मध्य प्रदेश

जिला सिहोरा के पर्चे श्रीराम यज्ञ में बांट आवाज बुलंद करने का आह्वान

सिहोरा जिला बनाओ आंदोलन जारी
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । हमारा सिहोरा हमारी जन्मभूमि है, कर्मभूमि है, धर्मभूमि है, पुण्यभूमि है, त्यागमय तपोभूमि है भोग भूमि नही। सिहोरा की ऐसी संतों की भूमि को राजनेताओं द्वारा जिला मुद्दे पर मनहूस बताए जाने पर लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा कुप्रचारित करने वाले राजनेता अपनी ऐसी शब्दावली से बाज आए।
उक्त बातों सहित अन्य सिहोरा जिला के लाभों सहित बातों से सुसज्जित पर्चे को रविवार को श्रीराम महायज्ञ में बाँट लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति के सदस्यों ने लोगों से जिला आंदोलन को जनांदोलन बनाने का आह्वान किया।
तीन हजार लोगों से संपर्क:- रविवार को सिहोरा में चल रहे श्रीराम महायज्ञ में हजारों की संख्या में भक्तगण शामिल हुए। यज्ञ में आने जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समिति ने पर्चों का वितरण किया। समिति का दावा है कि उन्होंने सिहोरा और आसपास के दर्जनों गाँवो के लगभग तीन हजार लोगों तक अपनी बात पर्चे के माध्यम से रखी। सभी ने जिला आंदोलन को समर्थन दिया।
त्यागमय तपोभूमि पुण्यभूमि है सिहोरा:- लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने सिहोरा में विगत 1 मार्च से चल रहे श्रीराम महायज्ञ में उमड़ी भीड़ और बने भक्तिमय वातावरण की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमारे सिहोरा की भूमि त्यागमय तपोभूमि है संतो की भूमि है।परंतु जब जब सिहोरा जिला बनाए जाने की आवाज बुलंद की जाती है राजनेताओं द्वारा यह दुष्प्रचार किया जाता है कि सिहोरा मनहूस है जो भी मुख्यमंत्री सिहोरा जिले की बात करता है वह मुख्यमंत्री नही रह जाता।समिति ने चेतावनी दी कि सिहोरा को इस तरह कलंकित करने वालों को बाज आना चाहिए। वास्तव में सत्य यह है कि जिस भी राजनेता ने सिहोरा के साथ छलावा किया है उसे राजनीति में बुरे दिन देखने पड़े है। समिति ने ऐसे पूर्व विधायको और मुख्यमंत्रियों के नाम भी गिनाए जिन्होंने जिला बनाने की घोषणा मात्र की, बाद में उनका राजनैतिक वजूद ही समाप्त हुआ है।
पर्चे बाँटने पर थाने बैठाया:- बताया जाता है कि विगत शुक्रवार को श्रीराम महायज्ञ के प्रवेश द्वार के बाहर कुछ समिति के सदस्य सिहोरा जिला संबंधी पर्चो का वितरण कर रहे थे। तभी सिहोरा पुलिस द्वारा उन्हें ऐसा करने से पहले रोका गया फिर सिहोरा थाने में भी बुलाया गया। जानकर बताते है कि पुलिस ने पर्चे में कोई भी विवादास्पद बात न होने के कारण बाद में उन्हें जाने दिया। जब इस संबंध में समिति के सदस्यों से पूँछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा कि जिला बनने तक वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। यद्यपि कुछ सिहोरा वासियों द्वारा सोशल मीडिया में उक्त बातें लिखने पर आमजनों ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों की निंदा की।
सिहोरा जिला धरने में विकास दुबे, सियोल जैन, रामजी शुक्ला, ए के शाही, रामलाल साहू, अमित बक्शी, सुशील जैन, नत्थूलाल पटेल, रमेश तिवारी, रमन पांडे सहित अनेक सिहोरावासी मौजूद रहे।

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