मध्य प्रदेश

मूलभूत सुविधाओं से वंचित आदिवासी बाहुल्य सुआगढ़ गांव

ब्यूरो चीफ : संजय द्विवेदी
गैरतगंज । आजादी के वर्षों बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित जिले के विकासखंड गैरतगंज का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र सुआगढ़। ग्राम का तीन से चार किमी का मार्ग यहां आदिवासियों के लिए मुसीबत बना हुआ है। बारिश के दिनों में लोग यहां वनवास काटने मजबूर हो जाते है। बारिश के अलावा अन्य दिनों में भी आवाजाही करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है, बारिश में तो वाहन तो दूर की बात है, पैदल चलना भी इस मार्ग में दूभर हो जाता है। ग्राम सुआगढ़ में आदिवासी जाति के लोग ही निवास करते है। जहां विकास के नाम पर लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्राम से दूर जाना पड़ता है। यहां सड़क, पानी समेत अन्य सुविधाओं से यहां के लोग कोसो दूर है।
जानकारी अनुसार जनपद पंचायत गैरतगंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत सर्रा के ग्राम सुआगढ़ में लगभग 40 से 50आदिवासी परिवार निवास करते है। इन परिवारों में इनकी संख्या करीब 250 से 300 है। सरकार आदिवासियों के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। बावजूद इसके ये आदिवासी ग्रामीण आज भी डिजिटल इंडिया का सपना देख रहे है लेकिन आज भी जिले के कुछ एक गांव ऐसे है, जहां मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई है। सुआगढ़ में मुख्य मार्ग से गांव तक का मार्ग कच्चा है। यहां गांव तक जाने के लिए ग्रिवेल सड़क सूखे दिनों में ठीक रहती है। लेकिन बारिश के दिनों में पैदल चलने लायक भी नहीं है।
“मरीज को ले जाने में परेशानी”
ग्रामीणों ने बताया कि 40 आदिवासी परिवारों के ग्राम के लोगों को सुविधाएं तो दूर की बात है। यहां किसी ग्रामीण को परेशानी हो या कोई गंभीर बीमार हो जाए तो उसे ले जाने के लिए गांव तक बारिश के दिनों में एम्बुलेंस समेत अन्य कोई चौपहिया वाहन यहां नहीं पहुंच पाता है। इस बारिश के दिनों में यहां ना तो स्वास्थ्य विभाग का अमला आता है और ना यहां के लोगों को हाल जानने कोई नेता आता है। चुनाव के समय विधायक प्रत्याशी आते है और चुनावी वादे करके जाते हे लेकिन फिर लौट के नहीं देखते हैं। बीमार लोगों के लिए जड़ी-बूटी ही एक मात्र सहारा है। यदि कोई गंभीर अवस्था में है तो उसे ले जाने के लिए लोगों को अपने स्वयं के साधन या मरीज को खाट, कंधे या अन्य साधन से ले जाना पड़ता है। जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने बताया कि मार्ग में इतना कीचड़ हो जाता है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। यहां एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती है। गैरतगंज मुख्यालय से यह गांव करीब 18 से 20 किमी की दूरी पर है। जिसमें ग्राम सर्रा तक तो डामर मार्ग है लेकिन यहां ग्राम सुआगढ़ तक 5 किमी तक कच्ची सड़क है, जो बारिश के दिनों में दलदल में तब्दील हो जाती है।
“पेयजल की समस्या भी”
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम में सड़क के अलावा पेयजल की समस्या भी एक बड़ी समस्या है। क्षेत्र में पीने के पानी के साधन पर्याप्त नहीं है। यहां दो हैंडपंप है जो गर्मियों में सूख जाते है।
ग्रामीणों को पेयजल के लिए अन्य स्थान से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
क्षेत्र में लगे दो हैंडपप में से एक हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं है। एक हैंडपंप से लाल पानी निकलता है। जिसके कारण ग्रामीण इस हैंडपंप का पानी पीने में कतराते है। ग्रामीणों द्वारा इन मूलभूत समस्याओं के निराकरण के लिए 181 में भी शिकायत कर चुके है, लेकिन समस्या का समाधान आज दिनांक तक नहीं किया जा सका है। शासन की सारी योजनाओं का क्रियान्वयन सिर्फ हरिजन बाहुल्य ग्राम सर्रा में देखने मिलता है लेकिन आदिवासी बाहुल्य ग्राम सुआग्रह में किसी भी सरकारी योजना का क्रियान्वयन नहीं दिखता, ग्रामवासियों का कहना है कि क्षेत्र में कोई ऐसा सामाजिक नेता नहीं है जो हमारी समस्या को शासन के समक्ष रखे जिससे हमें शासन की जन हितैषी योजनाओं का लाभ मिल सके, कुछ ग्रामीणों ने बताया के शासन की अनदेखी के कारण आदिवासी समाज के लोग ग्राम से पलायन करने को मजबूर है धीरे धीरे गांव वीरान होता जा रहा है।
पानी जैसी मूलभूत सुविधा न मिलने से हमारे गांव के बच्चों के शादी में भी समस्या होती है अब कोई भी अपनी बेटी की शादी हमारे गांव में नहीं करना चाहता, कई बार विधायक और कलेक्टर साहब को आवेदन निवेदन कर चुके है पर इस ओर ध्यान कोई भी नहीं देता है, सिर्फ आश्वासन ही दिया जाता है।

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