धार्मिकमध्य प्रदेश

उत्तम संयम का संदेश दे रहा दशलक्षण पर्व, भक्ति में लीन जैन समाज

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। सिलौंडी और कछार गांव बड़ा में दशलक्षण पर्व के अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर भगवान की भक्ति में लीन हैं । मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा और पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं । पर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म का महत्व बताया गया ।
जैन धर्म में दशलक्षण पर्व के अंतर्गत उत्तम संयम का विशेष महत्व माना गया है । संयम का अर्थ अपनी इंद्रियों और मन पर नियंत्रण रखना है । मन, वचन और काय को गलत कार्यों से रोकना ही सच्चा संयम है । इंद्रियों के पांच विषय स्पर्श, रस, गंध, रूप और शब्द पर विजय प्राप्त करना इंद्रिय संयम कहलाता है ।
धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्तम संयम दो प्रकार का होता है—इंद्रिय संयम और प्राणी संयम । इंद्रिय संयम में पांचों इंद्रियों को वश में रखने तथा प्राणी संयम में जीवों की हिंसा से बचने का भाव निहित है । संयमी व्यक्ति मन, वचन और काय से किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचाता ।
श्रद्धालुओं ने बताया कि सच्चा संयम केवल बाहरी आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों पर नियंत्रण रखना भी आवश्यक है। लोभ, क्रोध और मोह पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति ही वास्तविक अर्थों में संयमी होता है । संयम जीवन को अनुशासित और मर्यादित बनाता है तथा आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है ।
वर्तमान भौतिक युग में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, क्रोध और लालच जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखना भी उत्तम संयम के संदेश से जोड़ा जा रहा है । दशलक्षण पर्व के माध्यम से श्रद्धालु संयम, संतोष और अहिंसा का संकल्प लेते हुए आध्यात्मिक साधना में जुटे हैं ।

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