धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 19 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 19 मार्च 2025
19 मार्च 2025 दिन बुधवार को चैत्र मास कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि है।आज रंग पंचमी का पावन महोत्सव है। आज मणिपुर में विजय गोविंद हलकंदर का दिन है। आज शुक्र देवता भी पश्चिम में अस्त (दोपहर 13.05 पी एम) हो रहे हैं। आप सभी सनातनियों को “रंग पंचमी के पावन महोत्सव” की हार्दिक शुभकामनाऐं।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 पिंगल संवत्सर विक्रम : 1946 क्रोधी
🌐 संवत्सर नाम पिंगल
🔯 शक सम्वत : 1946 (पिंगल संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5125_

🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – बुधवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि 12:37 AM तक उपरांत षष्ठी
📝 तिथी स्वामी – पंचमी के देवता हैं नागराज। इस तिथि में नागदेवता की पूजा करने से विष का भय नहीं रहता, स्त्री और पुत्र प्राप्ति होती है। यह लक्ष्मीप्रदा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 08:50 PM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं. इस नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं।
⚜️ योग – हर्षण योग 05:37 PM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : कौलव – 11:24 ए एम तक
द्वितीय करण – तैतिल – 12:36 ए एम, मार्च 20 तक गर
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:02:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:58:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:51 ए एम से 05:38 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:15 ए एम से 06:26 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:29 पी एम से 06:53 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:32 पी एम से 07:43 पी एम
💧 अमृत काल : 10:57 ए एम से 12:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, मार्च 20 से 12:52 ए एम, मार्च 20
सर्वार्थ सिद्धि योग : 08:50 पी एम से 06:25 ए एम, मार्च 20
💦 अमृत सिद्धि योग : 08:50 पी एम से 06:25 ए एम, मार्च 20
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो शहद भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ अमृत सिद्धि योग/ रंगपंचमी पर्व/ विजय गोविंद हलकंदर (मणीपूर)/ राष्ट्रीय हँसी दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट कारमेल दिवस, प्रमाणित नर्स दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रीड टू मी दिवस, राष्ट्रीय स्ट्रेच मार्क दिवस, भारत-बांग्लादेश मैत्री, सहयोग और शांति दिवस, श्री एफसी कोहली जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रीड टू मी दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
मोर पंख से घर में पानी के छींटे मारे मोर पंख से घर में पानी के छींटे मारना निगेटिविटी को कम करने में मदद करता है। ‘ऊं द्वारपालाय नम: जाग्रय स्थापय स्वाहा’ बोलते हुए मोर पंख से 21 बार पानी के छींटे घर में मार दें। हर दिनों में यह रह-रह कर करें।
रविवार और मंगलवार को मोर पंख से घर के लोगों की नजर उतारें रविवार और मंगलवार को मोर पंख से घर के लोगों की नजर उतारें। इस दौरान देखें कि आपके घर में कौन का इंसान ज्यादा बीमार रहता है और उस इंसान की मोरपंख से नजर उतारें। इसके लिए गायत्री मंत्र पढ़ते हुए 11 बार एंटीक्लॉक वाइस झाड़ें।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अब आइए देखें कि केले के फूल का आसव कैसे बनाया जाता है।
सबसे पहले आपको केले के फूल को पानी में उबालना होगा। इसके बाद पानी में थोड़ा सा नमक डालें और केले के फूल को अच्छी तरह उबालें। जब केले का फूल पक जाए तो उसे निकाल लें, ठंडा होने दें, छान लें और पानी में आधा चम्मच जीरा पाउडर और काली मिर्च पाउडर मिला दें, और केले के फूल का काढ़ा तैयार हो जाएगा। मधुमेह के रोगी यदि नियमित रूप से केले के फूल का काढ़ा पिएं तो वे अपने मधुमेह को नियंत्रण में रख सकते हैं। यह शरीर में इंसुलिन के स्तर को प्रबंधित करने में बहुत मददगार है।
आरोग्य संजीवनी 🍵
वजन घटाने के लिए करें त्रिफला का सेवन अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक हर्बल त्रिफला को अपने डेली रूटीन में शामिल करें.
इसका नियमित सेवन डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत बनाता है और वजन घटाने में सहायक होता है.
त्रिफला बॉडी को डिटॉक्स करता है, जिससे हार्मफुल टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज्म तेजी से बूस्ट होता है.
इससे फैट बर्निंग प्रोसेस तेज होती है और वजन कम करने में मदद मिलती है.
त्रिफला का सेवन करने से न सिर्फ डाइजेशन बेहतर होता है, बल्कि यह शरीर को हेल्दी और एक्टिव भी बनाए रखता है.
🌹 गुरु भक्ति योग 🌸
अष्ठ सिद्धि -नव निधि क्या हैं? विस्तृत एवं तथ्यात्मक रूप में समझाइए।
अष्ट सिद्धि और नव निधि: विस्तृत एवं तथ्यात्मक विवरण
हिंदू धर्म और योग परंपरा में अष्ट सिद्धि और नव निधि का उल्लेख मुख्यतः आध्यात्मिक, तांत्रिक और योगिक उपलब्धियों के रूप में किया गया है। ये दोनों अवधारणाएँ विशेष रूप से हनुमानजी, योगियों और सिद्ध पुरुषों से जुड़ी हुई हैं।
अष्ट सिद्धि : आठ महाशक्तियाँ अष्ट सिद्धियाँ वे विशेष शक्तियाँ हैं जो योग साधना, तपस्या और आध्यात्मिक उन्नति से प्राप्त होती हैं। ये सिद्धियाँ व्यक्ति को प्रकृति के नियमों से परे जाकर अद्भुत कार्य करने की क्षमता देती हैं।
📖 अष्ट सिद्धियों का विवरण:

प्रसंग: हनुमान चालीसा में तुलसीदासजी ने लिखा है—
“अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता।”
अर्थात, माता सीता ने श्री हनुमान जी को ये सिद्धियाँ प्रदान की थीं।
नव निधि : नौ दिव्य संपत्तियाँ नव निधियाँ वे नौ प्रकार की दिव्य संपत्तियाँ हैं, जो धन, ऐश्वर्य और भौतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। ये विशेष रूप से धन के अधिपति कुबेर से जुड़ी हुई हैं।
🫵🏼 नव निधियों का विवरण:_
प्रसंग: नव निधियाँ मुख्यतः कुबेर देव से संबंधित हैं, और इन्हें देवताओं की संपत्तियाँ माना जाता है। योगियों और सिद्ध पुरुषों के आशीर्वाद से व्यक्ति इन निधियों को प्राप्त कर सकता है।
सारांश – अष्ट सिद्धियाँ योग एवं आध्यात्मिक साधना से प्राप्त होने वाली अलौकिक शक्तियाँ हैं, जबकि नव निधियाँ भौतिक ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक हैं। हनुमानजी को इन दोनों का दाता माना गया है, और इन्हें प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक उन्नति, भक्ति और तपस्या आवश्यक मानी जाती है।
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

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