फर्जी पत्रकारों के दलदल में पत्रकारिता फर्जी पत्रकारों की गैंग सक्रिय

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान. कटनी । गाड़ी पर प्रेस लिखवाए, हाथ में किसी यूटयूब के चैनल का माईक या गले में किसी वेबसाईट के नाम पर बनी आईडी टांग कर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रोें की गलियो, चौराहों, सरकारी कार्यालयों, राजनीतिक गलियारों में घूमते फर्जी पत्रकारों की संख्या आज सैकड़ों में पहुंच चुकी है, जिले में फर्जी पत्रकार बनने और बनाने का धंधा जोरों पर चल रहा है। इनका काम सरकारी कर्मचारियों, प्राईवेट प्रतिष्ठानों के मालिकों व भोले-भाले व्यक्ति से प्रेस का रौब दिखाकर सिर्फ उनसे ठगी व उगाही कर मीडिया की छवि खराब और बदनाम करना होता है।
स्मरण रहे कि कुछ समय पूर्व जबलपुर जिले में पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्यवाही फर्जी पत्रकारों के विरुद्ध की गई थी जिसका प्रभाव कटनी तक में देखेने को मिला था और कुछ समय के लिये फर्जी पत्रकार भूमिगत हो गये थे लेकिन एक बार फिर से इनकी गैंग सक्रिय हो गई है और सरकारी ऑफिसों में साहबों से सैटिंग कर दलाली का काम कर रहे है। सरकारी कार्यालयों में ढूंढते हैं शिकार जो वास्तविक पत्रकार हैं, उनके पास समय ही नहीं होता, वहीं जो फर्जी पत्रकार हैं वो पूरा दिन एसपी ऑफिस, कलेक्टेट, तहसील ऑफिस, आरटीओ, जनपद पंचायतों सहित अन्य जगहों पर फर्जी पत्रकारों की गैंग सक्रिय रहती है। यहां उनका पहला शिकार शिकायत लेकर पहुंचने वाले भोले भाले ग्रामीण और कम पढ़े लिखे लोग होते है जहां एक तरफ उनसे अलग अलग चीजोें के नाम पर वसूली होती है वहीं दूसरी तरफ जिनके खिलाफ शिकायत है, उनसे संपर्क करके धौंस और धमकी देकर वसूली की जाती है।
कौन जारी कर सकता है प्रेस कार्ड जानकारों का कहना है कि भारतीय संविधान में बोलने की आजादी, मौलिक अधिकार है इसी वजह से यूटयूब एवं वेबसाईट के माध्यम से अपनी बात अपने विचार रखने का अधिकार भी सबको है, यह अपने इन चैनल्स को उद्योग के आधार पर रजिस्टर्ड कराकर आईडी कार्ड भी जारी कर सकते है लेकिन प्रेस नहीं कहला सकते, प्रेस के नाम पर आईडी जारी नहीं कर सकते। समस्या तब हो रही है जब कुछ फर्जी लोग यूटयूब चैनल एवं वेबसाईड बनाकर उसी के नाम पर प्रेस की आईडी जारी कर रहे है, फिर जमीन पर प्रेस की तरह व्यवहार किया जा रहा है और लोगों को प्रेस के नाम पर अलग-अलग माध्यम से ठगा जा रहा है। नियम के अनुसार अखबार/पत्रिका ,भारत सरकार द्वारा रजिस्टर्ड हो या जो टीवी/रेडिया सूचना प्रसारण मंत्रालय से रजिस्टर्ड हो उसी के द्वारा पत्रकार/संवाददाता की नियुक्ति हो सकती है व केवल संपादक ही प्रेस कार्ड जारी कर सकते हैं लेकिन तमाम नियमों और कानून को धत्ता बताकर जगह-जगह तथाकथित फर्जी पत्रकारों की गैंग सक्रिय हो गई है । उर्पाजन केन्द्रों में पहुंचती हैं फर्जी गैंग फर्जी पत्रकारों की गैंग इस तरह से हावी है कि उनके द्वारा कलेक्टेट ऑफिस से उर्पाजन केन्द्रों की लिस्ट लेकर पूरे जिले में एक-एक उर्पाजन केन्द्र में जाकर वसूली की जाती है और जहां इनको पैसा नहीं मिलता तो वहां पर इनके द्वारा ब्लेकमैल किया जाता है। उर्पाजन केन्द्र प्रभारियों ने बताया कि ऐसे-ऐसे लोग है जिन्हे हम लोग जानते ही नहीं है और फर्जी पत्रकारों द्वारा अपने साथ तीन-चार लोगों को साथ में लेकर उन्हें भी फर्जी आईडी, प्रेस का कर्मचारी बताकर यह कहा जाता है कि ये भाई साहब भी पत्रकार है इस कारण से इनको अलग से पैसा देना पड़ेगा। लिहाजा कुछ केन्द्र प्रभारी इन तथाकथित गैंग के चक्कर में आकर इन लोगों को पैसा देने पर मजबूर हो जाते है। आगे केन्द्र प्रभारियों ने बताया कि बाहर से जो लोग वसूली के लिये पहुंचते है उन्हें देखकर कोई नहीं कहेगा कि ये लोग फर्जी पत्रकार है और कई बार फर्जी पत्रकारों की गैंग के द्वारा कई बड़े अखबारों के नाम पर वसूली की जाती है।



