संभल जाए तो अच्छा है, अन्यथा वक्त समझाएगा पानी की बूंद-बूंद की कीमत
पानी सहेजने के लिए सभी को कसनी होगी कमर
सिलवानी। साल दर साल ट्यूबवेल और अन्य स्त्रोतों के जरिए भूजल का लगातार दोहन किया जा रहा है, लेकिन बदले में उतना पानी जमीन में नहीं पहुंच पा रहा है। जिसकी वजह से लगातार कई इलाकों में भूजल स्तर में गिरावट आ रही है। यदि यही हाल रहा तो आगामी समय में सिलवानी गंभीर पेयजल संकट क्षेत्रों में आ जाएगा। इस तरह के उदाहरण गर्मी के सीजन में देखने को मिलते हैं। जिन इलाकों के ट्यूबवेल गर्मियों में भी पानी देते थे वह अब दम तोड़ने लगे हैं। साल दर साल पेयजल परिवहन भी बढ़ गया है। इस समस्या से निपटने के लिए शासन ने प्रत्येक नवीन भवन पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया है, लेकिन इस आदेश का धरातल पर क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
भवनों में नहीं हैं व्यवस्था
त्हसील मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय भवनों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है। स्कूलों के भवनों में भी जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमानुसार नगरीय क्षेत्र में कोई भी इमारत बनाने के पहले नगर परिषद से जब अनुमति ली जाती है, उसी दौरान अनुमति पत्र में यह शर्त भी शामिल रहती है कि रूफ वाटर हार्वेस्टिंग बनाएंगे। इसके लिए पहले ही सिक्योरिटी डिपाॅजिट जमा करवा ली जाती है।
कई गांव ऐसे, जहां सरकारी नलकूपों पर दबंगों का कब्जा
तहसील के कई गांवों ऐसे हैं, जहां दबंग लोगों ने सरकारी नलकूप पर कब्जा कर लिया है। नलकूपों से बिजली की तरह खंभों के जरिए घरों तक पहुंची पाइप लाइन से पानी दिया जा रहा है।
नियम और गाइडलाइन पर अमल हो तो बदल सकती है तस्वीर
प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वर्ष 2009 के बाद बिल्डिंग परमिशन के लिए 140 वर्गमीटर से बड़ी साइज के प्लाॅट पर मकान बनाने पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। नगर परिषद वाटर हार्वेस्टिंग के लिए सिक्योरिटी डिपाॅजिट जमा करवाने के बाद ही बिल्डिंग परमिशन जारी करता है। यह राशि सिस्टम लगने के बाद लौटा दी जाती है।
यह है शासन की गाइड लाइन
भवन का क्षेत्रफल 140 वर्गमीटर से 200 वर्ग मीटर हो तो 7 हजार रूपए, 200 से 300 वर्गमीटर तक 10 हजार रूपए, 300 से 400 वर्ग मीटर तक 12 हजार रूपए और 400 वर्गमीटर से अधिक होने पर 15 हजार रूपए बतौर डिपाॅजिट भवन स्वामी को नप में जमा करना होगा। ऐसा न करने पर डिपाॅजिट राशि जब्त कर ली जाएगी। यही नहीं इस राशि से स्वयं नप रूफ वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करेगी।
1.50 लाख लीटर बचा सकते हैं पानी
जानकार बताते हैं कि एक हजार वर्गफीट की छत का पानी जमीन में पहुंचाया जाता है, तो 35-36 इंच बारिश की स्थिति में सवा से डेढ़ लाख लीटर पानी संग्रहित कर सकते हैं।



