ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 27 मार्च 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 27 मार्च 2023

महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
👣 27 मार्च 2023 दिन सोमवार को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष कि बासन्तीय नवरात्रि का छठवाँ दिन है। आप सभी सनातनी बंधुओं को बासन्तीय नवरात्रा के छठवें दिन की माता चंडी की छठवीं स्वरूप माँ कात्यायनी के उपासना की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर वसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – षष्ठी 19:24 PM बजे तक उपरान्त सप्तमी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी : षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है।
💫 नक्षत्र – रोहिणी 17:25 PM तक उपरान्त मृगशिरा नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा होता है। रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रह्मा हैं और ब्रह्मा प्रकृति के क्रिएटर हैं।
🔔 योग – आयुष्मान 01:16 AM तक उपरान्त सौभाग्य योग है।
प्रथम करण : तैतिल – 05:27 पी एम तक
द्वितीय करण : गर – 06:10 ए एम, मार्च 28 तक
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : सोमवार का (अशुभ गुलिक) काल 01:59 पी एम से 03:31 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 07:30 बजे से 09:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:55:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:05:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:44 ए एम से 05:31 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:07 ए एम से 06:18 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:02 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:35 पी एम से 06:58 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:36 पी एम से 07:46 पी एम
💧 अमृत काल : 12:04 पी एम से 01:46 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:03 ए एम, मार्च 28 से 12:50 ए एम, मार्च 28
सर्वार्थ सिद्धि योग : पूरे दिन
💧 अमृत सिद्धि योग : 03:27 पी एम से 06:16 ए एम, मार्च 28
❄️ रवि योग : 06:18 ए एम से 03:27 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-मंदिर में छैने से बनी मिठाई अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/अमृतयोग, विश्व पर्यटन दिवस, वर्ल्ड थिएटर डे, स्वतंत्रता सेनानी विमल प्रसाद चालिहा स्मृति दिवस, सर सैयद अहमद ख़ान, (भारतीय बौद्धिक मुस्लिम) पुण्य तिथि, प्रमुख नेता पंडित कांशीराम स्मृति दिवस, अभिनेत्री प्रिया राजवंश पुण्य तिथि, विश्व थियेटर (रंगमंच) दिवस
✍🏼 विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर की पूर्व दिशा में सीढ़ियों का निर्माण नहीं करवाना चाहिए। पूर्व दिशा में सूर्य भगवान दर्शन देते हैं। मंदिर बनवाने के लिए भी घर की पूर्व या उत्तर दिशा को ही चुना जाता है, क्योंकि ये दिशाएं शुभ होती हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की पूर्व दिशा में सीढ़ियों का निर्माण कभी भी नहीं करवाना चाहिए। पूर्व दिशा में सीढ़ियां बनवाने से घर की सुख-शांति पर उल्टा असर पड़ता है। साथ ही घर के सदस्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इतना ही नहीं परिवार के लोगों को मिलने वाले अच्छे अवसर भी धीरे-धीरे हाथ से फिसल जाते हैं। इसके अलावा पूर्व दिशा में सीढ़ियों का होना हृदय रोग का कारक बनती हैं। तो घर बनवाते या खरीदते समय सीढ़ियों की दिशा का जरूर ख्याल रखें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां
चोकर के कुछ पुष्टिकर प्रयोग
चोकर के लड्डू : 400 ग्राम चोकर के कड़ाही में 3-4 चम्मच देशी घी में सेंक लें | इसमें 250 ग्राम गुड़, 100 ग्राम खजूर, 50 ग्राम किशमिश या मनुक्का व थोड़ी इलायची मिलाकर खरल में कूट के इसके लड्डू बना लें | ये लड्डू पुष्टिकारक तथा रक्त व वल-वीर्य वर्धक है |
चोकर का हलवा : 50 ग्राम चोकर को सेंक लें | एक गिलास खौलाते हुए पानी में 50 ग्राम गुड़ घोल दें | इसमें सेंका हुआ चोकर डालकर धीमी आँच पर अच्छे- से पकायें | फिर २ चम्मच घी डाल के नीचे उतार लें | चाहें तो इलायची, काजू, बादाम अथवा किशमिश आदि भी डाल सकते हैं | यह हलवा स्वादिष्ट, सुपाच्य तथा कब्ज में लाभदायी है |
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
पानी की कमी – कैसे करें पूरी
एक दिन में 8-10 गिलास पानी पीएं
नींबू पानी, शिकंजी नारियल पानी पीएं
तरबूज,खरबूज संतरा ज़्यादा खाएं
दही-छाछ ज़्यादा पीएं
शरीर के लिए पानी – कितना ज़रूरी ?
शरीर में 70% हिस्सा पानी
मेटाबॉलिज़्म स्ट्रॉन्ग करता है
दिन में 3-4 लीटर पानी पीए
पानी पीने का तरीका – कब कितना पीएं
एक ग्लास पानी से दिन शुरु करें
प्यास लगते ही पानी पीएं
एक साथ ज़्यादा पानी ना पीएं
घूंट-घूंट में पानी पीएं
पानी बैठकर ही पीना चाहिए
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
आज नवरात्रा की षष्ठी तिथि है। इसलिए आज के दिन आदिशक्ति माता श्री जगतजननी जगदम्बिका माता श्री दुर्गा देवी के छठे रूप माता श्री कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वही आदिशक्ति जगतजननी माता कात्यायनी कहलाती हैं।
नवरात्रि में उपवास एवं साधना करनेवाले भक्तों के लिए आज के दिन हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा ऐसा अनुभव किया गया है, कि उनका मन आज आज्ञाचक्र में स्थित होता है। आज माता कात्यायनी की उपासना से साधकों के आज्ञा चक्र जाग्रत होकर सिद्धियों को स्वयंमेव ही प्राप्त हो जाता है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वदा के लिए विनष्ट हो जाते हैं।
इनका स्वरूप अत्यन्त ही दिव्य और स्वर्ण के समान देदीप्यमान है। इनकी चार भुजायें हैं, इनका दाहिना ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है। तथा नीचे का हाथ वरदमुद्रा में रहता है। बांये ऊपर वाले हाथ में तलवार और निचले हाथ में कमल का फूल लिए रहती हैं। और इनका वाहन सिंह है। आज के दिन साधक का मन आज्ञाचक्र में स्थित होता है। योगसाधना में आज्ञाचक्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
इस चक्र में स्थित साधक कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। पूर्ण आत्मदान करने से साधक को सहजरूप से माँ के दर्शन हो जाते हैं। माँ कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता की आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम हो जाता है। जिनकी भुजाओं में चन्द्रहास नामक तलवार शोभायमान हो रहा है। श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी हमारा कल्याण करें।
माता दुर्गा के छठा रूप महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं। महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा के इस रूप को कात्यायनी कहा गया है। देवी कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। इनकी पूजा अर्चना द्वारा भक्तों के सभी संकटों का नाश हो जाता है।
माता कात्यायनी के पूजन से भक्तों के भीतर एक अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इस दिन साधकों के साधारण पूजन से ही माता कात्यायनी सहज रूप से ही अपने भक्तों को दर्शन दे देती हैं। जो साधक कुण्डलिनी जागृत करने की इच्छा से देवी की अराधना में समर्पित होते हैं। उन्हें दुर्गा पूजा के छठे दिन माँ कात्यायनी जी की सभी प्रकार से विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए। फिर मन को आज्ञा चक्र में स्थापित करने हेतु माता से प्रार्थना करनी चाहिए।
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⚜️ आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजनकरें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति केलिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा परबाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।
जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमनेका कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायेंमनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होताहै और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।

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