कलेक्टर की पहल : बर्बाद होने से बचेंगे किसान, स्लीमनाबाद में फायर बिग्रेड वाहन खड़े करने के निर्देश
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान. कटनी । भीषण गर्मी का प्रकोप होने से जहां एक ओर आमजनी की घटनाएं रोज बढ़ रही हैं। पिछले दिनों ढीमरखेड़ा तहसील में जगह-जगह खेतों में आगजनी की घटनाएं सामने आई जिसमें लगभग 300 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। इस मामले को समाचार पत्रों ने प्रमुखता से उठाया और मांग की गई कि कम से कम वाहन तहसील स्तर पर मुहैया कराया जाये लेकिन जिला मुख्यालय में भी इनते फायर बिग्रेड वाहन नहीं है जिससे हर तहसील में वाहन खड़ा किया जा सके। इसका समाधान निकालते हुये कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा के सेंटर पाइंट स्लीमनाबाद में फायर बिग्रेड वाहन खड़े के निर्देश जारी किये है। आदेश मिलते ही एसडीओपी स्लीमनाबाद ऑफिस में एक फायर बिग्रेड वाहन को खड़े करवाया गया है। लिहाजा कलेक्टर के द्वारा जो पहल की गई है वह सराहनीय है क्योंकि इसके पहले किसी ने इस तरह की व्यवस्था नहीं की। बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा के सेंटर पाइंट स्लीमनाबाद में फायर बिग्रेड खड़े होने से आग लगने के कुछ ही समय में फायर बिग्रेड वाहन उपलब्ध हो जायेगा जिससे ज्यादा क्षति नहीं होगी।
जिला मंत्री का प्रस्ताव भी प्रशंसनीय
उल्लेखनीय है कि जिस तरह से रोज आगजनी की घटना सामने आ रही है इससे किसानों द्वारा स्थानीय नेताओं से भी इस संबंध में सार्थक कदम उठाने के लिये कहा जा रहा है। किसानों के इस गंभीर मुद्दे को ध्यान में रखते हुये भाजपा जिला मंत्री विजय दुबे के द्वारा कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ को यह प्रस्ताव सौंपा गया था कि ग्राम पंचायत में जो टेंकर खड़े हुये है उन पर मशीन लगाई जावे और पाईव की व्यवस्था की जाये। दुबे द्वारा जो प्रस्ताव सौंपा गया है वह प्रशंसनीय है और यदि इस पर अमल किया जाता है तो स्थानीय स्तर पर होने वाली अधिकांश आगजनी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। बहरहाल अभी कलेक्टर के द्वारा ग्राम पंचायत में जो टेंकर खड़े है उनका इस्तेमाल करने के आदेश दिये गये है। चूंकि टेंकर में मशीन लगाने, पाईप लगाने के लिये विभाग प्रमुख की स्वीकृति अनिवार्य है। लिहाजा जैसे ही इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर के द्वारा अनुमति दी जाती है वैसे ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जायेगी।
टैकरों से सरपंच करा रहे अपने काम
ज्ञात हो कि हर पंचायतों में विधायक निधि से एक-एक टेंकर दिये गये थे जिनका मकसद यही था कि गर्मी के समय जहां पर पेंयजल की समस्या हो वहां पर उपरोक्त टेंकरों का उपयोग किया जाये लेकिन ठीक इसके उल्टा ही सरपंचों द्वारा इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया गया है और कई सरपंचों द्वारा टैंकरों को किराये पर चलाया जा रहा है। निर्माण कार्यों में भी टेंकरों का उपयोग किया जाकर यह दर्शाया जाता है कि किराये से लेकर निर्माण कार्य किया गया है। कई ग्राम पंचायत ऐसी है जहां पर पानी की भीषण समस्या उत्पन्न हो रही है लेकिन सरपंचों द्वारा टैंकरों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
बर्बादी की निशानी छोड़ गई आगजनी की घटनाएं
स्मरण रहे कि जिस तरह से बीते कुछ दिनों में आगजनी की घटनाएं सामने आई है इससे जिन किसानों के खेतों में आग लगी वह पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर पहुंच चुके हैं। चूंकि जिस तरह से किसान चार से पांच माह भरी ठंड में फसल तैयार करता है और रात-रात भर पानी चलाकर उसे सींचता है लेकिन जैसे ही फसल काटने की बारी आती है तो वह आग की भेंट चढ़ जाती है। जिन किसानों के खेत आग से तबाह हुये है उनमें से कुछ किसान ऐसे है जो कर्जा लेकर खेती करते है और जो फसल पककर तैयार हुई थी उसी से वह आशा लगाये हुये थे। कुछ किसानों के यहां बच्चों की शादियां होनी थी लेकिन महज एक घटना ने उनके जीवन को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। कुछ किसान तो जले हुये खेतों को देखकर अपने आंशु रोक नहीं पाते। जिन खेतों में कुछ दिनों तक फसल लहलहा रही थी उसमें आज मात्र दूर-दूर तक आग से खाक हुये खेत ही नजर आते है। दूसरी ओर सरकार द्वारा जो मुआवजा दिया जाता है वह ऊंट के मुंह में जीरा सामान है।



