ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 27 नवम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 27 नवम्बर 2023

27 नवम्बर 2023 दिन सोमवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। आज स्नान-दानादी की पूर्णिमा है। आज की पूर्णिमा कुछ विशेष इसलिए है, क्योंकि आज कृत्तिका नक्षत्र से युक्त पूर्णिमा है। आज गुरुनानक जी की जयंती भी है। आज सर्वत्र गंगास्नान करने का विधान है। जैसे गंगाजल समान्य जल में मिलाकर स्नान करने से भी गंगास्नान का फल मिलता है। आज काशी में देव दीपावली बड़े धूमधाम से मनायी जाती है। आज सायंकाल में क्षीरसागर का दान अवश्य करना चाहिए। सायंकाल मत्स्यावतार का उत्सव मनाना चाहिए। आज से सोनपुर का मेला हरिहर क्षेत्र में आरंभ हो जाता है। आज भगवान कार्तिकेय का दर्शन अवश्य करना चाहिए। आप सभी सनातनियों को “गुरुनानक जयन्ती, मत्स्य जयन्ती, कार्तिक पूर्णिमा एवं काशी के देव दीपावली” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक मास
🌕 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – कार्तिक मास शुक्ल पक्ष दिन सोमवार पूर्णिमा तिथि 02:46 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथी स्वामी : पूर्णिमा के देवता हैं चंद्रमा। इस तिथि में चंद्रदेव की पूजा करने से मनुष्‍य का सभी जगह आधिपत्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र कृत्तिका 01:35 PM तक उपरांत रोहिणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र के स्वामी सूर्य और राशि के स्वामी शुक्र हैं। तथा कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव है।
📣 योग – शिव योग 11:38 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग
प्रथम करण : बव – 02:45 पी एम तक
द्वितीय करण – बालव – 02:21 ए एम, नवम्बर 28 तक
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:19:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:45 ए एम से 05:36 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:11 ए एम से 06:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:41 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:37 पी एम से 06:03 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:40 पी एम से 06:57 पी एम
💧 अमृत काल : 11:14 ए एम से 12:48 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:38 पी एम से 12:30 ए एम, नवम्बर 28
सर्वार्थ सिद्धि योग : 01:35 पी एम से 06:28 ए एम, नवम्बर 28
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – व्रतादि की पूर्णिमा, देव दीपावली/ गुरु नानक देव जयन्ती/ तुलसी विवाह समाप्ति/ मत्स्यावतार जयन्ती/ केदार व्रत (उड़ीसा)/ पुष्कर मेला (अजमेर)/ पूर्णिमा समाप्ति दोपहर 02.45/ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी गणेश वासुदेव मावलंकर जन्म दिवस, लक्ष्मीबाई केलकर पुण्य तिथि, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह स्मृति दिवस, राष्ट्रीय कैडेट कोर दिवस (नवम्बर माह का चौथा रविवार, भारतीय अंगदान दिवस, सर्वार्थसिद्धि योग/स्नान दान पूर्णिमा/भीष्म पंचक समाप्त
✍🏼 विशेष – पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है। पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है। इस पूर्णिमा तिथि के देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णिमा तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में रखी हर एक चीज महत्वपूर्ण होती है। यही नहीं आपके घर के गार्डन में या फिर घर के भीतर लगे पौधों का भी वास्तु शास्त्र से सीधा संबंध है। ऐसा माना जाता है कि कुछ पौधों को घर में लगाने से और उनके अच्छी तरह से बढ़ने से घर में सुख शांति आती है साथ ही ये पौधे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यही नहीं इन पौधों के घर में धन लक्ष्मी का आगमन भी होता है। ऐसे ही पौधों में से एक है अपराजिता का पौधा।
वास्तु शास्त्र के अनुसार अपराजिता का पौधा घर की पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। घर की उत्तर-पूर्व को ईशान कोण कहते हैं और ऐसा माना जाता है कि ये दिशा भगवान की दिशा होती है। वास्तव में इस दिशा में ईश्वर का निवास होता है। इसलिए घर की सुख समृद्धि के लिए इस पौधे को घर में इन्हीं दिशाओं में लगाना चाहिए। मुख्य रूप से ईशान कोण में लगा अपराजिता का पौधा आपके लिए और घर की सुख समृद्धि के लिए बहुत अच्छा हो सकता है। आप इस पौधे को मुख्य द्वार के दाहिनी ओर भी लगा सकती हैं या इसे गमले में लगाकर रख सकती हैं।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मौली , कलावा बांधते समय मंत्र का उच्चारण
पुरोहित / पंडित जी रक्षा सूत्र या कलावा बांधते समय एक मंत्र का उच्चारण करते हैं। उस मंत्र को बोलते-बोलते ही वह यह धागा हाथ पर बंधा जाता है।
इसी घटना का जिक्र ( राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधने का ज़िक्र ) मंत्र के रूप में करते हैं। यह धागा व्यक्ति की कलाई पर बांध देने से उसकी रक्षा होती है।
यह मंत्र कुछ इस प्रकार होता है –
ॐयेन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वां मनुबध्नामि, रक्षंमाचल माचल
इसका अर्थ है – दानवों के महाबली राजा बलि को जिससे बांधा गया था , उसी से मैं तुम्हे बांधता हूं। हे रक्षे! तुम चलायमान न हो, तुम चलायमान न हो।कलावा कब धारण करना चाहिए
हिंदी धर्म शास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए। विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए ।
कलावा बंधवाते समय जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों उसकी मुठ्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए।
पर्व त्योहार के अलावा किसी अन्य दिन कलावा बांध ने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
गर्भ धारण करने के लिए
अगर आपको किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं हो रहा हो तो मंगलवार के दिन कुम्हार के घर आएं और उसमें प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन वाला डोरा ले आएं। उसे किसी गिलास में जल भरकर दाल दें। कुछ समय पश्चात डोरे को निकाल लें और वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है अगर संभव हो तो उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही रमण करें। गर्भ की स्थिति बनते ही उस डोरे को हनुमानजी के चरणों में रख दें।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
इस साल 27 नवंबर को गुरुनानक जयंती मनाई जाएगी। सिख धर्म के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन को प्रकाश पर्व और गुरु पूरब के नाम से भी जाना जाता है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। कहते हैं कि इसी दिन नानक जी का जन्म हुआ था। आपतो बता दें कि गुरु नानक जी ने ही सिख धर्म का नींव रखी थी, इसलिए उन्हें सिखों का पहला गुरु माना जाता है। इस खास अवसर पर हम आपको पंज प्यारे के बारे में बताएंगे। आपने सिख धर्म में अक्सर इस शब्द को सुना होगा। तो आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से पंज प्यारे के बारे में।
पंज प्यारे कौन थे? सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह जी के आह्वान पर धर्म के रक्षा के लिए जो 5 लोग अपना सिर कटवाने के लिए तैयार हुए थे उन्हें पंज प्यारे कहा जाता है। कहा जाता है कि इन पांच लोगों को गुरु गोबिंद ने अमृत पिलाया था। इन पंज प्यारों में भाई साहिब सिंह,धर्म सिंह, हिम्मत सिंह, मोहकम सिंह और भाई दया सिंह का नाम शामिल है। इन पांच लोगों को सिख धर्म में पंज प्यारे कहा जाता है। आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद ने इन्हें ‘पंज प्यारे’ नाम दिया था। इन्हें पहले खालसा के रूप में पहचान मिली। यही वजह है कि पंज प्यारे शब्द का सिख समुदाय में बहुत अधिक महत्व रखता है।_
सिख धर्म से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, बैसाखी के मौके पर आनंदपुर साहिब की पवित्र भूमि पर हजारों की संख्या में संगत जुटी थी, जिसका नेतृत्व गुरु गोबिंद सिंह जी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए मुझे पांच बंदों की जरूरत है, जो अपने बलिदान से धर्म की रक्षा करने में सक्षम हों। तब धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना शीश भेंट करने के लिए पांच प्यारे उठे। कहते हैं कि सबसे पहले इन्हें ही खालसा का रूप दिया गया था।
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⚜️ हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है। आज शरद पूर्णिमा है और आज ही के दिन सांसारिक जीवन एवं आध्यात्मिक जीवन का अंतर भगवान श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में गोपियों के साथ रास रचाकर बताया था। इसीलिये आज के दिन देश के बहुधा क्षेत्रों में रात्रि में लोग नृत्य-गीतादि के आयोजनों के साथ खुले आसमान के तले खीर बनाकर भगवान को समर्पित कर उसे प्रसाद की तरह मिल-बाँटकर खाते हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस रात्रि आसमान से चन्द्रमा अपनी किरणों के साथ अमृत की वर्षा करता है। जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा तिथि में उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये। जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये।
पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है। इसलिये आज के दिन माता महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है। पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है।

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