मध्य प्रदेश

सरपंच संकेत लोनी के निराधार आरोपों की जाँच कराने पत्रकारों ने एसपी को सौंपा पत्र

पत्रकारों पर झूठे आरोप, मारपीट और धमकी का मामला; सरपंच फोरम लेटरपैड के दुरुपयोग की भी शिकायत
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत गूंड़ा में सरपंच संकेत लोनी और उनके सहयोगियों द्वारा पत्रकारों पर लगाए गए झूठे आरोपों और उनके साथ हुई मारपीट की घटनाओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले में पत्रकार अज्जू सोनी ने पुलिस अधीक्षक कटनी को एक विस्तृत पत्र सौंपकर गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 6 सितंबर 2025 को पत्रकार मुकेश यादव ने ग्राम भैंशवाही में हुई अनियमितताओं को उजागर करते हुए समाचार प्रकाशित किया था। इस समाचार के प्रकाशन के बाद ही पत्रकारों पर दबाव बढ़ने लगा और उसी दिन पत्रकार मुकेश यादव को ग्राम गूंड़ा बुलवाकर उनके साथ लाठी-डंडों से मारपीट की गई। इस घटना की शिकायत थाना ढीमरखेड़ा में दर्ज कराई गई, किन्तु अभी तक उस पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पत्रकारों का आरोप है कि यह पुलिस की निष्क्रियता का परिणाम है जिससे आरोपी मनमानी करने पर उतारू हैं।
पत्रकार अज्जू सोनी द्वारा एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि उसी दिन ग्राम गूंडा निवासी पूजा लोनी और उनके पिता विजय लोनी ने भी पुलिस थाना ढीमरखेड़ा में सरपंच संकेत लोनी और उनके पुत्र निलेश लोनी के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी । इस शिकायत के बाद जब पत्रकारों ने खबर प्रकाशित की तो सरपंच संकेत लोनी और अधिक नाराज हो गए और उन्होंने पत्रकारों की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों का सहारा लिया।
पत्रकारों का आरोप है कि सरपंच संकेत लोनी ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर यह दुष्प्रचार किया कि पत्रकार अज्जू सोनी और मुकेश यादव उनसे चार-चार हजार रुपये की मांग कर रहे हैं और पैसे न देने पर उनके खिलाफ झूठी खबरें प्रकाशित करने की धमकी दे रहे हैं। पत्रकारों ने कहा है कि यह आरोप पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन हैं। इसके माध्यम से केवल पत्रकारों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है ताकि आमजन के बीच उनके समाचारों की साख पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया जा सके।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरपंच संकेत लोनी ने सरपंच फोरम के अध्यक्ष महेश यादव के लेटरपैड का भी दुरुपयोग किया। बिना अनुमति अध्यक्ष के नाम से पत्र लिखकर पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत किया गया। यह न केवल गंभीर अपराध है बल्कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी खुला उल्लंघन है। लेटरपैड का दुरुपयोग करते हुए पत्रकारों के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत करना स्पष्ट करता है कि पूरा षड्यंत्र रचकर पत्रकारों को बदनाम करने की योजना बनाई गई थी।
पत्रकार अज्जू सोनी ने पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि यदि आरोपियों के खिलाफ शीघ्र और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में आक्रोश की स्थिति पैदा हो सकती है। पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार की गंभीर घटना घटित हो सकती है जिसके लिए प्रत्यक्ष रूप से आरोपी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने इस मामले की सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच एसडीओपी स्लीमनाबाद से कराने की मांग की है ताकि सत्य सामने आ सके और आरोपियों पर कठोर कार्यवाही की जा सके।
पत्रकारों ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों को इस प्रकार से झूठे आरोपों और हिंसक घटनाओं में फंसाना न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है बल्कि जनता की आवाज को दबाने का प्रयास भी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले की गंभीरता को नहीं समझा गया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में अशांति और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पत्रकारों द्वारा दिए गए इस ज्ञापन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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