धार्मिक

मनुष्य जीवन भर मनोरंजन के द्वारा अपने बहुमूल्य समय को नष्ट करता है : प्रयोग सागर जी

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। दिगम्बर जैन नन्हे मंदिर में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान में 512 अर्ग समर्पित किए गए अनेक परिवार को शांति धारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जैन मिलन नगर शाखा प्रमुख के अध्यक्ष अरुण जैन को एवं मंत्री मामा को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। लहरी परिवार के द्वारा आयोजित सिद्ध चक्र महामंडल विधान में मुनि श्री प्रयोग सागर जी एवं मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज की मंगल देशना प्राप्त हो रही है। ब्रह्मचारी संजीव भैया के निर्देशन में विधि विधान के साथ बहुत उत्साह पूर्वक विधान का आयोजन हो रहा है। दिनांक 28 अगस्त को अंतिम दिन 1008 अर्ग समर्पित किए जाएंगे।  इस अवसर पर मुनि श्री प्रयोग सागर जी ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि मनोरंजन की एक सीमा होती है धर्म के द्वारा पुण्य अर्जन की कोई सीमा नहीं होती मनुष्य जीवन भर मनोरंजन के द्वारा अपने बहुमूल्य समय को नष्ट करता है यदि उसका कुछ ही समय धर्म ध्यान में समर्पित कर तो अपने जीवन को सफल बना सकता है मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज ने कहा कि आयोजन का प्रयोजन स्पष्ट होना चाहिए, जीवन का लक्ष्य होना चाहिए अन्यथा हमारा जीवन लक्ष्यहिन होता है जीवन का लक्ष्य खाओ पियो मौज उड़ाओ नहीं हो सकता यह तो विदेशी मानसिकता है। वह बहुत सौभाग्यशाली लोग जो विधान में पुण्य प्राप्त करते है। जीवन में काम से कम मनुष्य को यह संकल्प अवश्य लेना चाहिए कि चाहे कैसी भी परिस्थिति आए वह कभी आत्महत्या नहीं करेगा क्योंकि किसी को मारना हत्या है किंतु स्वयं को मारना महाहत्या है आत्महत्या करने वाला मनुष्य अनेक भवों तक भटकता रहता है।

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