मध्य प्रदेश

डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । भारतीय डाक विभाग कर्मचारी संघ ने डाक विभाग के निजीकरण, कर्मचारियों पर बढ़ते कार्य दबाव तथा विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है । आंदोलन के प्रथम चरण में 20 से 27 जुलाई तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपने नियमित कार्य के साथ विरोध दर्ज करा रहे हैं ।
संभागीय सचिव अनिल सिंह बागरी ने बताया कि डाक विभाग में निजीकरण की प्रक्रिया तेज होने के साथ कर्मचारियों पर “टारगेट” के नाम पर अनावश्यक मानसिक एवं आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है । उनका आरोप है कि ग्रामीण डाक सेवकों और विभागीय कर्मचारियों से अपने वेतन से खाते खुलवाकर लक्ष्य पूरे कराने का दबाव डाला जा रहा है, जो कर्मचारियों के शोषण के समान है ।
संघ द्वारा जारी आंदोलन की रूपरेखा के अनुसार 28 जुलाई को मंडलीय कार्यालयों में दोपहर के भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन किया जाएगा । इसके बाद 5 अगस्त को पूरे मध्यप्रदेश में एक दिवसीय हड़ताल तथा मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी ।
संघ ने सरकार और डाक विभाग से टारगेट आधारित शोषण बंद करने, रेल डाक सेवा को पुनः शुरू करने, मेल मोटर विभाग के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, विभाग में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर रोक, पोस्टल अकाउंट के विकेंद्रीकरण पर रोक, भूतपूर्व सैनिक कोटे से भर्ती कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने, वर्तमान NDC/IDC प्रणाली समाप्त कर पुरानी डाक वितरण व्यवस्था बहाल करने तथा 17 दिसंबर को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित करने सहित कई प्रमुख मांगें रखी हैं ।
संघ का कहना है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा ।

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