शिव जी के गले में मुण्ड माला का रहस्य, भगवान शिव की रहस्यमय अमर कथा

रिपोर्टर : हरिकांत विश्कर्मा
सुल्तानगंज । ग्राम मौईया में विश्वकर्मा परिवार में चल रही संगीतमय श्री मद भागवत कथा में कथा व्यास पंडित बृजेश दुबे ने सुखदेव की अमर कथा का किस्सा सुनाते हुए कहा कि नारद के कहने पर पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि उनके गले में जो मुंडमाला है वह किसकी है, तो भोलेनाथ ने बताया वह मुंडमाला किसी और की नहीं बल्कि स्वयं पार्वती की है। हर जन्म में पार्वती विभिन्न रूपों में शिव की पत्नी के रूप में जब भी देह त्याग करती है शंकर जी उनके मुंड को अपने गले में धारण कर लेते। पार्वती ने हंसते हुए कहा हर जन्म में क्या मैं ही मरती रही, आप क्यों नहीं। शंकर ने कहा मैंने अमर कथा सुन रखी है। पार्वती ने कहा मुझे भी वह अमर कथा सुनाए। जब शिव पार्वती को कथा सुना रहे थे तो वहां पर एक तोते का अंडा था, जो कथा के प्रभाव से फूट गया। उसमें से सुखदेव प्रकट हुए। कथा सुनते सुनते पार्वती सो गई। वह पूरी कथा सुखदेव ने सुनी और वह अमर हो गए। शंकर सुखदेव के पीछे उन्हें मृत्युदंड देने के लिए दौड़े। सुखदेव भागते भागते व्यास के आश्रम में पहुंचे और उनकी पत्नी के मुंह से गर्भ में प्रविष्ट हो गए। 12 वर्ष बाद सुखदेव गर्भ से बाहर आए। इस तरह सुखदेव का जन्म हुआ। उसके बाद कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं, किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और ना ही बदले जा सकते हैं। भागवत के चार अक्षर से तात्पर्य यह है (भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग) जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है। इसी प्रसंग के साथ संगीतमय श्री मद भागवत कथा आरती प्रसाद वितरण के साथ विश्राम की गई।



