टोला पंचायत में लगा गंदगी का अंबार, सफ़ाई के नाम पर लग रहे फर्जी बिल,

राशि निकल रही, लेकिन ज़मीनी हकीकत में नदारद हैं विकास कार्य
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान | ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टोला में इन दिनों अव्यवस्था, गंदगी और कथित भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव की गलियों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक फैली गंदगी जहां प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है, वहीं सफ़ाई और विकास कार्यों के नाम पर लगाए जा रहे फर्जी बिलों के आरोपों ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं । ग्रामीणों का कहना है कि कागज़ों में तो हर महीने लाखों रुपये के कार्य पूरे दिखा दिए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो सफ़ाई दिखाई देती है और न ही कोई ठोस विकास कार्य ।
*कागज़ों में चमकता विकास, ज़मीन पर पसरी गंदगी*
ग्राम पंचायत टोला में प्रवेश करते ही सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर, नालियों में जमी गंदगी और जगह-जगह फैला बदबूदार कूड़ा पंचायत के दावों को आईना दिखाता है। पंचायत रिकॉर्ड में सफ़ाई कार्य नियमित दर्शाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार हकीकत इससे कोसों दूर है। गांव के मुख्य रास्ते, स्कूल के आसपास का क्षेत्र सार्वजनिक हैंडपंपों के समीप गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे आए दिन बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार पंचायत में शिकायतें की गईं, लेकिन या तो उन्हें टाल दिया गया या फिर औपचारिक आश्वासन देकर मामला शांत कर दिया गया ।
*सफ़ाई के नाम पर फर्जी बिलों का आरोप*
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में सफ़ाई, नाली निर्माण, कचरा निस्तारण और अन्य विकास कार्यों के नाम पर लगातार बिल लगाए जा रहे हैं । इन बिलों के माध्यम से शासकीय राशि का आहरण तो हो रहा है, लेकिन संबंधित कार्य धरातल पर दिखाई नहीं देते। पंचायत के कुछ जानकार लोगों का कहना है कि हर महीने अलग-अलग मदों में खर्च दिखाया जाता है कभी सफ़ाई सामग्री, कभी श्रमिक भुगतान, तो कभी मरम्मत कार्य लेकिन इन सबका वास्तविक लाभ गांव को नहीं मिल रहा। सूत्रों के अनुसार, कई बार एक ही कार्य को अलग-अलग मदों में दिखाकर भुगतान निकाल लिया जाता है। उदाहरण के तौर पर, एक नाली की सफ़ाई को कभी श्रमिक मद में, कभी विशेष अभियान के तहत और कभी अन्य योजना के अंतर्गत दिखाकर खर्च दर्शाया गया । इस तरह के मामलों ने फर्जी बिलिंग की आशंका को और गहरा कर दिया है।
*ग्रामीणों की नाराज़गी, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा*
गांव में फैली गंदगी का सबसे बड़ा असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है। खुले में जमा कचरा और गंदा पानी मच्छरों और कीड़ों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया, दस्त और त्वचा रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब नालियां उफान पर आ जाती हैं और गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है।



