स्कूल शिक्षा विभाग का एक और कारनामा, फर्नीचर खरीदी में दो करोड़ का घोटाला उजागर

जरूरत के बिना स्कूलों में जबरन पहुंचाया गया कॉन्फ्रेंस हॉल का फर्नीचर, भुगतान के लिए बनाया जा रहा दबाव
सिलवानी। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में एक और बड़ा फर्नीचर घोटाला सामने आया है। बताया जा रहा है कि करीब दो करोड़ रुपये की फर्नीचर खरीदी में अनियमितता करते हुए जिले के कई स्कूलों में कॉन्फ्रेंस हॉल के नाम पर टेबल-कुर्सियां जबरन सप्लाई कर दी गईं, जबकि कई स्कूलों में इसकी जरूरत ही नहीं थी।
जानकारी के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में बच्चों के लिए फर्नीचर खरीदी की प्रक्रिया संकुल स्तर पर की जानी है, लेकिन इस प्रक्रिया में लोक शिक्षण संचालनालय स्तर से सीधे दखल दिया गया। रायसेन जिले के सिलवानी क्षेत्र के करीब एक दर्जन हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों से दबाव बनाकर फर्नीचर खरीदी के आदेश जनरेट कराए गए।
बताया जा रहा है कि बीईओ कार्यालय में पदस्थ लिपिक शिवम श्रीवास्तव द्वारा प्राचार्यों को कार्यालय बुलाकर पहले से तैयार कार्यादेशों पर हस्ताक्षर कराए गए। प्राचार्यों ने जब आपत्ति जताई कि उनके पास न तो वरिष्ठ कार्यालय से ऐसा कोई आदेश है और न ही खरीदी के लिए कोई बजट, तब उन्हें कहा गया कि भुगतान आपको नहीं करना है, ऊपर से आदेश है, केवल साइन करना है।
स्कूलों में पहुंचा कॉन्फ्रेंस हॉल का फर्नीचर
कुछ दिनों बाद स्कूलों में करीब 30-35 रिवॉल्विंग कुर्सियां और एक बड़ी कॉन्फ्रेंस टेबल पहुंचने लगीं। प्राचार्यों ने आपत्ति जताई कि स्कूलों में बच्चों के बैठने तक की जगह नहीं है, ऐसे में कॉन्फ्रेंस हॉल का फर्नीचर कहां रखा जाएगा। इसके बावजूद सप्लायर द्वारा फर्नीचर स्कूलों में उतरवा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार श्रीप्रदा सेल्स एंड कॉरपोरेशन, श्री श्याम सेल्स एंड कारपोरेशन, स्वास्तिक इंटरप्राइजेज भोपाल के माध्यम से सप्लाई किया गया। सप्लायर ने प्राचार्यों से कहा कि यह सामग्री सीधे डीपीआई स्तर से भेजी जा रही है, इसलिए इसे लेना ही पड़ेगा।
भुगतान के लिए बनाया जा रहा दबाव
फर्नीचर पहुंचने के बाद अब बीईओ कार्यालय पर भुगतान कराने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि बीईओ रुपेंद्र ठाकुर ने स्पष्ट कहा है कि जब तक बिल-वाउचर और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाएंगे, भुगतान नहीं किया जाएगा।
इन स्कूलों में पहुंचाया गया फर्नीचर
सिलवानी क्षेत्र के जिन स्कूलों में यह फर्नीचर भेजा गया उनमें
हाईस्कूल खैरी, कीरतपुर, सियलवाड़ा, करतोली, चीकली, देवरी हतनापुर, खमरिया खुर्द, चंदन पिपरिया, छींद, नारायणपुर तथा हायर सेकेंडरी प्रतापगढ़ और साईंखेड़ा शामिल हैं।
समस्त प्राचार्यों ने कार्रवाई हेतु लिखित आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दिया है
जिसमें बताया कि कूटरचित तरीके से कार्यादेश तैयार कराकर हस्ताक्षर कराए गए और बाद में फर्नीचर भेज दिया गया। प्राचार्यों ने स्पष्ट किया है कि एसएमडीसी द्वारा इस सामग्री के भुगतान की स्वीकृति नहीं दी जाएगी तथा संबंधित फर्म से सामग्री वापस ले जाने को भी कहा गया है।
विभागीय अधिकारियों पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय में फर्नीचर सप्लाई का कार्य उप संचालक पी.के. सिंह के जिम्मे बताया जा रहा है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि जरूरत के बिना स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई कर करोड़ों रुपये का खेल किसके इशारे पर किया गया।
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।
*जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा जांच के लिए डीपीआई को लिखा पत्र*
जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक ने बताया कि सिलवानी क्षेत्र के 13 स्कूलों में 16-16 लाख रुपए की सामग्री पहुंचाने की शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बीईओ कार्यालय सिलवानी में किसी भी प्रकार की फाइल उपलब्ध नहीं है। डीईओ के अनुसार प्राचार्यों की शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच के लिए डीपीआई भोपाल को पत्र लिखा गया है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी।



