाता है। इससे स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। ओम का चिन्ह जीवन में तरक्की लाता है और सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
श्री चिन्ह बनाने का फायदा श्री का चिन्ह माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसे बनाने से घर में लक्ष्मी का वास रहता है और धन धान्य की कमी नहीं होती है। लेकिन ध्यान रखें कि घर के मंदिर में श्री का चिन्ह सिंदूर या केसर से ही बनाएं। वास्तु के अनुसार, पूजा स्थल पर श्री का चिह्न होने से देवी लक्ष्मी स्वयं वहां निवास करती
❀꧁ 𓇽𝐻𝑎𝑟𝑒 𝐾𝑟𝑖𝑠ℎ𝑛𝑎𓇽꧂❀
⚜️ नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।
आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।

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