पुरते कुआँ, घटते तालाब, पानी के लिये हाहाकार – कैसे बचाये पानी की धार

सब मिल कर करें सुधार, जल है तो कल है
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर । मध्यप्रदेश में मई माह के चलते देखा गया है की भारी गर्मी और बढ़ते पारा से जन जीवन अस्थ व्यस्त नजर आ रहा है वहीं दूसरी ओर मानव जीवन सहित पशुओं के साथ जीव, जन्तु, पक्षी भी इससे अछूते नहीं है! हम बात कर रहें है आज की जीवन शेली से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बात – जल है तो कल वरना जीवन जीना बड़ा ही कठिन हो जा रहा है! मानव संशोधन के बढ़ते कार्य और बढ़ती जनसंख्या के चलते आज हालात बहुत ही खराब होती जा रहीं है! मानव जीवन की सुरक्षा के लिये भोजन के साथ पानी का महत्त्व बहुत ही जरूरी है इसके बिना मानव के साथ पशु, पक्षी, जीव भी यहाँ वहाँ भटकते हुये दिखाई दे रहें है!
बढ़ती हुई जनसंख्या से पुरते कुआँ, घटते हुये तालाबों से पानी का जल स्तर दिनों दिन घटता चला जा रहा है – जिसका मुख्य कारण है मानव – हमारी दिन चरिया सुबह से लेकर देर रात्रिकालीन तक पानी पर निर्भर है फिर भी इस धरोहर को बचाने के लिये उचित कुआँ, तालाबों के साथ बावली, पोखर नष्ठ करते जा रहें है और अपने रहने के लिये घर मकान बनाने के लिये 60 फिट से लेकर 800 फिट तक के बोर कराकर पानी के साधन बना रहें है! आने वाले समय में हमने अगर इनको नहीं बचाया तो हमारी नई पीढ़ी पानी के लिये तरसेंगी! जिसका मुख्य कारण हम आप होंगे! क्योंकि? हमारे जीवन जल वायु के बिना अधूरी है, जिस प्रकार से किसानों के खेत में लगीं हुई फसलों को जितनी अधिक मात्रा में पानी की जरूरत होती है! उसी प्रकार से मानव जीवन के लिये इन संसाधानो की बहुत ही आवश्यकता है! हम सब मिल कर इन्हे पुनः बचाने के लिये प्रयास करें! कुआँ, तालाब, बावली, पोखर जैसे पानी संरक्षण के लिये अति आवश्यक है! जब ये सभी सुरक्षित रहेंगे तो नदी, डैम नहरे भी भरी हुई दिखाई देंगी! सबने ठाना है जल संरक्षण कार्य पूर्ण कराना है।



