कृषिज्योतिष

Today Panchang आज का पंचांग रविवार, 08 नवम्बर 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦•••  *_जय श्री हरि_*  •••✦
🧾 *आज का पंचांग* 🧾          
*रविवार 08 नवंबर  2026*
08 नवंबर 2026 दिन रविवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है आज श्राद्ध आदि की पुण्यतमा अमावस्या है। आज प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, गणेश कुबेर देवता का पूजन करना चाहिए। प्रदोष काल की स्थिति को देखते हुए दीपावली 2026 की पूजा और उत्सव 08 नवंबर 2026 को ही मनाया जाएगा। क्योंकि अगले दिन सायंकाल प्रदोष के समय अथवा वृषभ और सिंह लग्न के कारण अमावस्या न होने से दीपावली पूजा का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। ऐसे में लक्ष्मी के पूजन के लिए प्रदोष काल छूट जाता है। आप सभी सनातनियों को “माता लक्ष्मी गणेश कुबेर देवता के पूजन अर्थात दीपावली” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *_रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
*_इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
*_रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
*_रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल_*
🌐 *_कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,_*
✡️ *_शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2081 नल_*
👸🏻 *_शिवराज शक 352_*
☸️ *_काली सम्वत् 5126_*
🕉️ *_संवत्सर (उत्तर) क्रोधी_*
☣️ *_आयन –  दक्षिणायन_*
⛅ *_ऋतु – सौर शरद ऋतु_*
🌨️ *_मास – कार्तिक मास_*
🌑 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📆 *_तिथि – रविवार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि 11:28 AM तक उपरांत अमावस्या_*
🖍️ *_तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।_*
☄️ *_नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति अगले दिन सुबह 7:21 तक_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र स्वामी (ग्रह): राहु, अधिष्ठाता देवता: वायु (पवन देव) और सरस्वती।_*
⚜️ *_योग – आयुष्मान योग 03:02 AM तक, उसके बाद सौभाग्य योग_*
⚡ *_प्रथम करण – शकुनि 11:28 AM तक_*
✨ *_द्वितीय करण – बाद चतुष्पद 11:57 PM तक, बाद नाग_*
🔥 *_गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम_*
🤖 *_राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।_*
⚜️ *_दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।_*
🌞 *_सूर्योदय : प्रातः 06 बजकर 37 मिनट_*
🌅 *_सूर्यास्त : सायं 05 बजकर 32 मिनट_*
🫅🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः काल 4:40 ए एम 5:28 ए एम प्रातःपूर्व तक_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:36  ए एम 12:22 दोपहर तक_*
🏹 *_विजय मुहूर्त- दोपहर 1:54 पी एम से 2:40 दोपहर तक_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त- शाम 5:43 पी एम से लेकर 6:07 शाम सूर्यास्त तक_*
🌃 *_प्रातः संध्या- प्रातः काल 5:04 ए एम से सुबह 6:16 ए एम तक_*
🌌 *_सायं संध्या – शाम को 5:43 पी एम से 6:55 पी एम तक_*
🚓 *_यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।_*
💁🏻‍♀️ *_आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।_*
🌳 *_वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – दिवाली (बड़ी दिवाली), कमला जयंती, लक्ष्मी पूजा और नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), चोपड़ा पूजा, पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी  जयन्ती, (भारतीय शास्त्रीय कथक नृत्यांगना) सितारा देवी जयन्ती, मुगल सम्राट जहाँगीर स्मृति दिवस, राष्ट्रीय अभिभावक-शिक्षक दिवस, पार्श्व गायिका उषा उत्थुप जयन्ती, प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता (जिन्होंने रामायण धारावाहिक में रावण की भूमिका निभाई थी) अरविंद त्रिवेदी जयन्ती, अंतरराष्ट्रीय रेडियोलॉजी दिवस (International Day of Radiology)
✍🏼 *_तिथि विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।  
🌸 *_Vastu tips_* 🌷
*_वास्तु शास्त्र के अनुसार, तवे को कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए। खासतौर पर रात में खाना बनाने के बाद इसे तुंरत साफ करके सीधा रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि आपकी इस एक छोटी सी आदत से घर में हमेशा पॉजिटिविटी बनी रहती है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है।
*_आर्थिक परेशानी का संकेत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तवे को उल्टा रखने से घर की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। इससे अनावश्यक खर्च बढ़ने और धन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही परिवार की सुख-शांति पर भी असर पड़ने की बात कही जाती है।
*_राहु दोष और तनाव वास्तु मान्यताओं के अनुसार, उल्टा तवा रखने से राहु दोष बढ़ सकता है। इसकी वजह से घर में विवाद, मानसिक तनाव और आपसी मतभेद बढ़ने की आशंका रहती है। कुछ जगहों पर इसे परिवार के मुखिया के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालने से भी जोड़ा जाता है।
⚜️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* 🔐
*_गैस की परेशानी कैसे कम की जा सकती है?_*
*_दाल को पानी में भिगोने पर उसमें मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट पानी में घुल जाते हैं. इनमें ख़ास तौर पर रैफिनोज़ ओलिगोसैकराइड शामिल है, जिससे गैस बन सकती है.
*_एक अध्ययन में दालों को भिगोकर उनका पानी फेंक दिया गया. इसके बाद गैस बनाने वाले इन कार्बोहाइड्रेट की मात्रा में कमी देखी गई.
*_दाल भिगोने से गैस बनाने वाले रैफिनोज़ नाम के कार्बोहाइड्रेट में करीब 25 फ़ीसदी कमी आई.
*_इसी तरह स्टैकियोज़ में करीब 25 फ़ीसदी और वर्बास्कोज़ में करीब 42 फ़ीसदी कमी आई.
*_”दालों और फलियों को लंबे समय तक भिगोने के बाद उनका पानी फेंककर पकाया जाए तो गैस की परेशानी वाले लोगों को कुछ राहत मिल सकती है.”
*_दूसरा तरीक़ा दालों और फलियों को अंकुरित करके खाना है. उदाहरण के लिए, साबुत मूंग को अंकुरित करके खाया जा सकता है.       
🍶 *आरोग्य संजीवनी* 🥂
*_गर्मियों में काले तिल कैसे लें?_*
*_बहुत से लोग कहते हैं कि तिल की तासीर गर्म होती है। यह बात काफी हद तक सही है, इसलिए गर्मियों में इन्हें सही तरीके से लेना जरूरी है।
👉🏼 *_सबसे सरल तरीका:_*
*_• रात को 1 चम्मच काले तिल पानी में भिगो दें।_*
*_• सुबह इन्हें 4-5 किशमिश के साथ चबा-चबाकर खाएं।
*_• ऊपर से सादा पानी पी लें।यह तरीका अपेक्षाकृत हल्का माना जाता है और गर्मियों में अधिक लोकप्रिय है। किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?_*
*_• बार-बार किडनी स्टोन बनने वाले लोग_*
*_• अत्यधिक एसिडिटी या पित्त प्रकृति वाले लोग_*
*_• गर्भवती महिलाएं (विशेषकर शुरुआती महीनों में)
*_• Blood thinner दवाएं लेने वाले लोग ऐसे मामलों में किसी योग्य चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर रहता है। 
🪔 *गुरु भक्ति योग_* 🕯️
     जब ऋषि क्रतु और माता क्रिया की संतानें हुईं, तो वे संख्या में 60,000 थीं।जन्म के समय से ही इन सभी ऋषियों का आकार केवल एक मनुष्य के अँगूठे (Thumb-sized) जितना था।
        *_ये जन्मजात सिद्ध थे। इन्होंने कभी भी सांसारिक जीवन या गृहस्थी नहीं बसाई। ये पूर्ण ब्रह्मचारी (ऊर्ध्वरेता) थे और सदा वेदों के अध्ययन और तपस्या में लीन रहते थे।
      *_ब्रह्मा जी ने इन 60,000 बालखिल्य ऋषियों को एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य सौंपा। ये सभी सूर्य नारायण (सूर्य देव) के रथ के आगे-आगे चलते हैं। ये सूर्य की तीव्र और विनाशकारी तपन (गर्मी) को सोख लेते हैं और ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ‘सूक्तों’ का पाठ करते हुए सूर्य देव की स्तुति करते हैं, जिससे पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहता है।
        *_एक बार महर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लिए एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ में मदद करने के लिए देवताओं के राजा इंद्र और ये 60,000 बालखिल्य ऋषि भी आए। सभी को यज्ञ के लिए समिधा (सूखी लकड़ियां) इकट्ठा करने का काम सौंपा गया।
       *_इंद्र अपने विशाल स्वरूप और शक्ति के घमंड में लकड़ियों के बड़े-बड़े गट्ठर उठाकर ले आए। दूसरी ओर, अँगूठे के आकार के बालखिल्य ऋषि भी अपनी शक्ति अनुसार पलाश के पेड़ की एक छोटी सी डंडी (टहनी) मिलकर उठा रहे थे। आकार छोटा होने के कारण वे सब मिलकर भी उस डंडी को बमुश्किल हिला पा रहे थे। रास्ते में एक गाय के खुर से बना छोटा सा गड्ढा था, जिसमें बारिश का थोड़ा पानी भरा हुआ था। बालखिल्य ऋषि उस छोटे से पानी के गड्ढे को पार नहीं कर पा रहे थे और उसमें गिरकर छटपटाने लगे।
     *_यह देखकर इंद्र को बहुत तेज़ हँसी आ गई। अहंकार में चूर इंद्र ने उनका उपहास (मज़ाक) उड़ाया और उनका सम्मान किए बिना वहां से चले गए।
       *_इंद्र के इस बर्ताव से बालखिल्य ऋषि अत्यंत क्रोधित हो गए। वे परम तपस्वी थे, उनका तपोबल इंद्र से भी अधिक था। उन्होंने उसी समय एक दूसरा यज्ञ शुरू कर दिया। उनका संकल्प था कि वे अपने तपोबल से एक नया इंद्र पैदा करेंगे, जो वर्तमान इंद्र से सौ गुना अधिक शक्तिशाली, पराक्रमी और इच्छा अनुसार रूप बदलने वाला होगा, जो देवताओं के राजा इंद्र को उनके पद से हटा देगा।
       *_जब इंद्र को इस बात का पता चला, तो वे डर के मारे कांपने लगे। वे तुरंत महर्षि कश्यप की शरण में गए। महर्षि कश्यप बालखिल्य ऋषियों के पास पहुंचे और उनसे प्रार्थना की, “हे ऋषियों! ब्रह्मा जी का विधान है कि इंद्र का पद खाली नहीं किया जा सकता। कृपा करके अपना यह संकल्प वापस ले लें।”
      *_बालखिल्य ऋषियों ने कहा, “हे कश्यप! हमारा तपोबल और यज्ञ निष्फल नहीं जा सकता। एक नया ‘इंद्र’ (शासक) तो पैदा होकर रहेगा।”
        *_तब महर्षि कश्यप ने एक बीच का रास्ता निकाला। उन्होंने कहा, “आपकी यह संतान देवताओं का राजा नहीं, बल्कि पक्षियों का राजा (पक्षीराज) बनेगी, जो बल और पराक्रम में इंद्र से भी श्रेष्ठ होगी।” बालखिल्य ऋषि इस बात पर मान गए और उन्होंने अपने यज्ञ का सारा पुण्य महर्षि कश्यप की पत्नी ‘विनता’ को दान कर दिया।
      *_बालखिल्य ऋषियों के इसी तपोबल और यज्ञ के फलस्वरुप कश्यप और विनता के घर साक्षात गरुड़ जी का जन्म हुआ। गरुड़ जी इतने शक्तिशाली थे कि उन्होंने अकेले ही स्वर्ग पर आक्रमण करके इंद्र सहित सभी देवताओं को हरा दिया था और अपनी माता की मुक्ति के लिए स्वर्ग से अमृत कलश छीन लाए थे। आगे चलकर गरुड़ जी भगवान नारायण (विष्णु जी) के वाहन बने।
     *_ऋषि क्रतु और क्रिया के ये 60,000 पुत्र आज भी सूर्य देव के रथ के आगे चलते हुए ब्रह्मांड की रक्षा कर रहे है।
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⚜️ *_अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
*_ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।।

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