मध्य प्रदेश

अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को: अबूझ मुहूर्त में बिना पंचांग देखे शुरू होंगे शुभ कार्य

खैरी जयपुरा में साहू समाज का विवाह सम्मेलन
सिलवानी। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि नए कार्यों की शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन को “अबूझ मुहूर्त” कहा जाता है, यानी किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस वर्ष अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को मनाई जाएगी।
पंडित अभिषेक शास्त्री के अनुसार पंचांग के मुताबिक तृतीया तिथि 19 अप्रैल को शुरू हो रही है, लेकिन 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय तिथि विद्यमान रहने के कारण इसी दिन पर्व मनाया जाएगा। हिंदू परंपरा में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है।
इस बार अक्षय तृतीया पर दुर्लभ गजकेसरी योग, रोहिणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। गजकेसरी योग को राजयोग के समान माना जाता है, जिसमें चंद्रमा और गुरु (बृहस्पति) केंद्र स्थिति में होते हैं। ऐसे शुभ योगों में किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक मानी जाती है।
अक्षय तृतीया पर वट वृक्ष के नीचे मिट्टी के पुतरा-पुतरिया का विवाह कराने की परंपरा भी निभाई जाती है। इन दिनों बाजार में सजे-धजे पुतरा-पुतरिया 100 से 150 रुपए तक में उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग परंपरा अनुसार खरीद रहे हैं।
इसी अवसर पर परशुराम जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा। क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी।
वहीं ग्राम खैरी जयपुरा में साहू समाज द्वारा निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन की सहभागिता अपेक्षित है।

Related Articles

Back to top button