देश की न्याय व्यवस्था में और पारदर्शिता ज़रूरी, विचार गोष्ठी संपन्न

रिपोर्टर : मनीष यादव
भोपाल । देश की न्याय व्यवस्था में और पारदर्शिता ज़रूरी, हालिया घटनाओं से समाज में चिंता, न्याय मंच के आयोजन मे वक्ताओं ने रखी राय
न्याय मंच द्वारा होली मिलन एवं न्याय पर संगोष्ठी का आयोजन
भोपाल न्याय मंच एवं यादव समाज के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष होली मिलन एवं न्याय संगोष्ठी का आयोजन मैंगो रेट्रीट सूरज नगर में किया गया। इस अवसर पर न्याय मंच के संरक्षक सभाजीत यादव ने कहा कि न्याय जीवन का आधार है। संविधान की प्रस्तावना में भारत के समस्त नागरिकों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार में न्याय सुनिश्चित किया जाए तो समाज में भी न्याय की स्थापना संभव है। पक्षपात से परिवार बिखर जाता है, और दुनिया का सबसे बड़ा अपराधी भी न्याय की मांग करता है, क्योंकि न्याय सभी की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम में कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि न्याय की शुरुआत घर से होनी चाहिए।
पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि राजनीतिक दलों को अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना होगा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय देने वाले स्वयं भी कटघरे में होते हैं, इसलिए न्याय व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखने की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि सचिन यादव (पूर्व मंत्री) ने कहा कि न्याय आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज में अधिकारों का संरक्षण जरूरी है और सभी को समान रूप से न्याय मिले, इसके लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय को लेकर चल रही लंबी लड़ाई को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि पिछड़े वर्गों की आवाज़ को बुलंद करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर न्याय मंच की अध्यक्ष भावना यादव, पूर्व न्यायाधीश बी.आर. यादव, पूर्व आईएफएस आजाद सिंह डबास, वरिष्ठ समाजसेवी नवाब सिंह, योगेंद्र मंडलोई (यादव महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष), पप्पू यादव (प्रदेश अधिकारी, कर्मचारी नेता), हरिसिंह यादव (पूर्व आईपीएस), अंजनी कुमार (समाजसेवी) सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी लक्ष्मी यादव, और रविंद्र यादव भी मौजूद रहे। व्यवस्था की कमान आज़ाद सिंह यादव ने संभाली।
कार्यक्रम का संचालन बी.आर. वर्मा (पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष, एमपी कांग्रेस) ने किया। उन्होंने अपने अनूठे अंदाज़ और व्यंगात्मक शेरो शायरी से व्यवस्था पर गहरे तंज कसे। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के नागरिक, वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी, न्यायविद, समाजसेवी एवं राजनीतिक विश्लेषक उपस्थित रहे।
न्याय मंच का उद्देश्य
न्याय मंच ने इस अवसर पर समाज में न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और न्याय को सभी के लिए सुलभ बनाने की प्रतिबद्धता जताई। मंच ने इस बात पर जोर दिया कि यदि हर व्यक्ति अपने कार्यों में न्याय को प्राथमिकता दे, तो एक सशक्त और समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।
सभाजीत यादव के मुख्य विचार (न्याय मंच संगोष्ठी में):
न्याय जीवन का आधार है – बिना न्याय के समाज, परिवार और व्यवस्था में अस्थिरता आ जाती है।
संविधान की प्रस्तावना में न्याय – भारत के हर नागरिक के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात कही गई है, जिससे समाज में संतुलन बना रहता है।
परिवार में न्याय जरूरी – अगर परिवार में न्याय की भावना न हो और पक्षपात हो, तो परिवार बिखर जाता है।
दुनिया का सबसे बड़ा अपराधी भी न्याय मांगता है – इसका मतलब है कि न्याय हर व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है, चाहे वह किसी भी स्थिति में हो।
हर वर्ग में न्याय हो, संघर्ष नहीं – समाज में हर वर्ग को न्याय मिलना चाहिए, ताकि संघर्ष और असंतोष पैदा न हो।
हर संस्कृति और हर व्यवस्था में न्याय जरूरी – यदि किसी भी व्यवस्था में न्याय को कमजोर किया गया, तो वह तंत्र बिखर जाता है।
विद्रोह भी न्याय के लिए होते हैं – इतिहास में जितने भी विद्रोह हुए हैं, वे न्याय की मांग के कारण ही हुए।
हर दर्शन में न्याय की बात – भारत के हर दार्शनिक मत ने न्याय को केंद्र में रखा है, क्योंकि यह स्थायित्व का मूल है।
प्रत्येक प्राणी के लिए न्याय व्यवस्था हो – केवल मानव समाज ही नहीं, हर जीव के लिए भी न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।
कम लोग भी बदलाव ला सकते हैं – अगर कुछ ही लोग न्याय के पक्ष में खड़े हों, तो भी वे समाज में बदलाव ला सकते हैं।
सत्य को अभिव्यक्त करने के लिए कम लोग भी पर्याप्त हैं – सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करने वाले कम लोग भी अगर संगठित हों, तो वे समाज में बड़ा परिवर्तन कर सकते हैं।
हर स्थिति में खुद से पूछें – क्या मैं न्यायपूर्ण कार्य कर रहा हूँ? – हर व्यक्ति को आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि उसके कार्य न्यायसंगत हैं या नहीं।
संविधान की पहली पंक्ति न्याय से शुरू होती है – यह दिखाता है कि न्याय हमारे संविधान की मूल आत्मा है।
न्याय की प्राप्ति के लिए सतत प्रयास जरूरी – न्याय की स्थापना के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा।
सभाजीत यादव ने न्याय को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से आवश्यक बताते हुए कहा कि न्यायपूर्ण व्यवस्था ही एक संगठित और विकसित समाज का आधार होती है।



