धार्मिक

हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा: 10 दिनों की हैं शारदीय नवरात्रि, 22 सितंबर को होगी घट स्थापना

रिपोर्टर : सतीश मैथिल
सांचेत । शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल 10 दिन का रहेगा और देवी मां हाथी पर सवार होकर आएंगी। आमतौर पर नवरात्रि का पर्व 9 दिनों का होता है, लेकिन इस बार तृतीया तिथि दो दिनों तक पड़ रही है। जिसके कारण शारदीय नवरात्रि का पर्व 10 दिवसीय है।
ज्योतिषाचार्य पं. अरुण शास्त्री ने बताया कि बढ़ी हुई नवरात्रि आमजनों और साधकों के लिए अत्यंत शुभकर माने जाते हैं। वहीं विधि विधान से देवी मां की पूजा करने वाले लोगों को मां का विशेष आशीर्वाद और कृपा मिलती है। मां जगदंबा हाथी पर सवार होकर अपने मायके आएंगी और फिर नर वाहन पर बैठकर देवलोक वापस जाएंगी।
घट स्थापना और मां के पूजन का शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य पं. अरुण शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि में घट स्थापना का बहुत महत्त्व होता है।शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है। घट स्थापना प्रतिपदा तिथि में कर लेनी चाहिए। 22 सितंबर की रात 4:57 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। दिन में 12:16 बजे तक उत्तरा फाल्गुनी नश्रत्र रहेगा। इसके बाद हस्त नक्षत्र पूरे दिन मान्य रहेगा।
यह दोनों नक्षत्र और अभिजित मुहूर्त, द्विस्वभाव लग्न में कलश स्थापना अत्यंत शुभ मानी जाती है। सुबह 6:28 से 8:10 बजे तक अमृत बेला में कलश स्थापना (जौ बोना) अधिक शुभ रहेगा।उसके बाद दिवाकाल 9:30 से 11 बजे तक शुभ बेला में ये समय सभी तरह से शुभ फलदायक माना जाएगा।दोपहर में अभिजित मुहूर्त 11:49 से 12:55 तक रहेगा, इसमे भी घटस्थापना करना शुभ माना जाता है।
सुख समृद्धि, एश्वर्य देने वाले बनेंगे योग ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सोमवार को उत्तरा फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र में यदि देवी आराधना का पर्व शुरू हो, तो यह देवीकृपा व इष्ट साधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शुभ योग, श्रीवास्तव योग, शुक्ल योग, ब्रह्म योग में उत्तरा फाल्गुनी के बाद हस्त नक्षत्र रहेगा, सर्वाथ सिद्धि योग रहेगा।
ज्योतिष के अनुसार तुला राशि में चंद्रमा और मंगल ग्रह की युति से महालक्ष्मी योग का निर्माण होगा, जो बेहद शुभ फलदाई होने वाला है। जो बेहद शुभ फलदाई होता है। ज्योतिष के अनुसार महालक्ष्मी योग बेहद ही कल्याणकारी माना जाता है।देवी मां का हाथी पर सवार होकर पृथ्वी पर आना अत्यंत शुभ होता है। कृषि खेती पैदावार में वृद्धि होती है, सुख समृद्धि ऐश्वर्य वैभव में वृद्धि होती है।
शारदीय नवरात्रि की तिथियां पहला नवरात्र- प्रथमा तिथि, 22 सितंबर 2025, दिन सोमवार मां शैलपुत्री की उपासना। देवी मां का देवलोक से पृथ्वी पर हाथी पर सवार होकर हमारे घर के आगमन में आएंगी।
दूसरा नवरात्र- द्वितीया तिथि, 23 सितंबर 2025, दिन मंगलवार मां ब्रह्मचारिणी की उपासना।
तीसरा नवरात्र- तृतीय तिथि 24 सितंबर दिन बुधवार मां चंद्रघंटा की उपासना
तीसरा नवरात्र- तृतीया तिथि, 25 सितंबर 2025, दिन गुरुवार मां चंद्रघंटा की उपासना।
चौथा नवरात्र- चतुर्थी तिथि, 26 सितम्बर 2025, शुक्रवार मां कुष्मांडा की उपासना।
पांचवां नवरात्र- पंचमी तिथि, 27 सितम्बर 2025, शनिवार माता स्कन्द देवी की उपासना।
छठा नवरात्र- षष्ठी तिथि, 28 सितंबर 2025, रविवार मां कात्यायनी की उपासना।
सातवां नवरात्र- सप्तमी तिथि, 29 सितंबर 2025, सोमवार मां कालरात्रि की उपासना।
आठवां नवरात्र- अष्टमी तिथि, 30सितम्बर 2025, मंगलवार मां महागौरी की उपासना।
नौवां नवरात्र- नवमी तिथि, 1 अक्तूबर 2025, बुधवार मां सिद्धिदात्री की उपासना।
दशहरा- दशमी तिथि, 2 अक्तूबर 2025, गुरुवार। नर वाहन पर देवलोक में देवी मां का प्रस्थान

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