ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 30 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 30 सितम्बर 2023

30 सितम्बर 2023 दिन शनिवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि प्रतिपदा तिथि है। आज अर्द्धरात्रि 11:57 बजे पचखा (पंचक) समाप्त हो जाएगा। फ़सली आश्विन मास का आरंभ आज से हो जाएगा। फ़सली नववर्ष 1431 आज से ही शुरू होता है, जो आज हो जाएगा। आज जैन लोगों का क्षमा वाणी पर्व है, एक जगह इकट्ठा होकर सभी जैनी लोग एक दूसरे से वर्षभर में जो कुछ अपराध किसी के भी प्रति किसी की वाणी से हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करते हैं। आज से सनातनी लोगों का पितृपक्ष (श्राद्धपक्ष) आरंभ हो जाता है। आज प्रतिपदा का श्राद्ध किया जाएगा। अश्विन मास में दूध का त्याग करना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास प्रारंभ
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 12:21 PM तक उपरांत द्वितीया |
✏️ तिथि का स्वामी – द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी और तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र रेवती 09:08 PM तक उपरांत अश्विनी
🪐 नक्षत्र स्वामी : रेवती नक्षत्र के स्वामी ग्रह बुध हैं। तथा नक्षत्र के देवता पूषा हैं।
🔕 योग : ध्रुव योग 04:27 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
प्रथम करण : कौलव – 12:21 पी एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 10:57 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:04:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:56:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:37 ए एम से 05:25 ए एम
🎆 प्रातः सन्ध्या : 05:01 ए एम से 06:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:47 ए एम से 12:35 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:10 पी एम से 02:58 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:09 पी एम से 06:33 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:09 पी एम से 07:21 पी एम
💧 अमृत काल : 06:57 पी एम से 08:24 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:47 पी एम से 12:35 ए एम, अक्टूबर 01
🚕 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में काला वस्त्र चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – आश्विन मासारंभ/ सुक्कोथ ( जुहू – यहूदी ), द्वितीया श्राद्ध/ अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस, प्रसिद्ध साहित्यकार पंडित श्रद्धाराम शर्मा जयन्ती, सत्य एवं सुलह का राष्ट्रीय दिवस, बोत्सवाना स्वतंत्रता दिवस, निर्माता एवं निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी जन्म दिवस, हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री राव वीरेन्द्र सिंह स्मृति दिवस, भारतीय लेखिका सुमित्रा कुमारी सिन्हा स्मृति दिवस, विश्वनाथन आनंद विश्व रैपिड शतरंज चैम्पियनशिप जयन्ती, तेलुगु साहित्यकार गुरुजाडा अप्पाराव जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार रामानन्द चैटर्जी पुण्य तिथि, पंचक समाप्ति 11.57
✍🏼 विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षणदोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानीजाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि भद्रानाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्णपक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।
🗺️ Vastu tips 🗽
झूला लगाएं आपने कई घरों में झूला लगा हुआ जरूर देखा होगा। दरअसल वास्तु शास्त्र के अनुसार घर पर झूले का उपयोग करने पर घर पर फैला अशुभ शक्तियां दूर हो जाती हैं। वास्तु के अनुसार घर के उत्तरी हिस्से में झूलना लगाना शुभ साबित होता है।
नियमित करें साफ-सफाई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी वहीं पर निवास करती हैं जहां पर साफ-सफाई और स्वच्छता रहती है। ऐसे में वास्तु दोष को कम करने के लिए घर की नियमित रूप से सफाई जरूर करें। घर के दरवाजे और खिड़कियों की नियमित रूप से साफ-सफाई करने पर घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
पूजा में घंटी का इस्तेमाल जिन घरों में नियमित रूप से देवी-देवताओं की पूजा होती है और घंटी बजाई जाती है वहां पर वास्तु दोष नहीं पैदा होता है। घर पर नियमित रूप से घंटी बजाने पर सकारात्मकता बनी रहती है।
शंख बजाने के फायदे हिंदू धर्म में शंख को बहुत ही पवित्र चीज माना गया है। जिन घरों में शंख रखा होता है और उसकी पूजा होती है वहां पर वास्तु दोष नहीं होता है। रोजाना शंख बजाने पर घर से नकारात्मकता दूर होती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
डर को जड़-मूल से उखाड़ने हेतु
जिस बच्चे को बार-बार नजर लगती हो या वह रात्रि में डरता हो तो उससे पलाश के वृक्ष का स्पर्श कराते हुए उसकी 7 परिक्रमा करवायें तथा रात को उसके सिरहाने पलाश के 3 बीजों को रखें तो शीघ्र ही वह समस्या दूर होती है | यदि सफेद पलाश हो तो और भी तीव्र तथा अत्यंत ही सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं | साथ ही पूज्य बापूजी द्वारा कराये गये ‘ॐकार’ कीर्तन का ट्रैक चलाकर कीर्तन करायें , ‘ॐकार’का जप करायें एवं ‘निर्भय नाद’ पुस्तक प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी पढने हेतु बताये | निर्भय नाद पुस्तक पढने से आंतरिक निर्भयता का सामर्थ्य जगता है | इससे डर जड़ – मूल से उखडकर भाग जायेगा |
सुख – शांति व धनवृद्धि हेतु
सफेद पलाश के एक या अधिक पुष्पों को किसी शुभ महूर्त में लाकर तिजोरी में सुरुक्षित रखने से उस घ में सुख-शांति रहती है, धन-आगमन में बहुत वृद्धि होती है |
🍷 आरोग्य संजीवनी 🥂
पद्म पुराण में आता है : ‘जो पुरुष उत्पन्न हुए क्रोध को अपने मन से रोक लेता है, वह उस क्षमा के द्वारा सबको जीत लेता है | जो क्रोध और भय को जीतकर शांत रहता है, पृथ्वी पर उसके समान वीर और कौन है ! क्षमा करनेवाले पर एक ही दोष लागू होता है, दूसरा नहीं, वह यह कि क्षमाशील पुरुष को लोग शक्तिहीन मान बैठते हैं | किंतु इसे दोष नहीं मानना चाहिए क्योंकि बुद्धिमानो का बल क्षमा ही है | क्रोधी मनुष्य जो जप, होम और पूजन करता है वह सब फूटे हुए घड़े से जल की भाँति नष्ट हो जाता है |’
क्रोध से बचने के उपाय :
एकांत में आर्तभाव से व सच्चे ह्रदय से भगवान से प्रार्थना कीजिये कि ‘हे प्रभो ! मुझे क्रोध से बचाइये |’
जिस पर क्रोध आ जाय उससे बड़ी नम्रता से, सच्चाई के साथ क्षमा माँग लीजिये |
सात्त्विक भोजन करे | लहसुन, लाल मिर्च एवं तली हुई चीजों से दूर रहें | भोजन चबा-चबाकर कम-से-कम 25 मिनट तक करें | क्रोध की अवस्था में या क्रोध के तुरंत बाद भोजन न करे
🌹 गुरु भक्ति योग 🙏🏼
सनातन धर्म के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर त्रिमूर्ति के रूप में प्रमुख देवताओं को माना जाता है, जो सृजना, पालना और संहार की शक्ति का प्रतीक हैं। यह सामान्य धारणा है कि ये तीनों देवताएं भगवान की विभिन्न भूमिकाओं का प्रतीक हैं, जो जीवों के जीवन का सांचा रखते हैं। लेकिन एक विशेष धारणा में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इन तीनों देवताओं का एक और नाम है शिवबाबा”।
👉🏽 शिवबाबा कौन हैं?
शिवबाबा के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें प्राचीन भारतीय धर्म और योग के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। योग और ध्यान के माध्यम से हम अपने आत्मा के अंतरात्मा के साथ जुड़ सकते हैं और उस दिव्य ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं जो ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर के पीछे की असली रहस्य को खोलता है।
शिवबाबा एक दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं, जो सबका सृजना, पालना, और संहार करने की शक्ति का स्रोत है। वह अनादि हैं, अर्थात शुरुआत से ही मौजूद हैं, और उनका कोई आदि और अंत नहीं है। वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड के रचयिता हैं, और उनकी दिव्य शक्तियों के माध्यम से ही सब कुछ मौजूद है। शिवबाबा एक निराकार ज्योति बिंदु है जोकि सबके पिता है।
ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर के रचियता
शिवबाबा का संबंध ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर से है, जिन्हें त्रिमूर्ति के रूप में जाना जाता है।
ब्रह्मा: ब्रह्मा विश्व के सृजनार्थी के रूप में माना जाता है। वह नवयुग का पहला मानव होते हैं, जिन्हें शिवबाबा का दिव्य ज्ञान दिया जाता है, जिसके माध्यम से वे नवयुग की आरंभिक धारा का नेतृत्व करते हैं।
विष्णु: विष्णु पालने वाले भगवान के रूप में माने जाते हैं,
शंकर: शंकर को संहारक भगवान के रूप में जाना जाता है, जिनका कार्य है पुराने सृष्टि को समाप्त करना और नये सृष्टि की शुरुआत करना।
इन तीनों देवताओं का मिलकर एक संगठन ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर का नाम दिया जाता है, और उन्हें नवयुग की सृजनार्थी, पालने वाले, और संहारक के रूप में माना जाता है।
⚜️। शिवबाबा का गहरा रहस्य
शिवबाबा का गहरा रहस्य है कि वे सबका परम पिता माने जाते हैं और उनकी उपस्थिति और दिव्य गुणगान हमारे जीवन में एक नया दिशा और आदर्श स्थापित करते हैं। उनके द्वारा दिया गया दिव्य ज्ञान हमें अपने आत्मा के सच्चे स्वरूप की पहचान कराता है और हमें अध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करता है।
इस गहरे रहस्य को समझने के लिए, हमें अपने आत्मा के साथ संयमित और ध्यानयोग के माध्यम से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए। ध्यान के माध्यम से हम अपनी आंतरिक दिव्यता को अनुभव कर सकते हैं और शिवबाबा के साथ जुड़ सकते हैं, जिन्होंने हमें जीवन के अर्थ और उद्देश्य के प्रति सही दिशा में मार्गदर्शन किया।
शिवबाबा ब्रह्मा, विष्णु, और शंकर के रचियता हैं, जो त्रिमूर्ति के रूप में जाने जाते हैं। वे सबका परम पिता माने जाते हैं और हमारे जीवन को आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। इसके लिए हमें योग और ध्यान के माध्यम से उनके साथ जुड़ने का प्रयास करना चाहिए ताकि हम अपने आत्मा के दिव्य स्वरूप को समझ सकें और जीवन को एक सच्चे मार्ग पर चला सकें।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।
शास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।

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