स्वागत नहीं ! सुरक्षा का इंतजाम करो सरकार, जर्जर स्कूल भवनों में खतरे के बीच बच्चों की सुरक्षा दांव पर

बच्चे जर्जर स्कूल भवन में बैठकर मध्यान्ह भोजन कर रहे
रिपोर्टर : राधेश्याम साहू
सिलवानी । प्रदेश सरकार जहां सब पढ़े, सब बढ़े नारे के शिक्षा पर करोड़ों रुपयों का बजट प्रतिवर्ष करती है, इसके बाबजूद शिक्षण संस्थानो में मूलभूत सुविधाएं नही जुटाई जा पा रही है, कही ना कही सिस्टम की लापरवाही से हालत जस के तस बने हुए है।
शासकीय प्राथमिक शाला वीरपुर के स्कूल भवन की हालत इस तरह हो गई। हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार लेकिन सुविधाएं नहीं
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार ने प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार दे दिया है। लेकिन सरकार ने बच्चों के लिए स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई। जिन ग्राम पंचायतों में पुराने स्कूल भवन स्थापित हैं। उनके विस्तार की नीतियों पर अमल नहीं किया जा रहा, यह शिक्षा विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। जबकि सरकार हर साल शिक्षा व्यवस्था पर बड़ी रकम खर्च करने का दावा करती है। इसके बाद भी ग्रामीण अंचल के स्कूलों की हालत नहीं सुधर सकी।
स्कूल भवनों में कहीं दीवारों में दरारें आ रही तो कहीं छत से प्लास्तर गिर रहा है। विडंबना यह है कि अधिकांश स्कूल भवन भी जर्जर हो चुके हैं। मंगलवार से स्कूल चले हम अभियान प्रारंभ हो गया। स्कूलों में बच्चों को तिलक लगाकर पुष्प माला पहनाकर शिक्षकों द्वारा प्रवेश दिलाया गया। लेकिन स्कूल भवनों की अभी तक मरमत नहीं कराई गई, ऐसे में नौनिहालों की जान पर खतरा मंडराता रहेगा। जर्जर और बदहाल हो चुके भवनों में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाएगा। इस तरह के हालात विकासखंड के प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों में दिखाई दे रहे। शासकीय प्राथमिक शाला वीरपुर के स्कूल भवन की छत जर्जर हो चुकी है छत में लोहे के सरियों को आसानी देख सकते हैं। इस स्कूल न तो बिजली की व्यवस्था और ना ही बच्चों को पानी पीने की सुविधा उपलब्ध है। मध्याह्न भोजन बनाने वाला कक्ष भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।
वहीं हम बात करें शासकीय प्राथमिक शाला तेंदूखेड़ा की यह स्कूल शिक्षक विहीन है। यहां पर अतिथि शिक्षक द्वारा बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इस स्कूल में भी न तो बिजली है न ही पानी पीने की व्यवस्था, शौचालय से दरवाजे गायब हो गए। ग्रीष्मकालीन अवकाश के चलते स्कूल भवनों की देखरेख नहीं हो पाई। ऐसे में कुछ दिनों बाद मानसून भी प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान जर्जर स्कूल बिल्डिंगों में बैठने वाले नौनिहालों और शिक्षकों पर भी खतरा मंडराएगा। विभाग की अनदेखी और अधिकारियों की लापरवाही के चलते बच्चों और शिक्षकों की जान जोखिम में रहती है। यह तो सिर्फ कुछ स्कूलों की बानगी है, अन्य स्कूलों के हालात कुछ इस तरह ही है।



