श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाहोत्सव में झूमे श्रद्धालु, फूलों की वर्षा से गूंजा गोपालपुर

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। गोपालपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाहोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया । कथा स्थल पर सजी भव्य झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जैसे ही वरमाला का दृश्य प्रस्तुत हुआ, पूरा पंडाल फूलों की वर्षा और जयघोष से गूंज उठा।
कथावाचक ब्रज भूषण शास्त्री जी ने महारास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि महारास के पांच अध्यायों में गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भक्त इन गीतों को सच्चे भाव से गाता है, वह भवसागर से पार हो जाता है और उसे वृंदावन की सहज भक्ति प्राप्त होती है । उन्होंने कहा कि महारास लीला जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है।
कथा के दौरान संत श्री 1008 बच्चू महाराज जी का आगमन हुआ। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर धर्ममार्ग पर चलने का संदेश दिया। आयोजन में जिला पंचायत सदस्य कविता पंकज राय, मोहन सिंह बागरी, अर्चना प्रवीण तिवारी, कोढ़ी लाल पटेल एवं जनपद पंचायत सदस्य निरंजन खटीक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कथावाचक का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
रुक्मिणी के अटूट संकल्प की कथा
विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान देते हुए शास्त्री जी ने बताया कि रुक्मिणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल से निश्चित कर दिया था। किंतु रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि वे केवल द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण को ही पति रूप में स्वीकार करेंगी। उन्होंने असत्य मार्गी शिशुपाल को अस्वीकार कर सत्य के प्रतीक श्रीकृष्ण को वरण किया। अंततः भगवान द्वारकाधीश ने रुक्मिणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया और उनका विधिवत् हरण कर विवाह संपन्न किया।
जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
इस अवसर पर सरपंच मीना मोहन बागरी, सरपंच अर्चना प्रवीण तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष अरविंद तिवारी, सदन तिवारी, सोहन बागरी, कमल बर्मन, अन्नू पाल, कमल बागरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे । पूरे आयोजन में भक्ति, उल्लास और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।

