कृषिमध्य प्रदेश

मंडी में किसानों को होती है असुविधा: कृषि मंडी में किसान पी रहे हैं गर्म पानी, क्या मंडी प्रबंधन मटका तक नहीं रखवा सकता?

रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन
यहां कृषि उपज मंडी में बैशाख माह की गर्मी में परेशान किसान गर्म पानी पीने को मजबूर हैं।किसानों और गल्ला व्यापारियों दोनों को ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बंपर आवक के बावजूद मंडी प्रबंधन किसानों की सुविधाओं का ध्यान नहीं रख रहा। मंडी में ना तो किसानों को ठंडा पानी नसीब हो रहा है और ना ही परिसर की नियमित सफाई हो पा रही है।भारी गंदगी और ठंडा पानी के अभाव में किसानों और व्यापारियों दोनों को ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मालूम हो कि कृषि उपज मंडी में इन दिनों रबी की फसल की बंपर आवक हो रही है। अप्रैल में अवकाश के दिन को छोड़ कर ऐसा कोई भी दिन बाकी नहीं गया जब मंडी में 10 से 15 हजार क्विंटल की आवक न हुई हो। यानि हर दिन मंडी में सैकड़ों किसानों की आमद हो रही है। इसके बाद भी मंडी प्रबंधन किसानों और व्यापारियों की सुविधा पर ध्यान नहीं दे रहा।
गर्मी के मौसम में किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कत मंडी में ठंडा पानी नहीं मिलने की वजह से उठाना पड़ रही है। मंडी में चना गेंहू बेचने आए छतरसिंह कुशवाह ऊधम सिंह दांगी ने बताया कि ना तो मंडी स्थित नीलामी परिसर में ठंडा पानी है और ना ही मंडी में ठंडे पानी का प्रबंध है। दोनों स्थानों पर टंकी का पानी गर्म ही मिलता है। समझ नहीं आ रहा कि इतनी आमदनी होने के बाद भी मंडी प्रबंधन किसानों के लिए मटके क्यों नहीं रखवा पा रहा।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी की हिदायत के बाद भी नहीं सुधरी सफाई व्यवस्था
कुछ समय पहले ही विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी मंडी में प्राकृतिक खेती के सेमिनार शुभारंभ करने पहुंचे थे। उन्हीं के प्रयास से मंडी में अनाज चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगा सका है। जिससे मंडी के प्रति किसानों में विश्वास जागा और आवक का जोर भी बढ़ा। धर्मकांटे के शुभारंभ के दौरान ही अनाज व्यापारियों ने मंडी की सफाई व्यवस्था की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री डॉ चौधरी वसे की थी।
व्यापारियों का कहना था कि परिसर की नियमित सफाई नहीं होती। इस कारण हर ओर धूल ही धूल बनी रहती है। स्वास्थ्य मंत्री ने मंडी प्रबंधन को सख्त हिदायत देकर सफाई व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए थे। प्रबंधन कुछ समय तो व्यवस्था ठीक करने में कामयाब रहा लेकिन अब फिर हालात खराब हो गए हैं। मंडी में अब चार-चार दिन तक सफाई नहीं होती। नीलामी परिसर सहित अन्य हिस्सों में गंदगी का अंबार लगा दिखाई देता है।
दुकानों पर जाकर करते हैं नाश्ता…..
मंडी में आने वाले किसानों के लिए सरकार द्वारा कम दर पर भोजन की व्यवस्था करने का दावा किया जाता है। पूर्व में इस तरह की व्यवस्था मंडी में थी। किसानों को 5 रुपए में भोजन मिलता था। कुछ समय से ये व्यवस्था भी मंडी में बंद है।
इस कारण किसानों को भूख मिटाने के लिए मंडी के आसपास स्थित दुकानों पर जाकर नाश्ता करना पड़ता है। जो महंगा होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होता है। किसान राजेन्द्र सिंह, देवेंद्र मीणा ने बताया कि जब सरकार सुविधा दे रही है तो जिम्मेदारों को पालन करना चाहिए। जिम्मेदारों को भोजन व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
इस संबंध में आरपी शर्मा सचिव, कृषि उपज मंडी रायसेन का कहना है कि एजेंसी को नोटिस दिया है। मंडी में ठंडे पानी के लिए कृषक- व्यापारी गृह पर वाटर कूलर लगा है। हम अन्य स्थानों पर ठंडे पानी का प्रबंध कर रहे हैं। सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए हमने एजेंसी को नोटिस दिया है। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो हम नया टेंडर निकालेंगे।

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