मध्य प्रदेश

फोरलेन हाईवे चौड़ीकरण और सौंदर्यकरण कार्य अधूरा पड़ा, वाहनों के आवागमन में परेशानी, रात को फोरलेन पर छाया रहता है अंधेरा

बिजली पोल लगाने और बंगले के सामने डिवाइडर बनाए अधूरे दोनों ठेकेदार गायब
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन।
रायसेन शहर को खूबसूरत बनाने और फोरलेन हाइवे 86 सड़क के साइड में नालों का निर्माण कराए जाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉक्टर प्रभु राम चौधरी द्वारा लगभग 51 करोड रुपये की राशि स्वीकृत की थी ।इन दो निर्माण कार्यों का दो अलग-अलग ठेकेदारों को ठेका दिया गया है। 35 करोड़ रुपयेकी लागत से हाईवे फोरलेन सड़क चौड़ीकरण का ठेका हरियाणा के जिंदल एंड कंपनी को दिया गया और 21 करोड़ की लागत से बिजली पोल लगाने डिवाइडर निर्माण और और स्ट्रीट लाइट का ठेका पीडब्ल्यूडी द्वारा ठेकेदार अंकित जैन सीहोर को दिया गया था । इधर हाईवे सड़क चौड़ीकरण का कार्य एक ठेकेदार को लेबर कॉन्ट्रैक्ट पर हरियाणा के ठेकेदारों के ठेकेदार जिंदल द्वारा दिया गया ।वही ठेकेदार अंकित जैन द्वारा पोल शिफ्टिंग और डीपी शिफ्टिंग सहित बिजली पोल लगाने डिवाइडर के बीच पौधरोपण का कार्य दिया गया था ।यह दोनों निर्माण कार्य लगभग ₹51करोड़ रुपये की लागत के थे।
बताया जाता है कि यह दोनों कार्य शुरुआती दौर से ही कछुआ रफ्तार से चल रहे थे ।ठेकेदार अंकित जैन सीहोर द्वारा डिवाइडर और बिजली पोल लगाने का काम भी अधूरा पड़ा हुआ है ।वर्तमान में करीब 4 -5 महीने से ठेकेदार सामान समेट कर गायब हो चुका है। जिससे नेशनल हाईवे फोरलेन सड़क पर रात के समय अंधेरा छाया रहता है । कलेक्टर बंगले से लेकर गोपालपुर बायपास तक अंधेरे में डूबी रहती है ।जिससे मवेशियों के सड़क पर बैठने से सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है ।लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और साइड इंचार्ज एसडीओ पीडब्ल्यूडी सरदार परमजीत सिंह चावला इंजीनियर आरके बिटोरिया इंजीनियर केके खरे उक्त दोनों निर्माण कार्यों में सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं कर कर पाए । और ना ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारी किशन वर्मा ने भी सही तरीके से रुचि नहीं ली ।जिससे फोरलेन हाईवे चौड़ीकरण निर्माण कार्य सड़क का घटिया निर्माण और पुल पुलिया का निर्माण भी गुणवत्तापूर्ण नहीं बन सके। जिससे वाहन चालकों सहित आम लोगों के आवागमन में बारिश के अलावा अन्य जिलों में भी समस्या खड़ी है ।नालों का निर्माण सही तरीके से बड़े नाले बनना थे ।वह नालियां तक सीमित है ।जिससे बारिश में हाईवे पर जलमग्न की स्थिति बनी रही ।जहां सड़क को लेवल ऊंचा करके बनाना था वहां नीचे तरीके से बना दी गई सड़क। जिससे पानी सड़क पर ही हिलोरे मारता रहा ।सड़क सौंदर्यीकरण का ठेका ठेकेदार अंकित जैन सीहोर को दिया गया था ।यह लागत अनुमानित लागत लगभग ₹21करोड़ रुपये थी। जिसमें फोरलेन सड़क के बीचोंबीच बिजली पोल और ट्रांसफार्मरों की शिफ्टिंग होना चाहिए थी। इसके अलावा फोरलेन सड़क पर बिजलीपोल लगाने और डिवाइडर निर्माण कराए जाने से 21 करोड़ की लागत के यह सभी निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हुए हैं । लोगों का कहना है कलेक्टर बंगले के सामने तक तो डिवाइडर बना दिए गए हैं ।बाकी जगह अधूरे हैं। बताया जाता है कि वर्क ऑर्डर में डिवाइडरों के निर्माण कलेक्टर बंगला से लेकर सागर भोपाल तिराहे तक नहीं बन सके हैं।
लेकिन बिजली पोल आज दिनांक तक नहीं लगाए गए।जो लोनिवि एसडीओ कार्यालय परिसर में पड़े हैं शोभा बढ़ा रहे हैं ।
इस संबंध में सरदार परमजीत सिंह चावला एसडीओ पीडब्ल्यूडी रायसेन का कहना है कि उक्त फोरलेन हाइवे चौड़ीकरण और डिवाइडर सौंदर्यीकरण निर्माण कार्य को जल्द ही गति दी जाएगी।घटिया निर्माण कार्यों की जांच कर दोबारा से बनवाया जाएगा।

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