
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 29 मार्च 2026_
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 *रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें। *इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
*रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें । *रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी
🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127
🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – रविवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 07:46 AM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र आश्लेषा 02:37 PM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्लेषा नक्षत्र के मुख्य देवता नाग (सर्प) या नाग देवता हैं। अश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं।
⚜️ योग – धृति योग 06:19 PM तक, उसके बाद शूल योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि 07:46 AM तक
✨ द्वितीय करण : बव 07:25 PM तक, बाद बालव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 4:51 बजे से 6:17 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:05:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:17:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:42 ए एम से 05:28 ए एम प्रातः सन्ध्या 05:05 ए एम से 06:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:01 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:36 पी एम से 06:59 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:37 पी एम से 07:47 पी एम
💧 अमृत काल : दोपहर 01:02 पी एम से 02:38 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:02 ए एम, मार्च 30 से 12:49 ए एम, मार्च 30
🚓 यात्रा शकुन- रविवार को इलायची खाकर यात्रा प्रारम्भ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में पिताम्बर चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – वामन द्वादशी/ कामदा एकादशी (सर्वे स्मार्त)/ भद्रा/ गण्ड मूल/ राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री हरी देव जोशी स्मृति दिवस, दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘रामायण’ में सुग्रीव की भूमिका निभाने वाले कलाकार श्याम सुंदर कलानी स्मृति दिवस, प्रसिद्ध साहित्यकार सियारामशरण गुप्त स्मृति दिवस, आर्य समाज स्थापना दिवस, भारतीय इतिहासकार शंकर नारायण जोशी स्मृति दिवस, भारतीय उद्योगपति करमचंद थापर पुण्य तिथि, राष्ट्रीय वियतनाम युद्ध वयोवृद्ध दिवस, भारतीय क्रिकेटर आशीष नेहरा जन्म दिवस, राष्ट्रीय नेवादा दिवस, विश्व पियानो दिवस ✍🏼 *तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🏘️ Vastu tips 🏚️
कांटेदार पौधे उदाहरण: कैक्टस या अन्य नुकीले कांटे वाले पौधे तर्क: माना जाता है कि ये घर में तनाव, कलह और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं। अपवाद: गुलाब का पौधा लगाया जा सकता है, लेकिन इसे घर की छत या खुले स्थान पर रखना बेहतर होता है।
*दूध वाले पेड़ उदाहरण: महुआ, बरगद (बड़) या पीपल (अगर दीवार में उग आए)। तर्क: जिन पेड़ों की टहनियां तोड़ने पर सफेद दूध जैसा पदार्थ निकलता है, उन्हें घर की सीमा के अंदर अशुभ माना जाता है। ये धन हानि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। *बोनसाई तर्क: वास्तु के अनुसार, बोनसाई एक “रुका हुआ” पौधा है जिसकी प्राकृतिक वृद्धि को कृत्रिम रूप से रोक दिया जाता है। इसे घर में रखने से निवासियों की प्रगति और करियर में रुकावट आने की संभावना मानी जाती है।
*फल देने वाले भारी पेड़ उदाहरण: पीपल और बरगद तर्क: इनके दर्शन और पूजा का महत्व बहुत अधिक है, लेकिन इनकी जड़ें बहुत गहराई तक और दूर तक फैलती हैं, जो घर की नींव को नुकसान पहुँचा सकती हैं। इसलिए इन्हें मंदिर या सार्वजनिक स्थानों पर लगाना ही श्रेष्ठ है। *इमली का पेड तर्क: पुरानी मान्यताओं के अनुसार, इमली के पेड़ में नकारात्मक शक्तियों का वास माना जाता है। वास्तु की दृष्टि से यह घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
*सूखे या मुरझाए हुए पौधे तर्क: घर में कभी भी सूखे हुए पौधे नहीं रखने चाहिए। यह ‘मृत ऊर्जा’ का प्रतीक हैं और घर की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। जैसे ही कोई पौधा सूख जाए, उसे तुरंत हटा देना चाहिए। 🔰 *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ *प्रतिदिन रात को सोते वक़्त नाक में 2-2 बूँद गाय के देशी घी डालना हमें बहुत सारे लाभ देता है। देशी घी को लेट कर नाक में डाले और हल्का सा खिंच ले। और पाच मिनट लेते रहे इसे प्रतिमर्श नस्य कहा जाता है। आज आपको रात को सोते वक़्त नाक में देशी घी की सिर्फ़ 2 बूँदे डालने के अचूक फ़ायदो के बारे में बताएँगे: –
*हार्ट अटैक जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, ह्रदय मज़बूत होता है। *सोरायसिस और त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक सोरायसिस गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सोरायसिस के लिए भी कारगर है।
*बाल झडना गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है। *आँखों की ज्योति बढ़ती है आँखों की ज्योति एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
*कोमा से जगाए कोमा गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लौट आती है। हथेली और पांव के तलवो में जलन
*हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा। 🍋🟩 *आरोग्य संजीवनी* 🍈 नागबला, भारत में सभी जगह पाया जानेवाला बहुवर्षायु औषधी पौधा है। इस के जड़ों का आयुर्वेद में अनेक रोगों की चिकित्सा के लिए प्रयोग किया जाता है। *आयुर्वेद के अनुसार यह उत्तम रसायन, पुष्टिदायक और बल वर्धक है। इस की जड़े और पत्तियों का चिकित्सा में इस्तेमाल होता है।
*इस में कफ निःसारक, वात और पित्त शामक, मूत्रल और बुखारनाशक गुण होते है। *इसकी जड़ की छाल का चूर्ण 5-10 ग्राम ले कर दूध में पीसकर या घी और शहद के साथ सेवन करने पर रसायन गुण देता है।
*हृदय रोग, खांसी, श्वास, कुष्ठ, दाह और व्रण में भी इसका उपयोग किया जाता है। *क्षय (टीबी – में नागबला की जड़ का चूर्ण शहद और घी के साथ मिलाकर रोज सुबह खाए।
*अपने एंटी बैक्टीरियल और मूत्रल गुणों के कारण यह मूत्रमार्ग इंफेक्शन में प्रभावी है। 📖 गुरु भक्ति योग 📖
🕉️कर्म करने के बाद ही भाग्य का सही परिणाम मिलता है🕉️
*⭕महाराज भृर्तहरि के अनुसार मनुष्य के भाग्य में जितना धन पाना लिखा है, वह उसे रेगिस्तान में भी प्राप्त हो जायेगा, उससे अधिक सोने के पहाड़ पर भी प्राप्त नहीं होगा, अतः व्यक्ति को धैर्य रखना चाहिये। घड़े में उतना ही पानी समाएगा, जितने की उसकी क्षमता है, चाहे उसे किसी भी कुएं से भरा जाये अथवा समुद्र से।
*प्राचीन नीति शास्त्र और ग्रंथों में भाग्य का महत्व स्वीकार किया गया है, लेकिन यह भी बताया गया है कि भाग्य के साथ-साथ कर्म यानि प्रयास और पुरुषार्थ का भी बड़ा महत्व है। पंचतंत्र की इस एक कथा का सार भाग्य और पुरुषार्थ के रहस्य को बताता है, कथा अनुसार एक अज्ञानी व्यक्ति सोचता है कि वह बिना मेहनत किए राजा के समान जी सकता है, लेकिन उसे यह बाद में पता चलता है कि बिना कर्म के सिर्फ भाग्य पर भरोसा करने से कुछ नहीं होता।
*इसलिए नीति शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य का भविष्य उसके हाथ में ही होता है और यदि वह सही दिशा में प्रयास करें तो वह अपने भाग्य को बदल सकता है। भाग्य और पुरुषार्थ के संतुलन को महत्वपूर्ण माना गया है। भाग्य व्यक्ति के जीवन का एक हिस्सा है लेकिन सही समय पर सही कर्म और बुद्धिमानी से निर्णय लेना भी आवश्यक है। मनुस्मृति के अनुसार अगर व्यक्ति निष्क्रिय होकर सिर्फ भाग्य का इंतजार करता है, तो वह असफल हो सकता है। *कर्म करने के बाद ही भाग्य का सही परिणाम मिलता है। भाग्य से प्राप्त होने वाली परिस्थितियां हमारे वश में नहीं होती, लेकिन उन पर प्रतिक्रिया कैसे देनी है, यह हमारे हाथ में होता है। अर्जुन का उदाहरण इस बात को स्पष्ट करता है, कि भाग्य महत्वपूर्ण है, लेकिन बिना पुरुषार्थ के सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। महाभारत के अनुसार पुरुषार्थी, भाग्य के अनुसार प्रतिष्ठा पाता है, पर अकर्मण्य असह्य दुःख भोगता है। भाग्य परिस्थितियों को निर्धारित कर सकता है, लेकिन व्यक्ति के कर्म ही उसके परिणाम को प्रभावित करते हैं। भाग्य और कर्म दोनों साथ-साथ चलते हैं, लेकिन कर्म करने वाला ही भाग्य के साथ सफल होता है।
*🛑पंचतंत्र के अनुसार मनुष्य को जिस वस्तु की प्राप्ति होनी है, वह अवश्य होगी, उसमें भाग्य भी बाधा नहीं डाल सकता। जो हमारा है, वह किसी अन्य का नहीं हो सकता। कर्म और भाग्य रहस्य को समझना अत्यन्त कठिन है, इसलिए बस ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से सही दिशा जानकर कर्म करते रहें, परिणाम खुद चलकर आपके पास आएगा
*हरे कृष्ण 🙏*
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⚜️ *एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।। *यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।


