Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 04 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 04 अप्रैल 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि 08:12 PM तक उपरांत अष्टमी
✏️ तिथि स्वामी – सप्तमी के देवता हैं चित्रभानु। सप्तमी तिथि को चित्रभानु नाम वाले भगवान सूर्यनारायण का पूजन करने से सभी प्रकार से रक्षा होती है। यह मित्रवत, मित्रा तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आद्रा 05:20 AM तक उपरांत पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र स्वामी – आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। आर्द्रा नक्षत्र के देवता भगवान शिव के रुद्र रूप हैं. रुद्र आंधी और तूफ़ान के स्वामी हैं।
⚜️ योग – योग 09:45 PM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग
⚡ प्रथम करण : गर – 08:51 ए एम तक
✨ द्वितीय करण – वणिज – 08:12 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:51:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:09:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:22 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:59 ए एम से 12:49 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:39 पी एम से 07:02 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:41 पी एम से 07:49 पी एम
💧 अमृत काल : 07:33 पी एम से 09:07 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, अप्रैल 05 से 12:46 ए एम, अप्रैल 05
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:20 ए एम, अप्रैल 05 से 06:07 ए एम, अप्रैल 05
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में तुलसी का पौधा लगाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/रवियोग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ राष्ट्रीय समाचार-पत्रकार को गले लगाओ दिवस, पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, बापू नाडकर्णी जन्म दिवस, आनंद मोहन चक्रवर्ती जन्म दिवस, पंडित कुमार बोस जन्म दिवस, परवीन बाबी की जयंती सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन पुण्य तिथि, राष्ट्रीय विटामिन सी दिवस, महान क्रांतिकारी असित भट्टाचार्य जन्म दिवस, भारतीय अभिनेत्री प्रविन बोबी जन्म दिवस, विश्व चूहा दिवस, अंतरराष्ट्रीय खान जागरूकता दिवस (International Mine Awareness Day)
✍🏼 तिथि विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🏘️ Vastu tips
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सुख-समृद्धि के आगमन के लिए तुलसी को उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इससे मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इसके अलावा तुलसी के पौधे को पूर्व दिशा में भी लगा सकते हैं। इस दिशा में तुलसी को लगाने से धन में अधिक वृद्धि होगी। साथ ही आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलेगा।
👉🏼 इन बातों का रखें विशेष ध्यान
तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना शुभ माना गया है, लेकिन इस काम के लिए सूर्योदय के समय को शुभ माना गया है। तुलसी पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े को भूलकर भी नहीं पहनना चाहिए और विधिपूर्वक तुलसी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। साथ ही पौधे के आसपास गंदगी न रखें, क्योंकि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास माना गया है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शंख पुष्पी का क्या फायदा हैं ?
शंखपुष्पी एक अत्यंत चमत्कारी और शक्तिशाली जड़ी-बूटी है, जिसे प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क शक्ति को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। यह एक प्राकृतिक टॉनिक के रूप में कार्य करती है, जो न केवल दिमाग को तेज़ बनाती है, बल्कि पूरे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
मस्तिष्क की शक्ति और याददाश्त बढ़ाने में सहायक शंखपुष्पी को मुख्य रूप से मेमोरी बूस्टर के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को सक्रिय करते हैं और ब्रेन फंक्शन में सुधार लाते हैं। यह याददाश्त तेज करने, फोकस बढ़ाने और मानसिक थकान को कम करने में बेहद प्रभावी है। खासतौर पर छात्रों, ऑफिस वर्कर्स और उम्रदराज़ लोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद होती है।
अनिद्रा (नींद न आने की समस्या) का समाधान जो लोग रातभर करवटें बदलते रहते हैं, उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और दिनभर आलस और थकावट महसूस होती है।शंखपुष्पी एक प्राकृतिक स्लीप टॉनिक की तरह काम करती है, जो नर्वस सिस्टम को शांत करके गहरी और बेहतरीन नींद दिलाने में मदद करती है। नियमित सेवन से अनिद्रा (इंसोम्निया) की समस्या दूर हो सकती है।
🍵 आरोग्य संजीवनी 🍶
गुग्गुल एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण सूजन को कम करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। गुग्गुल का नियमित सेवन जोड़ों के दर्द में राहत देने के साथ-साथ शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में भी सहायक होता है।
निर्गुण्डी को आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द की एक बेहतरीन औषधि माना जाता है। इसके पत्तों और तेल का उपयोग सूजन और दर्द को कम करने के लिए किया जाता है।
कैसे करें उपयोग:निर्गुण्डी के तेल से प्रभावित जोड़ों पर मालिश करें।इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर सेवन करने से भी लाभ मिलता है।
अजवाइन में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
क्या कर्ण को पता था की श्रीकृष्ण ही भगवान है ?
कर्ण को श्रीकृष्ण के विषय मे यह पता था कि श्रीकृष्ण विष्णु देवता के पृथ्वीलोक पर उसके समय के द्वापर युग मे अवतार है। जिनका मनुष्य जन्म पृथ्वीलोक/ मृत्यु लोक मे यदुवंश मे क्षत्रिय वर्ण मे हुआ है। कर्ण अपने जीवन मे नित्य प्रातःकाल स्नान उपरांत सूर्य देवता की पूजा-पाठ करने के पश्चात ब्रह्म ज्ञानी ब्राहमणो को नित्य सुवर्ण दान व अन्य उनकी आवश्यकतानुसार दान देने के पश्चात उनसे अपनी परब्रह्म परमेश्वर के आत्म स्वरूप व उसके ब्रह्म तत्व संबधी अपनी जिज्ञासा के प्रश्न करके उन ब्रह्म ज्ञानी श्रोत्रिय श्रुति के ज्ञाता ब्राहमणो से ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करता था। जिससे कर्ण को सत्य ब्रह्म का तत्व ज्ञान हो गया था । कर्ण को अपने कर्तव्य धर्म का व अपने व्यक्तिगत सत्य धर्म का ज्ञान भी हो गया था। अपने कर्तव्य धर्म के ज्ञान व सत्य स्वरूप परब्रह्म परमेश्वर के ज्ञान के कारण कर्ण ने महाभारत युद्ध मे गंगापुत्र देवव्रत भीष्म पितामह के बाण शैय्या पर लेट जाने पर रात्रिकाल मे उनसे अपने व्यक्तिगत सत्य धर्म व अपने व्यक्तिगत सत्य कर्तव्य धर्मी की चर्चा करके गंगापुत्र देवव्रत भीष्म पितामह से धर्म पूर्वक महाभारत मे युद्ध करने पर अपार अमर यश व कीर्ति का वरदान लेकर दुर्योधन का ऋण उतारने हेतु महाभारत युद्ध मे धर्म पूर्वक युद्ध धर्म के नियमो का पालन करते हुए महाभारत युद्ध किया । जबकि कर्ण के सामने ही महाभारत युद्ध मे वासुदेव श्रीकृष्ण ने धर्म युद्ध के नियमो का पाण्डवो से उलंघन करवाकर छल कपट व झूठ तथा अधर्म व अनीति का प्रयोग पाण्डवो से करवाकर पाण्डवो से सभी युद्ध धर्म के नियम तुड़वाने का जघन्य पापकर्म करवाकर पाण्डवो को वासुदेव श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध मे अधर्म व पाप का सहारा लेकर विजय दिलवा दी। धर्म व न्याय की तुला /तराजू पर वासुदेव श्रीकृष्ण भी महाभारत युद्ध मे पाण्डवो से अधर्म पूर्वक युद्ध करनने की शिक्षा देकर व अर्जुन सहित सभी पाण्डवो से महाभारत युद्ध मे क्षत्रियो के धर्म युद्ध के नियमो का उल्लंघन करवाकर महापाप करवाकर पाण्डवो को महाभारत युद्ध मे पाप व अधर्म के मार्ग से जिताकर विजयी बनाकर पाप के पाप के मार्ग से वासुदेव श्रीकृष्ण भी पाण्डवो सहित पाप के भागीदार बने।
जभी तो माता गांधारी के श्राप से वासुदेव श्रीकृष्ण का यदुवंश भी वासुदेव श्रीकृष्ण के सामने आपस मे युद्ध करके नष्ट हो गया व श्रीकृष्ण की भी मृत्यु हो गयी एक जंगली भील का बाण लगने से। चारो वेदो व छहो शास्त्रो के अनुसार परब्रह्म परमेश्वर नित्य अजन्मा सनातन जन्म मरण के परे काल से परे कालातीत सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ आत्मा परब्रह्म परमेश्वर परमात्मा निराकार ब्रह्म है वह परब्रह्म परमेश्वर सबका आत्मा है वह परब्रह्म परमात्मा कोई देवी देवता नही है। वेदो मे उस सर्वशक्तिमान निराकार सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान अन्तर्यामी परब्रह्म परमेश्वर की पूजा-पाठ भक्ति व जप का केवल एक ही मन्त्र है ऊँ ।
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⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।



