
ग्रामीण बोले हवा के साथ काली राख से घरों का सामान हो रहा खराब और सांस लेने में होती है परेशानी ।
रिपोर्टर : मधुर राय
बरेली । राष्ट्रीय राजमार्ग 45 पर स्थित चार गांव में संचालित फॉर्चून राइस मिल से निकलने वाली धूल और राख से लोग परेशान हैं। राइस मिल से निकलने वाली राख को राइस मिल संचालक के द्वारा बड़ी मात्रा में मिल के आसपास राष्ट्रीय राजमार्ग के आजू-बाजू और चार गांव से दहलबाड़ा जाने वाले मार्ग से निकलने वाली बारना नदी में
में फेंकी जा रही है। जो हवा के संपर्क में आने के साथ ही उड़ने से गांव वाले एवं मार्ग से निकलने वाले वाहन चालक आंखों में जलन जैसी समस्या से जूझ रहे हैं।
बता दें कि 24 घंटे चलने वाली इस राइस मिल से निकलने वाली डस्ट धूल के कारण जहां ग्रामीण परेशान है वहीं आसपास के कृषक भी परेशान है क्योंकि इसकी धूल बड़ी मात्रा में फसलों और खेतों में जमा होने के कारण जमीन की उपजाऊ शक्ति और फसलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वही बारना नदी में फेक जाने वाली इस राख से नदी का जल दूषित तो होगा ही साथ ही जलीय जीवों के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि उड़ने वाली धूल के कारण ग्रामीण क्षेत्र का स्वच्छ वातावरण दूषित हो रहा है साथ ही छतों पर राख और सूखने के लिए फैलाए गए कपड़ों पर राख की परत जम जाती है।
बीमारियों का बढ़ रहा है खतरा –
खेत में काम करते समय, पैदल आने जाने या बाइक से आने जाने वालों की आंखों में राख के कण पड़ने से जलन जैसी समस्या हो रही है। सांस के साथ राख के शरीर के अंदर जाने से संक्रामक बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में इस पर रोक लगाया जाना जरूरी है जिससे कि समस्या से निजात मिल सके।
इस संबंध में वरिष्ठ चिकित्सा के डॉक्टर बी.डी यादव ने बताया कि धूल और डस्ट किसी भी प्रकार की हो यदि सांस के माध्यम से शरीर के अंदर जाती है तो यह है स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। रही बात फैक्ट्री से निकलने वाली राख वह तो अधिक खतरनाक होती है जो फेफड़े के लिए खतरनाक साबित तो होती ही है साथ ही श्सांस , दमा, एलर्जी के साथ-साथ आंखों में भी गंभीर बीमारी पैदा कर सकती है।
वही गांव के अमृतलाल चौबे ने बताया कि वर्तमान में जहां इस मौसम में राइस मिल से निकलने वाली राख जो की राइस मिल के द्वारा सड़क के आजू-बाजू फेंकी जा रही है जिससे अभी हम ग्रामीण परेशान है ।तो वहीं आने वाले दिनों में गर्मी के मौसम में चलने वाली तेज हवा के साथ यह राख बड़ी मात्रा में उड़ेगी जो हम लोगों के लिए काफी नुकसानदायक साबित होगी ।
प्रतिदिन बरेली से मोटरसाइकिल से बाड़ी जाने वाले सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मिल से फेंकी जाने वाली यह काली रात काली रात बारिश के मौसम में नहीं उड़ाती बाकी आठ महीने सर्दी और गर्मी काफी परेशानी का सबक बनती है। दिन भर राख उड़ती रहती है जो लोगों के आंखों में जाता है, इससे आंखें तो खराब होता ही है साथ ही साथ दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है. इसके अलावा ये राख सांस के जरिए फेफड़ों में जाता है ।
नगर के जागरूक युवा अंकुर जैन ने बताया कि इस समस्या को लेकर नाही प्रशासन ध्यान दे रहा है और ना ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड। जबकि नियम अनुसार राइस मिल से निकलने वाले इस डस्ट को राइस मिल के द्वारा एक निश्चित स्थान पर डिस्पोज करवाना चाहिए जिससे कि वातावरण प्रदूषित न हो और ना ही आम जनता को परेशानी हो।
जब संबंध में ग्राम पंचायत चारगांव के सचिव उमेश सिंह ठाकुर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि राइस मिल संचालक के द्वारा पंचायत क्षेत्र में फेक जाने वाली राख गांव एवं यह निवास करने वाले लोगों के लिए काफी नुकसानदायक साबित होगी इस संबंध में पंचायत के द्वारा राइस मिल को नोटिस दिया जाएगा की आप अपने यहां से निकलने वाली राख को एक निश्चित स्थान पर डिस्पोज करें एवं स्थान का चयन करें। ऐसा नहीं करने की स्थिति में पंचायत के द्वारा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जब इस संबंध में राइस मिल के सचिन शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आपको जो जानकारी है वह सरासर गलत है हमारे द्वारा मिल से निकलने वाली राख को काफी दूर राख को फिकवाया जा रहा है।
इस संबंध में संतोष मुद्गल, एसडीएम बरेली का कहना है कि चारगांव स्थित राइस मिल संचालक के द्वारा यदि सड़क किनारे और बारना नदी में मिल से निकलने वाली डस्ट को फेंका जा रहा है यह गलत है, इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्यवाही लिए लिखा जाएगा साथ ही मेरे द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे।



