मध्य प्रदेश

खबर का असर : 2 साल बंद थे आश्रम हुआ चालू अब 30 जून तक होंगे प्रवेश

अब तक दोनों आश्रमों में 15-15 हुए प्रवेश

अधीक्षक एवं कर्मचारी दो साल तक घर बैठे लेते रहे वेतन
सिलवानी । आदिवासी क्षेत्र प्रतापगढ़ के आदिवासी आश्रम बंद होने की खबर मृगांचल एक्सप्रेस द्वारा “दो साल से बंद पड़े आश्रम, उन्नयन न होने से छात्रों को नहीं मिल पा रहा प्रवेश, स्टाफ ले रहा वेतन” शीर्षक से प्रमुखता से प्रसारित की गई थी। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों ने संज्ञान लेकर आश्रम में प्रवेश प्रारंभ करा दिए। ग्रामीणों ने मृगांचल एक्सप्रेस की टीम को बधाई दी एवं आशा व्यक्त की है कि भविष्य में क्षेत्र के जनहित की समस्याओ को प्रशासन तक पहुंचाने में सेतु की भूमिका निभाएंगे।
ज्ञातव्य हो कि पिछले दो साल से आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत प्रतापगढ़ में बने आदिवासी आश्रम बने पड़े हुए थे, जिससे छात्रों को किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करना पड़ रही थी। आदिवासियों को इन आश्रमों का लाभ नहीं मिल पा रहा था। यह नहीं यह भवन भी खंडहर होने लगे थे, जिसको लेकर 15 जून को “दो साल से बंद पड़े आश्रम, उन्नयन न होने से छात्रों को नहीं मिल पा रहा प्रवेश, स्टाफ ले रहा वेतन” प्रमुखता से मुद्दा उठाकर खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद जिला संयोजक ने मामले को संज्ञान में लेकर इन आश्रमों की साफ सफाई करवाई और प्रवेश शुरु करवाए। अभी तक दोनों आश्रमों में 15-15 प्रवेश हो गए हैं और 30 जून तक प्रवेश होना है। यह तिथि शासन आगे भी बढ़ा सकता है, लेकिन अभी तक 30 जून ही प्रवेश की अंतिम समय सीमा है।
आश्रम अधीक्षक हरिशरण व्यास ने बताया कि शासन के निर्देश पर प्रवेश चालू हो गए हैं। 50-50 सीटर के आश्रमों में अभी तक 15-15 प्रवेश हो चुके हैं और यह आगे बढ़ेंगे। यहां छात्रों को वह सभी सुविधाएं मिलेगी जो पहले मिलती थी।
उन्नयन को लेकर अटकी है फाइल
इन आश्रमों का उन्नयन होना है, जिसको लेकर आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला कार्यालय से शासन के पास फाइल भेजी गई, लेकिन जिसके चलते दो साल से यह आश्रम पूरी तरह से बंद बने हुए थे, लेकिन अब तक उन्नयन नहीं हो सका है। उन्नयन होने तक पुरानी व्यवस्था के अनुरूप इन आश्रमों का संचालन शुरु किया गया है।


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दो साल से बंद पड़े आश्रम, उन्नयन न होने से छात्रों को नहीं मिल पा रहा प्रवेश, स्टाफ ले रहा वेतन

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