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न्यायालय से हरियाली का संदेश: एक पौधा, हजार उम्मीदें

माननीय न्यायाधीशों की पहल—पर्यावरण संरक्षण की दिशा में न्यायिक जागरूकता का सशक्त कदम
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए व्यवहार न्यायालय ढीमरखेड़ा परिसर में शुक्रवार को विशेष पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । यह कार्यक्रम म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के पालन में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और न्यायिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जीतेन्द्र कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में हुआ, जिसमें माननीय न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने न्यायालय परिसर में पौधे लगाकर हरियाली का संदेश दिया। इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेश पयासी, अधिवक्ता रमेश पटेल सहित न्यायालयीन स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति रही।
पौधारोपण के दौरान माननीय न्यायाधीश ने पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं मानव जीवन के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने कहा, “जैसे कहा जाता है—‘जल है तो कल है’, उसी प्रकार ‘वन है तो जीवन है’। पेड़ हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, स्वयं विष ग्रहण कर हमें अमृत देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भगवान शंकर ने विषपान कर संसार की रक्षा की थी।”
उन्होंने यह भी बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता में रखते हुए सभी न्यायालय परिसरों में पौधारोपण के निर्देश जारी किए गए हैं। इसी कड़ी में यह कार्यक्रम आयोजित कर एक सकारात्मक संदेश समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने का संकल्प लिया। यह पहल न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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