ग्राम पंचायतों में फर्जी बिलों का बड़ा खेल, बिना जीएसटी नंबर के हो रही खरीदारी,

मिठाई की दुकानों से रिचार्ज और पेन-कॉपी तक खरीदी, अधिकारी मौन
ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार ने अब सारी सीमाएं लांघ दी हैं। विकास कार्यों के लिए आने वाले फंड का इस्तेमाल ईमानदारी से करने के बजाय सरपंच-सचिवों ने इसे अपनी जेब भरने का जरिया बना लिया है। फर्जी बिल लगाकर पंचायत के खाते से मनमानी खरीदारी की जा रही है। ताजा मामला जनपद पंचायत दमोह की ग्राम पंचायत कनिया घाट पटी से सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की पोल खोल दी है। पंचायत में बिना जीएसटी नंबर वाले बिलों को पास कर पैसा निकाला जा रहा है। पंचायत खाते से मोबाइल शॉप पर खरीदारी की गई है। वहीं, मिठाई की दुकानों से न सिर्फ मिठाई खरीदी गई बल्कि पेन, कॉपियां और मोबाइल रिचार्ज तक दर्शाए गए हैं। यह पूरा खेल पंचायत में व्याप्त गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करता है।
*फर्जीवाड़े की परतें खुलीं….*
1) पंचायत के फंड से मोबाइल शॉप पर महंगी खरीदारी।
2) मिठाई दुकान से मिठाई के नाम पर पेन-कॉपी और मोबाइल रिचार्ज का बिल।
3) 300 रुपये के मासिक रिचार्ज को 1000 रुपये में दर्शाया गया।
4) बिना जीएसटी नंबर वाले फर्जी बिल पास कर लाखों का गबन।
5) विकास कार्यों का नामोनिशान नहीं, कागजों में ही योजनाएं पूरी।
*सरपंच प्रतिनिधि की सफाई – आधी सच्चाई, आधा बचाव*
ग्राम पंचायत कनिया घाट पटी के सरपंच प्रतिनिधि जमना प्रसाद ने सफाई में कहा – “सरकार से आदेश है कि सहायक सचिव को मोबाइल दिया जाए, इसलिए मोबाइल खरीदा गया। मिठाई 15 अगस्त के कार्यक्रम पर खरीदी गई थी।”
हालांकि, अन्य फर्जी बिलों और रिचार्ज के गोरखधंधे पर उन्होंने गोलमोल जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
*अधिकारियों की चुप्पी संदिग्ध.. मिलीभगत या लापरवाही*
जब इस फर्जीवाड़े पर जनपद पंचायत सीईओ दमोह हलधर मिश्रा से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा। जिम्मेदार अधिकारियों की यह चुप्पी भ्रष्टाचार में उनकी मिलीभगत या लापरवाही को उजागर करती है।
*जनता की मांग – जांच और कार्रवाई*
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत कनिया घाट पटी ही नहीं, बल्कि पूरे जिले की पंचायतों का विशेष ऑडिट कराया जाए। साथ ही फर्जी बिलों के जरिए पैसा हड़पने वाले सरपंच, सचिव और अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस खेल पर रोक नहीं लगी तो पंचायतें जनसेवा के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएंगी।



