Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 05 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 05 जून 2025
आप सभी सनातनियों को श्री गंगा दशहरा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – ज्यैष्ठ मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 02:16 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र हस्त – पूर्ण रात्रि तक
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। तथा स्वामी बुध है. हस्त नक्षत्र को “हिरण्यहस्ता” या “सुनहरे हाथ” के नाम से भी जाना जाता है
⚜️ योग – सिद्धि योग 09:13 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 01:02 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 02:15 ए एम, जून 06 तक वणिज
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 09:45:00 से 11:10:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 2:00 से 3:25 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:14:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:46:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:02 ए एम से 04:42 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:22 ए एम से 05:23 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:48 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:39 पी एम से 03:34 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:15 पी एम से 07:35 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:17 पी एम से 08:17 पी एम
💧 अमृत काल : 11:49 पी एम से 01:37 ए एम, जून 06
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:59 पी एम से 12:40 ए एम, जून 06
❄️ रवि योग : पूरे दिन
🚕 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-विष्णु मंदिर में आठ बादाम चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ गंगा दशहरा समाप्ति/ श्री गंगा दशहरा/अन्नप्राशन/मुण्डन/कर्णवेध/ विश्व पर्यावरण दिवस, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जन्म दिवस, भारतीय अभिनेता अमित साध जन्म दिवस, भारतीय फिल्म निर्माता मुकेश भट्ट जन्म दिवस, स्वामीनारायण संप्रदाय स्थापना दिवस, अभिनेत्री अपूर्वा अरोड़ा जन्म दिवस, अवैध, अप्रतिबंधित और अनियमित मछली पकड़ने के खिलाफ लड़ाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस,राष्ट्रीय जिंजरब्रेड दिवस, टेनिस खिलाड़ी रमेश कृष्णन जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗼 Vastu tips_ 🗽
रेस्टोरेंट में जमीन की ढाल दक्षिण से उत्तर और पश्चिम से पूर्व की तरफ होनी चाहिए । अर्थात रेस्टोरेंट की ईशान, उत्तर एवं पूर्व की भूमि नैऋत्य, दक्षिण और पश्चिम की भूमि से अपेक्षाकृत नीची होनी चाहिए ।
रेस्टोरेंट के निर्माण में यह अवश्य ध्यान दें कि दक्षिण और पश्चिम में कम से कम और उत्तर, ईशान एवं पूर्व में अधिक खाली स्थान छोड़ना चाहिए ।
रेस्टोरेंट की रसोई अग्नेय कोण में होना सर्वोत्तम होता है लेकिन यह किसी कारणवश संभव ना हो सके तो इसे पश्चिम दिशा में भी बनाया जा सकता है ।
रेस्टोरेंट की रसोई में चूल्हा, माइक्रोवेव ओवन, तंदूर, मिक्सर ग्राइंडर आदि रसोई के अग्नेय कोण में रखना चाहिए तथा रसोइये का मुँख खाना बनाते समय पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए, इससे खाने की ग्राहकों से तारीफ ही मिलती है । इन्हे ईशान कोण में बिलकुल भी नहीं रखना चाहिए ।
फ्रीजर, रेफ्रिजरेटर आदि अग्नेय, दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में रखना चाहिए लेकिन इसे नैत्रत्य कोण में नहीं रखना चाहिए नहीं तो यह अधिकतर ख़राब ही रहेंगे और इन्हे ईशान में भी कतई नहीं रखना चाहिए ।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दांत दर्द में फायदेमंद: लौंग का पानी दांतों के दर्द, मसूड़ों की सूजन और पायरिया से राहत दिला सकता है। लौंग में मौजूद यूजेनॉल और फ्लेवोनोइड्स जैसे एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण दांतों के दर्द, मसूड़ों की सूजन और पायरिया से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
इम्यूनिटी करता है मजबूत: लौंग का पानी पीने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। लौंग में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और संक्रमणों से बचाव करते हैं। नियमित रूप से लौंग का पानी पीने से बीमारियों से जल्दी ठीक होने में मदद मिल सकती है।
लौंग का पानी पीने का सही समय और तरीका: लौंग का पानी सुबह खाली पेट पीना सबसे अच्छा माना जाता है। इसे रात में भिगोकर सुबह गुनगुना करके छानकर पीने से पाचन बेहतर होता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिलती है। आप चाहें तो इसे रात को सोने से पहले भी पी सकते हैं। आप चाहें तो लौंग को चबाकर भी खा सकते हैं। आप लौंग को शहद के साथ भी मिला सकते हैं, खासकर सर्दी-जुकाम के लिए। लौंग को चाय में मिलाकर पीने से भी लाभ हो सकता है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
पेट में गैस बनने का कारण पेट में गैस शराब पीने , तली-भुनी, मिर्च-मसाला वाली चीजें ज्यादा खाने से,तला या बासी खाना खाने से, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, बींस खाने से, उड़द की दाल, फास्ट फूड, किसी-किसी को दूध या भूख से ज्यादा खाने से अथवा खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से पेट में गैस बनती है ।
पेट में गैस बनने के सबसे आम लक्षण हैं पेट फूल जाना, पेट में दर्द होना, डकार आना और गैस पास करना है। पेट का फूलना गैस की वजह से हो सकता है या बड़ी आंत का कैंसर या हार्निया भी इसका कारण बन सकता है।
ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है। इससे भी पेट फूल जाता है और बेचैनी होती है।
जब आंत में गैस मौजूद होती है, तब कुछ लोगों को पेट दर्द होता है। जब बड़ी आंत की बायीं ओर दर्द होता है, तो इससे हृदय रोग का भ्रम होता है, लेकिन जब दर्द दायीं ओर होता है, तो यह एपेन्डिक्स हो सकता है।
इसके आलावा ज्यादा काम का बोझ, टेंशन, देर से सोना- देर से जागना, खाने-पीने का टाइम फिक्स्ड न होना आदि कारणों से भी गैस बनती है ।
इसके अतिरिक्त लीवर में सूजन, गॉल ब्लेडर में स्टोन, फैटी लीवर, मोटापे , डायबीटीज, अस्थमा या अक्सर पेनकिलर खाने से, कब्ज, खाना न पचने की वजह से भी गैस बन सकती है ।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
शुक्र के कमजोर या खराब होने के लक्षण:
दैनिक जीवन में लक्षण:
वित्तीय समस्याएं: अगर शुक्र कमजोर होता है तो व्यक्ति को धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। धन का अनावश्यक रूप से खर्च होना, सही निवेश का लाभ नहीं मिलना आदि संकेत हो सकते हैं।
संबंधों में समस्याएं: प्रेम संबंधों और वैवाहिक जीवन में समस्याएं हो सकती हैं। रिश्तों में मनमुटाव, झगड़े, और गलतफहमी बढ़ सकती हैं।
सौंदर्य और शरीर का असंतुलन: शरीर की त्वचा, बालों, और चेहरे की चमक कम हो सकती है। त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे दाने, एलर्जी आदि हो सकती हैं।
आराम और सुख-सुविधाओं की कमी: व्यक्ति को सुख-सुविधाएं प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है, जैसे कि अच्छी गाड़ी, अच्छा घर, या अच्छा रहन-सहन।
आत्म-सम्मान में कमी: आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास में कमी होना, हमेशा नकारात्मक महसूस करना या खुद को दूसरों से कमतर समझना।
आकर्षण में कमी: समाज में व्यक्ति का आकर्षण कम हो सकता है। कोई भी उसे महत्वपूर्ण रूप से नोटिस नहीं करता, या किसी पार्टी या समारोह में व्यक्ति अलग-थलग महसूस करता है।
कला और रचनात्मकता में कमी: अगर शुक्र कमजोर हो तो कला, संगीत, चित्रकला आदि रचनात्मक चीजों में रुचि या प्रेरणा नहीं मिलती।
▪️ कुंडली में लक्षण:
छठे, आठवें या बारहवें भाव में शुक्र: कुंडली में यदि शुक्र छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तो इसे कमजोर या अशुभ माना जाता है।
शनि, राहु या केतु के साथ युति: शुक्र ग्रह की शनि, राहु या केतु के साथ युति भी उसे अशुभ बना सकती है।
शुक्र के शत्रु ग्रहों के दृष्टि प्रभाव में होना: शुक्र का शत्रु ग्रहों से पीड़ित होना जैसे शनि या मंगल, इससे शुक्र के शुभ प्रभाव कम हो जाते हैं।
👉🏼 शुक्र के कमजोर होने के निवारण (उपाय):
ज्योतिषीय उपाय:
शुक्र मंत्र का जाप: “ॐ शुं शुक्राय नमः” का प्रतिदिन 108 बार जाप करें। इससे शुक्र ग्रह को शुभ बनाया जा सकता है।
शुक्र यंत्र की स्थापना: शुक्र यंत्र की स्थापना कर उसे प्रतिदिन पूजा करें। इसे शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त में स्थापित करना चाहिए।
चांदी का आभूषण: चांदी का आभूषण धारण करना शुक्र को मजबूत बनाता है। चांदी की अंगूठी या कड़ा पहन सकते हैं।
हीरा या ओपल पहनें: ज्योतिषी से परामर्श कर हीरा या ओपल रत्न धारण करें। यह रत्न शुक्र को शुभ बनाने में मदद करता है।
शुक्रवार का व्रत: शुक्रवार के दिन व्रत करें और माता लक्ष्मी की पूजा करें। इससे शुक्र के दोष शांत होते हैं।
गाय को भोजन कराएं: सफेद गाय को हरा चारा खिलाएं, और गरीबों को सफेद मिठाई जैसे खीर या मिश्री का दान करें।
💁🏻 प्रायोगिक (व्यावहारिक) उपाय:
सफाई और स्वच्छता: अपने शरीर और अपने घर को स्वच्छ रखें। शुक्र सौंदर्य और स्वच्छता का कारक है, इसलिए स्वच्छता बनाए रखना शुक्र को मजबूत बनाता है।
सुगंध का प्रयोग: अच्छे इत्र या सुगंध का प्रयोग करें। यह शुक्र के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होता है।
सफेद वस्त्र पहनें: सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें, विशेषकर शुक्रवार के दिन। यह शुक्र ग्रह से जुड़ा हुआ है और इसके प्रभाव को बढ़ाता है।
संगीत और कला में रुचि: संगीत, नृत्य या चित्रकला जैसी कला से जुड़े रहें। इससे शुक्र की ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
शांति और प्रेमपूर्ण व्यवहार: अपने संबंधों में मधुरता बनाए रखें और प्रेम से व्यवहार करें। किसी से अनावश्यक झगड़ा न करें, और अपने जीवनसाथी का सम्मान करें।
भोजन में संतुलन: अच्छे और पौष्टिक भोजन का सेवन करें। मांसाहार, तला हुआ या अत्यधिक मसालेदार खाना खाने से बचें। सफेद मिठाई, दूध और दही का सेवन करना लाभदायक होगा।
सकारात्मक सोच: जीवन में सौंदर्य और सुख की ओर ध्यान दें। शुक्र ग्रह का सकारात्मक प्रभाव तब बढ़ता है जब व्यक्ति अपने जीवन में आनंद और खुशी महसूस करता है।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।।

