फर्जी फर्म के बिल एवं वेंडर बनाकर शासन की लाखों रुपये की राशि का पंचायतें कर रही बंदरबांट शिकायतों के बाद नहीं हो रही कार्रवाई

जांच के बाद दोषी होगी एफआईआर दर्ज सीईओ सिलवानी । जनपद की ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द में लगे फर्जी फर्म के बिल तहसील में क्या पंचायतों को भ्रष्टाचार करने खुलेआम छूट दे रखी गई है जहां राशि पहले निकाल जाती है और 6-6 माह तक निर्माण कार्य नहीं होते अंतत सीएम हेल्पलाइन में शिकायत होती है फिर भी कार्यवाही नहीं होती। तहसील की लगभग सभी ग्राम पंचायतों के यही हाल हैं। स्टेशनरी सप्लाई करने वाला गिट्टी रेत मुरम और सीमेंट सप्लाई के बिल दे रहा है। वहीं सप्लायर भी ऐसे ही मटेरियल सप्लाई के बिल ग्राम पंचायतों को दे रहे है। ये बिल जिन फर्मों के है आस्तित्व में उन फर्मों का दूर दूर तक पता नहीं है। ग्राम पंचायतों में फर्जी वेंडरों के नाम से लाखों का भुगतान किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में होने वाली अनियमित्ताएं ऑनलाइन दिख रही है फिर भी जिम्मेदारों को जांच करने की फुर्सत नहीं है। इसलिए सरपंच सचिव सहित मटेरियल सप्लायर जमकर पंचायतों को चूना लगाते हुए शासन का खजाना खाली करने में लगे हुए हैं।सिलवानी। तहसील की विभिन्न पंचायतों में जमकर भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य होने के पहले ही राशि का आहरण की जा रही है और जनपद के जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए है। ग्राम पंचायतों में इन दिनों विभिन्न मदों की राशि से विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं उन विकास कार्यों में जमकर फर्जीवाड़ा चल रहा है। फर्जी फर्म वेडरों के खातों में लाखों की राशि पहुंच रही है। न तो जीएसटी नंबर है और न ही फर्म दुकान फिर भी लाखों और करोड़ों के मटेरियल सप्लायर बन कर पंचायत की राशि ठिकाने लगा रहे है। ग्राम पंचायतों में इस समय जहां बिल बाउचरों को लेकर किस तरह से फर्जी कामों को अंजाम दिया जा रहा है यह देखते ही बनता है। आखिर राशि निकालने को लेकर जहां ट्रेडर्स के माध्यम से यह खेल खेला जाता है, कार्य शुरू करने से पहले राशि निकाल जाती है और 6-6 माह तक निर्माण कार्य आरंभ नहीं होता है। बिना जीएसटी के चल रहा लाखों का कारोबारजनपद पंचायत सिलवानी की पड़रिया खुर्द सहित कई ग्राम पंचायतों में जहां उक्त फर्जी सप्लायर कई पंचायतों में सरपंच सचिव पर दबाव बनाकर फर्जी तरीके से सामग्री सप्लाई के नाम पर बिल लगाकर सीधे अपने बैंक खाते में राशि ट्रांसफर कराते आ रहे हैं। फर्जी तरीके से लगाए गए अनेक बिलों के अनुसार उन फर्मों का पता लगाया तो बिल में फर्म बनी हैं धरातल पर नहीं इसलिए खोजने के बाद भी उक्त फर्म का पता नहीं चल पाया। तहसील में लगभग दर्जन भर ऐसी फर्मों के नाम सामने आये हैं जो बिलों में चल रही है धरातल पर उन फर्मों का कोई अस्तित्व नहीं है। लाखों के बिल लगाकर शासन की राशि निकालकर मिल बांट के खा रहे हैं। बिना किसी डर भय के फर्जी वेंडरों के खातों में राशि ट्रांसफर कर राशि निपटा रहे हैं।कहां है पंचायतों की मॉनिटरिंग व्यवस्था तहसील में कहने के लिए तो पंचायतों की मॉनिटरिंग की व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जिम्मेदारी के दायित्व दिए गए हैं फिर वास्तविकता में इस तरह के हालात कैसे निर्मित होते है। क्या जिम्मेदार अब अनभिज्ञ बने हुए हैं समूचे तहसील में अगर ट्रेडर्सों के बाउचर जो पंचायतों में लगाए जा रहे हैं इनकी पड़तााल बारीकी से की जाए जो वास्तविकता सामने आ जाऐगी पर आज दिनांक तक किसी भी पंचायत में इस तरह कारोबार को लेकर अधिकारियों द्वारा कार्यवाही ही नहीं की गई या की जाती है तो मीडिया के समक्ष यह बात क्यों नहीं लाई जाती आखिरकार यहां यह कहें कि भ्रष्टाचार के खेल में क्या अधिकारी भी शामिल हो रहे है तभी तो इस तरह की स्थितियां समूचे तहसील में कायम होती जा रही है। निर्माण कार्य आरंभ होने के पहले राशि निकाल जाती है फिर कार्य आरंभ नहीं होते। निश्चित तौर पर राशि निकालने में जहां जिम्मेदारी तो उपयंत्री की भी तय होती है कि अगर राशि निकाली गई तो फिर कार्य क्यों नहीं आरंभ हो रहा।पड़रिया खुर्द में लाखों की हेराफेरी ग्राम पंचायत पड़रिया खुर्द में हरिहर दादाजी धूनी वाले बिल्डिंग मटेरियल सप्लायार एंड कंट्रक्शन उदयपुरा रोड सिलवानी के नाम से लाखों रुपये के बिल लगाए गए है। जिसमें न दुकानदार के हस्ताक्षर है और न ही सरपंच सचिव के है। इसके साथ ही शिवा इंटरप्राजेस के नाम पर बिल नंबर 364, 365, 363 में लाखों का भुगतान किया गया है। जिसकी न कोई दुकान है न उसका अता पता, बताया जाता है कि यह फर्म फर्जी तरीके से चलाई जा रही है। सरपंच सचिव द्वारा उक्त फर्म संचालक के खाते में राशि डलवाकर नगद राशि वापिस ली जा रही क्योंकि उक्त दुकान मौके पर संचालित ही नहीं है।इस संबंध में नीलम रायकवार जनपद सीईओ सिलवानी का कहना है कि पोर्टल पर फर्जी बिलों के मामले में जांच चल रही है जांच उपरांत दोषी पाए जाने पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेकर संबंधित के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जायेगी



