नगर के अधिकांश हिस्सों में बजबजा रही गंदगी
स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच नगर परिषद के सफाई व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहीं ये तस्वीरे
सिलवानी। नगर परिषद स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 को लेकर नगर में बेहतर सफाई व्यवस्था के दावे कर रही है, लेकिन सफाई सिर्फ सामने की सड़कों में दिखाने के लिए हो रही है। अभी भी नगर के अधिकांश हिस्सों में पूरे समय गंदगी बजबजा रही है। शहर की जीवनदायनी बेगम नदी बदहाल हैं। यही हाल नगर की गलियों के भी है। अधिकारी सिर्फ कागजों में सफाई बेहतर बता रहे हैं। अभी तक न तो नालों की ठीक से सफाई हुई और ना ही नालियों की। अमानक पॉलिथिन पर न कार्रवाई हो रही न ठीक से कचरे का निपटान। जिम्मेदार अधिकारी भी सफाई व्यवस्था को लेकर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर परिषद प्रशासन अब नगर की सफाई पर अधिक फोकस कर रहा है। लेकिन सवाल है कि प्रत्येक माह लाखों खर्च के बाद भी नगर में साफ सफाई की स्थिति बहुत खराब है। स्थिति यह है कि नगर परिषद खुद अपने संसाधन का उपयोग बेहतर ढंग से नहीं कर पर रही है।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 की तैयारियों के मद्देनजर भले ही सरकार इस पूरे फरवरी माह को स्वच्छता संकल्प माह के रूप में मना रही है, लेकिन सिलवानी नगर में स्वच्छता के दावे सिर्फ फाइलों और होर्डिंगों, दिवार पेंटिंग में ही नजर आ रहे हैं। जबकि धरातलीय स्थिति में न केवल सफाई व्यवस्था खानापूर्ति में सिमटी है। ऐसे में लोगों का कहना है कि सरकार से लेकर नगरीय निकाय तक सब खानापूर्ति में लगे हैं। बताया गया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार इस फरवरी माह को स्वच्छता संकल्प माह के रूप में मनाया जा रहा है, ताकि पूरा प्रदेश स्वच्छता में अव्वल आए। लेकिन सीएम के निर्देशों पर सिलवानी नगर परिषद शायद ही खरी उतर पाए, क्योंकि यहां की सफाई व्यवस्था पूरी तरह खानापूर्ति में ही सिमटी है।
सड़क पर बह रहा नालों-नालियों का पानी
नगर में नप द्वारा भले ही सफाई व्यवस्था बेहतर होने का दावा किया जाए, लेकिन नगर में बड़े नाले और नालियों की सफाई नियमित नहीं होने से ये ओवरफ्लो हो रहे हैं और सड़क पर पानी बह रहा है।
नगर से निकले नालों से दूषित हो रही जीवनदायिनी
नगर की जीवनदायिनी कही जाने वाली बेगम नदी का पानी लगातार दूषित होता जा रहा है। स्थिति ये है कि नगर की सीमा में गंदे नालों के प्रदूषण से बेगम नदी नाले में तब्दील होती जा रही है। बावजूद इसके जिम्मेदार नप प्रशासन और जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर के मध्य होकर गुजरने वाली बेगम नदी इन दिनों प्रषासन की लापरवाही एवं उपेक्षा के कारण अपने अस्तित्व को खोती जा रही हैं वही पर्यावरण के लिए भी खतरा बनी हुई है। प्राचीन काल में बेगम नदी नगरवासियों की प्यास एवं अन्य कार्यों को पूर्ण करती थी। परंतु अब वह कचरा घर बनकर रह गई है।





