ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग शनिवार, 23 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 23 सितम्बर 2023

23 सितम्बर 2023 दिन शनिवार को भादपद मास के शुक्ल पक्ष कि अष्टमी तिथि है। आज काशी के महालक्ष्मी कुंड में स्नान का बहुत ही महत्व बताया गया है। स्नान के बाद माता महालक्ष्मी के पूजन के साथ ही सोरहिया मेला का आरंभ हो जाता है। यह मेला सोलह दिनों तक चलता है। आज ज्येष्ठा और मूल देवी का विसर्जन होगा। आज अनुदय से नवमी भी मान्य है, आज श्रीचन्द्र जयन्ती भी है इसीलिए इसे चन्द्र नवमी भी कहा जाता है। इसे नन्दा नवमी भी कहा जाता है। इस नवमी को अदु:ख नवमी भी कहा जाता है। बंगाल और उड़ीसा में इसे तल नवमी भी कहा जाता है। आप सभी सनातनियों को “महालक्ष्मी कुण्ड स्नान और महालक्ष्मी पूजन” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌧️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – भाद्रपद शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 12:18 PM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र।इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 02:56 PM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र का स्वामी ग्रह केतु है। तथा स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं।
📣 योग – सौभाग्य योग 09:30 PM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : बव – 12:17 पी एम तक
द्वितीय करण – बालव – 11:24 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:28:14 AM
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:32:28 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:22 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:38 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:15 पी एम से 03:03 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:17 पी एम से 06:41 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:17 पी एम से 07:28 पी एम
💧 अमृत काल : 08:42 ए एम से 10:16 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 24
❄️ रवि योग : 02:56 पी एम से 06:10 ए एम, सितम्बर 24
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में साबुत उड़द चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दुर्गा अष्टमी/ भागवत सप्ताहरंभ/ ज्येष्ठा गौरी विसर्जन दोपहर 02.55 तक/ दोरक धारण/ विषुव दिवस/ राधा अष्टमी/ श्री दधीची जयंती/ स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम पुण्य तिथि, रसायनशास्त्री असीमा चटर्जी जन्म दिवस, सांकेतिक भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस, विश्व बधिर दिवस, स्वतंत्रता सेनानी यूसुफ़ मेहरअली जयन्ती, चिकित्साशास्त्री सत्यनारायण शास्त्री स्मृति दिवस, भारतीय सेना की 29वीं लांसर्स रेजिमेंट बदलू सिंह स्मृति दिवस, महाराजा हरि सिंह जन्म दिवस, हैफा दिवस, मूल समाप्त
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
वास्तु के अनुसार घर में कांटेदार पौधों को नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा फैलती है। जिन घरों में कांटेदार पौधे होते हैं वहां पर रहने वाले सदस्यों के बीच तनाव, विवाद और लड़ाई-झगड़े अक्सर होते हैं। ऐसे में घर के अंदर अगर आपने कोई कांटेदार पौधे को लगा रहा है तो उसे फौरन ही घर से बाहर निकाल देना चाहिए।
कांटेदार पौधे से घर के अंदर नकारात्मकता को बढ़ावा मिलता है।
बेड के सामने न लगाएं दर्पण
वास्तु शास्त्र के अनुसार बेड के सामने दर्पण नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। बेड के सामने दर्पण लगा हुआ होने से व्यक्ति को नींद नहीं आती और मानसिक तनाव बढ़ता है। इसके अलावा शयन कक्ष में दर्पण नहीं लगाएं, ऐसा करने से दाम्पत्य जीवन में विश्वास की कमी आती है । इसके साथ ही पति-पत्नी में आपसी मतभेद भी बढ़ता है एवं पति-पत्नी को कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं।
यहां नहीं होना चाहिए इलेक्ट्रॉनिक चीजें
वास्तु शास्त्र के अनुसार बेड के आपपास कभी भी इलेक्ट्ऱॉनिक चीजें नहीं रखना चाहिए। इससे व्यक्ति को अच्छी तरह से नींद नहीं आती है और स्वास्थ्य में उल्टा प्रभाव पड़ता है। इसलिए सोते समय सिरहने के पास कभी भी इस तरह की चीजों को नहीं रखना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
घर के झगड़े मिटाने और सुख-शांति पाने के उपाय
शनिदेव स्वयं कहते हैं कि ‘जो शनिवार को पीपल को स्पर्श करते है, उसको जल चढ़ाता है, उसके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उसको कोई पीड़ा नहीं होगी |’ ग्रहदोष और ग्रहबाधा जिनको भी लगी हो, वे अपने घर में 9 अंगुल चौड़ा और 9 अंगुल लम्बा कुमकुम का स्वस्तिक बना दें तो ग्रहबाधा की जो भी समस्याएँ है, दूर हो जायेगी |
स्नान के बाद पानी में देखते हुए ‘हरि ॐ शांति’ इस पावन मंत्र की एक माला करके वह पानी घर या जहाँ भी अशांति आदि हो, छिडक दे और थोडा बचाकर पी लें फिर देख लो तुम्हारा जीवन कितना परिवर्तित होता है |
☘️ आरोग्य संजीवनी 🍃
पद्म पुराण में आता है : ‘जो पुरुष उत्पन्न हुए क्रोध को अपने मन से रोक लेता है, वह उस क्षमा के द्वारा सबको जीत लेता है | जो क्रोध और भय को जीतकर शांत रहता है, पृथ्वी पर उसके समान वीर और कौन है ! क्षमा करनेवाले पर एक ही दोष लागू होता है, दूसरा नहीं, वह यह कि क्षमाशील पुरुष को लोग शक्तिहीन मान बैठते हैं | किंतु इसे दोष नहीं मानना चाहिए क्योंकि बुद्धिमानो का बल क्षमा ही है | क्रोधी मनुष्य जो जप, होम और पूजन करता है वह सब फूटे हुए घड़े से जल की भाँति नष्ट हो जाता है |’
क्रोध से बचने के उपाय :
एकांत में आर्तभाव से व सच्चे ह्रदय से भगवान से प्रार्थना कीजिये कि ‘हे प्रभो ! मुझे क्रोध से बचाइये |जिस पर क्रोध आ जाय उससे बड़ी नम्रता से, सच्चाई के साथ क्षमा माँग लीजिये |
सात्त्विक भोजन करे | लहसुन, लाल मिर्च एवं तली हुई चीजों से दूर रहें | भोजन चबा-चबाकर कम-से-कम २५ मिनट तक करें | क्रोध की अवस्था में या क्रोध के तुरंत बाद भोजन न करें
📖 गुरु भक्ति योग_
🕯️
अगर कोई बोलता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश से ऊपर सदाशिव हैं तो उसे पता होना चाहिए कि सदाशिव ही महेश रूप में प्रकट होते हैं। अगर कोई बोलता है कि ब्रह्मा विष्णु महेश से ऊपर महाविष्णु हैं तो उसे पता होना चाहिए कि महाविष्णु ही विष्णु रूप में प्रकट होते हैं।
वास्ताव में एक ही परब्रह्म परमात्मा हैं जो स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम, कृष्ण, दुर्गा, गणपति इत्यादि रूपों में प्रकट होते हैं।
तो जी नहीं, ब्रह्मा विष्णु महेश से ऊपर कोई भी शक्ति नहीं है, अगर कही लिखा हो तो समझ जाना कि वो त्रिमूर्ति से अभिन्न हैं। क्योंकि जब हम ईश्वर के किसी स्वरूप की पूजा करते हैं तो उस समय वही रूप सर्वोपरि होता है। जिस रूप की स्तुति उस वक्त वही सबसे महान।
एक परमात्मा के ही, उसके रूप अनेक हैं।
भारतीय धार्मिक परंपरा में, ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) को त्रिमूर्ति के रूप में माना जाता है और उन्हें सृष्टि, स्थिति और संहार के देवताओं के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। यह त्रिमूर्ति कॉन्सेप्ट हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, हिन्दू धर्म में अनेक देवताएँ और देवीयाँ मानी जाती हैं, जिनका विभिन्न कार्यक्षेत्र और महत्व होता है। उनमें से कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
दुर्गा: दुर्गा माता, शक्ति की प्रतिष्ठित देवी है और विभिन्न रूपों में पूजी जाती है, जैसे कि काली, लक्ष्मी, सरस्वती आदि।
गणेश: गणेश भगवान, विद्या, विज्ञान, और कठिनाइयों के देवता के रूप में प्रसिद्ध हैं।
सूर्य और चंद्रमा: सूर्य और चंद्रमा को समर्पित देवताओं के रूप में माना जाता है, जिनका सम्बंध ग्रहणों और ज्योतिष विज्ञान से है।
वायु और अग्नि: वायु और अग्नि को भी देवताओं के रूप में माना जाता है, और उन्हें प्राणशक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।

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