दो माह बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं, सहायक यंत्री की भूमिका पर ठेकेदार ने उठाए सवाल

सीईओ के दो दिवस में रिपोर्ट देने के निर्देश के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, स्मरण पत्र जारी
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। ढीमरखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत धरवारा में निर्माण कार्य की शेष भुगतान राशि 40 हजार दिलाए जाने को लेकर की गई शिकायत की जांच दो माह बाद भी पूरी नहीं होने का मामला सामने आया है । खास बात यह है कि जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा शिकायत की जांच कर महज दो दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत नहीं की गई ।
ठेकेदार शैलेश बाजपेयी ने बताया कि ग्राम पंचायत धरवारा में कराए गए निर्माण कार्य की शेष राशि 40 हजार का भुगतान नहीं होने को लेकर शिकायत की थी । शिकायत में ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव से संबंधित भुगतान दिलाने तथा पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई थी । शिकायत के बाद जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 29 जुलाई 2026 को सहायक यंत्री अजय केसरवानी को मामले की जांच कर दो दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
*समय सीमा बीती, फिर भी नहीं आई रिपोर्ट*
सीईओ के आदेश के बावजूद जांच प्रतिवेदन निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत नहीं किया गया । करीब एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी जब शिकायत पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी तो शिकायतकर्ता ने दोबारा अधिकारियों के समक्ष मामला उठाया । इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा द्वारा 1 सितंबर 2026 को सहायक यंत्री अजय केसरवानी के नाम स्मरण पत्र जारी किया गया ।
स्मरण पत्र में उल्लेख किया गया कि 29 जुलाई को जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद आज दिनांक तक जांच प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है । सीईओ ने पुनः निर्देशित किया कि मामले की जांच कर दो दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए । मामले की गंभीरता को देखते हुए स्मरण पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर कटनी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कटनी को भी भेजी गई है ।
*जांच में देरी पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल*
शिकायतकर्ता शैलेश बाजपेयी का आरोप है कि उन्होंने निर्माण कार्य की शेष 40 हजार राशि का भुगतान दिलाने और मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के उद्देश्य से शिकायत की थी । उनका कहना है कि जब जनपद पंचायत के सीईओ द्वारा जांच के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित कर दी गई थी, तब भी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होना गंभीर विषय है ।
बाजपेयी ने आरोप लगाया कि जांच में लगातार हो रही देरी के कारण ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव के साथ ही जांच अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं । उन्होंने आशंका जताई कि कहीं मामले को लंबित रखने के पीछे आपसी सांठगांठ तो नहीं है ।
*वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग*
शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है । उनका कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच दस्तावेजों एवं निर्माण कार्य से जुड़े अभिलेखों के आधार पर कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके । साथ ही यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और बकाया राशि का भुगतान कराया जाए ।
वहीं, जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी स्मरण पत्र से यह स्पष्ट है कि 29 जुलाई को दिए गए निर्देश के बाद भी निर्धारित समय में जांच प्रतिवेदन कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया था । अब देखना होगा कि दोबारा जारी किए गए निर्देश के बाद जांच कब तक पूरी होती है और मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं ।


