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काजरी तीज पूजा में इन सामग्रीयो की पडेगी जरुरत, यहां जानें पूजा की सही विधि और मुहूर्त

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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⚜️ काजरी तीज पूजा में इन सामग्रीयो की पडेगी जरुरत, यहां जानें पूजा की सही विधि और मुहूर्त….
🔘 HEADLINES
🔹 कजरी तीज का त्योहार बहुत ही शुभ माना जाता है।
🔹 यह भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है।
🔹 इस व्रत को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
👉🏼 हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसके अलावा कजरी तीज के शुभ अवसर पर भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती की जोड़ी की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं। यही नहीं इसके प्रभाव से संतान प्राप्ति, पति की अच्छी सेहत, धन लाभ और मनचाहा जीवनसाथी पाने के योग भी बनते हैं। इस बार 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज है। इस दिन पूजा के लिए कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है। आइए आचार्य श्री गोपी राम से इन सभी के बारे में जानते हैं।
📆 कजरी तीज 2025 तिथि
पंचांग की मुताबिक भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 12 अगस्त को सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि के अनुसार 12 अगस्त 2025 को कजरी तीज मनाई जाएगी।
⚛️ कजरी तीज पूजा मुहूर्त
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 23 मिनट से 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
✡️ विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक रहने वाला है
🐃 गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 3 बजे से 7:25 बजे तक है।
🗣️ निशिता काल मुहूर्त रात 12 बजकर 5 मिनट से 12:48 मिनट तक रहेगा।
🌟 सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 11:52 मिनट से 13 अगस्त की सुबह 5 बजकर 49 मिनट तक रहने वाला है
⭐ अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 3-12:50 मिनट तक रहेगा।
📑 कजरी तीज पूजा सामग्री लिस्ट
मां पार्वती और शिवजी की मूर्ति, पीला वस्त्र, जटा नारियल, सुपारी, कलश, अक्षत या चावल, दूर्वा घास, घी, कपूर, कच्चा सूता, नए वस्त्र, केला के पत्ते, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, जनेऊ, अबीर-गुलाल, श्रीफल, चंदन, गाय का दूध, गंगाजल, दही, मिश्री, शहद, पंचामृत, मां पार्वती को चढ़ाने के लिए सुहाग का सामान।
🍱 कजरी तीज की पूजा विधि
▪️ इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
▪️ इसके बाद पूजा स्थल के पास ही एक चौकी रखें और उस पर लाल रंग या पीले रंग का कपड़ा बिछा लें।
▪️ उस चौकी पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें। आप चाहें तो ये मूर्ति आप मिट्टी से स्वयं भी बना सकती हैं।
▪️ मूर्ति के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
▪️ माता गौरी को सोलह श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
▪️ इसके बाद शिव-गौरी की विधि विधान से पूजा करें।
▪️ इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र, गाय का दूध, गंगा जल, चंदन, भांग, इत्र और धतूरा अर्पित करें।
▪️ इसके बाद हाथ में अक्षत लेकर कजरी तीज की कथा सुनें।
▪️ फिर रात में चंद्रदेव की पूजा करें और हाथ में चांदी की अंगूठी और गेहूं के दाने लेकर चांद को जल अर्पित करें।
▪️ इस दिन गरीब सुहागिन महिला को सुहाग का सामान जरूर भेंट करें और उनका आशीर्वाद लें।
▪️ इसके बाद अपने अपने सास-ससुर पति के पैर छूकर उनका आर्शीवाद लें और व्रत खोल लें।
🌝 कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
कजरी तीज व्रत का पारण महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही करती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि इस दिन चंद्रदेव को जल का अर्घ्य देते समय हाथ में चांदी की अंगूठी या सिक्का और गेहूं के दाने जरूर ले ले लें। अर्घ्य देने के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इसके बाद व्रत खोल लें।
💁🏻 कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज का व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती से अपने सुखी और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कजरी तीज को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तप किया था। इसके साथ ही कजरी तीज का व्रत भी रखा था। ऐसे में महिलाएं पति की सलामती के लिए यह व्रत रखती हैं। वे सोलह शृंगार करते हुए पति के लिए यह व्रत रखती हैं।
📖 कजरी तीज की कथा
कजरी तीज की एक प्रचलित कथा है, उसके अनुसार, ‘किसी गांव में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी कजरी तीज का व्रत करना चाहती थी। भगवान को भोग लगाने के लिए ब्राह्मण की पत्नी ने उसे सत्तू लाने को कहा। पैसे न होने के कारण ब्राह्मण ने चोरी करने की योजना बनाई और रात में वह एक दुकान में घुसकर सत्तू चुराने लगा। तभी दुकानदार ने उसे पकड़ लिया। ब्राह्मण ने उसे सारी बात सच-सच बता दी। पूरी बात जानकर दुकानदार खुद सत्तू लेकर ब्राह्मण के घर गया। भगवान के प्रति आस्था देखकर दुकानदार ने ब्राह्मण की पत्नी को अपनी बहन बना लिया और खून धन भी दिया।

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