Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 28 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 28 सितम्बर 2025
28 सितम्बर 2025 दिन रविवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि है। आज की षष्ठी तिथि को तपषष्ठी भी कहा जाता है। आज कि षष्ठी को दुर्गा षष्ठी भी कहा जाता है। आज सायं काल में माता दुर्गा देवी की प्रतिमा का आगमन भी पूजा पंडालों में हों जाएगा। आज माता जगज्जननी जगदम्बा के छठे रूप माता श्री कात्यायनी देवी की पूजा – अर्चना एवं आराधना का सुअवसर होता है। आज ज्यैष्ठा नक्षत्र भी है तो माता सरस्वती देवी का भी आवाहन – पूजन करना चाहिए। आज साथ ही माता कात्यायनी को बिल्व पत्र से विधीवत अर्चना करनी चाहिए। आज बंगाली मत के अनुसार माता का आगमन इस वर्ष गज वाहन पर होने से सुन्दर वर्षा का योग बनेगा। आज रवि योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। आप सभी सनातनियों को “माता श्री कात्यायनी देवी की पूजा – अर्चना एवं आराधना” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌧️ मास – आश्विन मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – रविवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 02:27 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 03:54 AM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता भगवान इंद्र हैं, जिन्हें देवताओं का राजा माना जाता है
⚜️ योग – आयुष्मान योग 12:31 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 02:27 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 03:32 ए एम, सितम्बर 29 तक वणिज
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:11:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:58:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:24 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:12 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:35 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:11 पी एम से 02:59 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:10 पी एम से 06:35 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:10 पी एम से 07:23 पी एम
💧 अमृत काल : 06:05 पी एम से 07:53 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:36 ए एम, सितम्बर 29
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 03:55 ए एम, सितम्बर 29 से 06:13 ए एम, सितम्बर 29
❄️ रवि योग : 06:12 ए एम से 03:55 ए एम, सितम्बर 29
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में आठ बादाम चढ़ाएं।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ तपषष्ठी (उड़िसा)/ आध्यात्मिक गुरु शिरडी साईं बाबा प्राकट्योत्सव/विश्व रेबीज़ दिवस, विश्व नदी दिवस, भारतीय पार्श्व गायिका लता मंगेशकर जन्म दिवस, साहित्यकार श्री नारायण चतुर्वेदी जन्म दिवस, मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मल लोढ़ा जन्म दिवस, राष्ट्रीय अच्छे पड़ोसी दिवस, शहीद-ए-आजम भगत सिंह जयन्ती, ओलंपियन अभिनव बिंद्रा जन्म दिवस, हरित उपभोक्ता दिवस, अभिनेता रणबीर कपूर जन्म दिवस, हिंदी कवि सुमित्रानंदन पंत स्मृति दिवस, अंतरराष्ट्रीय जानने का अधिकार दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है। 🏚️ *Vastu tips* 🏘️ घर में झाडू रखने की सबसे सही जगह नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम दिशा) मानी गयी है। वास्तु के अनुसार, इस दिशा में रखा झाड़ू रखने से आपका जीवन व्यवस्थिति हो जाता है, साथ ही माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी आप प्राप्त करते हैं। आपके जीवन की कई परेशानियों को इस दिशा में रखा झाड़ू दूर कर सकता है। अगर इस दिशा में झाड़ू रखने की जगह न हो तो आप पश्चिम दिशा में भी झाड़ू रख सकते हैं। इन बातों का भी रखें ध्यान झाड़ू आपको कभी भी बेडरूम, पूजा घर, स्टोर रूम में भी नहीं रखना चाहिए। आप बाल्कनी में झाडू रख सकते हैं या इसके लिए एक अलग जगह बना सकते हैं। झाडू को लांघने से भी आपको बचना चाहिए और घर में झाडू इस तरह रखना चाहिए कि किसी की नजर उसपर न पड़ें। इन वास्तु नियमों का पालन करने से झाड़ू बरकत देने की वजह बन सकता है। ♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अतिबला के पत्तों के लाभ अतिबला के पत्तों के कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
त्वचा के लिए : अतिबला के पत्ते त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं।
पाचन तंत्र के लिए : अतिबला के पत्ते पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए: अतिबला के पत्ते प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
उपयोग करने से पहले अतिबला के पत्तों का उपयोग करने से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
चिकित्सक से परामर्श लें: अतिबला के पत्तों का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
उचित मात्रा में उपयोग करें : अतिबला के पत्तों का उपयोग उचित मात्रा में करना चाहिए।
गुणवत्ता की जांच करें: अतिबला के पत्तों की गुणवत्ता की जांच करना आवश्यक है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
आहार और जीवनशैली में बदलाव
गर्म पानी का सेवन: दिन भर गुनगुना पानी पिएं। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करने और शरीर से विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन) को बाहर निकालने में मदद करता है।
फाइबर युक्त भोजन: अपने आहार में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। फाइबर आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है और पाचन को बेहतर बनाता है।
हर्बल चाय: जीरा, धनिया और सौंफ (जीरा-धनिया-सौंफ) की चाय पीना बहुत फायदेमंद है। ये मसाले पाचन को सुधारते हैं और सूजन को कम करते हैं।
मसालों का उपयोग: अपने भोजन में अदरक, हल्दी, काली मिर्च और दालचीनी जैसे मसालों का अधिक उपयोग करें। ये मसाले मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करते हैं।
त्रिफला चूर्ण: रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन करें। यह पाचन को ठीक करता है और शरीर की अशुद्धियों को दूर करता है।
सुबह खाली पेट: सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पाचन तंत्र साफ होता है और वजन कम करने में मदद मिलती है।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
भूरिश्रवा कौन था?
भूरिश्रवा राजा बहलिका का पोता था, जो शांतनु का बड़ा भाई था। शांतनु जो कि महामहिम भीष्म के पिता था।
भुरिश्रवा के पिता सोमदत्त और सात्यकि के दादा सिनी के बीच एक बार द्वंद्व युद्ध हुआ था। यह युद्ध भगवान कृष्ण की माता देवकी के स्वयंवर में हुआ था। सीनी इस स्वयंवर में वासुदेव कि ओर से लडे थे और उन्होंने सोमदत्त को पराजित कर दिया था। इसी से सोमदत्त के मन में प्रतिशोध की भावना उत्पन्न हुई और उन्होंने तपस्या करके ऐसे पुत्र का वरदान मांगा जो की उनके इस अपमान का बदला सिनि के वंशज को हरा कर ले सके। इसी वजह से भूरिश्रवा और सात्यकि की शत्रुता प्रसिद्ध थी।
भोर सैदन गाँव जिसे भुर सैदन या भूर सय्यदन के रूप में भी जाना जाता है, उसका नाम भूरिश्रवा के नाम पर रखा गया है । यह कुरुक्षेत्र से 22 किमी और थानेसर से 13 किमी दूर स्थित कुरुक्षेत्र-पिहोवा मार्ग पर स्थित है, जो भुवनेश्वर मंदिर के पास है, यह महाभारत तीर्थ में से एक है। यह भारत के हरियाणा राज्य में कुरुक्षेत्र में स्थित है।
भुरीश्रवा ने कुरुक्षेत्र के महा युद्ध में कौरव पक्ष से भाग लिया था।
युद्ध के 14 वें दिन भूरिश्रवा द्रोणाचार्य के व्यूह में तैनात , अर्जुन को जयद्रथ तक पहुँचने से रोकने का प्रयास करता है। जैसे ही सत्यकी और भीम अर्जुन का समर्थन करने आते हैं, भूरिश्रवा अपना स्थान का त्याग करते है और सत्यकी को चुनौती देते हैं। सत्यकी पहले से ही द्रोण से लड़ने से थक गए थे । सत्यकी एक लंबी और खूनी लड़ाई के बाद लड़खड़ाना शुरू हो जाते है। उनके हथियार नष्ट होने के पश्चात , लड़ाई हाथ से हाथ की लड़ाई में बदल गई। भूरिश्रवा ने सात्यकी को मूर्छित कर दिया और उसे युद्ध के मैदान में घसीटने लगे। कृष्ण अर्जुन को सात्यकि के प्राणों के खतरे के प्रति सतर्क करते है। जब भूरिश्रवा, सात्यकि को मारने की तैयारी कर रहे होते है, अर्जुन बचाव के लिए आता है, और एक तीर मारकर भूरिश्रवा का हाथ काट देता है।
भुरिश्रवा अर्जुन को बिना चुनौती दिए और पीठ पीछे वार करने के लिए दुत्कारता है। तब अर्जुन भुरीश्रवा को मूर्छित सात्यकि पर प्रहार करने के लिए फटकारता है और अभिमन्यु वध में हिस्सा लेने की वजह से उसकी आलोचना करता है।
अपनी भूल का आभास होने पर भुरिश्रव अपने शस्त्रों का त्याग करके युद्धभूमि में योग मुद्रा में बैठ जाते है। तब सत्यकी होश में आता है और उनका वध कर देता है।
इस कुकृत्य के लिए दोनों ओर के योद्धा सात्यकि की निन्दा करते है।
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।



