शाखा समाज में परिवर्तन का केन्द्र बने, और स्वयंसेवक वाहक बने : चेतन चतुर्वेदी

संघ का शताब्दी वर्षः नगर में निकला ऐतिहासिक पथ संचलन
समाज में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए निकलता है पथ संचलन
सिलवानी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संघ शताब्दी वर्ष होने पर मंगलवार को विशाल पथ संचलन निकाला गया।
इस वर्ष पथ संचलन ऐतिहासिक रहा और सैकड़ो की संख्या में स्वयंसेवक ऊर्जा और उत्साह के साथ इस पथ संचलन में शामिल हुए। नगर में लगभग 500 मीटर की लंबी स्वयंसेवकों की कतार रही। जो घोष दल के साथ अनुशासित रूप से कदमताल करते हुए गुजरे। इस पथ संचलन ने लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय की। मार्ग में कई स्थानों पर पुष्प वर्षा करते हुए स्वयं सेवकों का स्वागत किया।
न्यू सिविल हॉस्पिटल बरेली रोड स्थित प्रांगण में उपस्थित गणवेशधारी स्वयं सेवकों ने ध्वज प्रणाम कर ध्वज वंदना की।
मुख्य वक्ता चेतन चतुर्वेदी प्रचारक ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ की 100 वर्ष की उपलब्धि है कि समाज का नेतृत्व करने वाला प्रत्येक व्यक्ति संघ से आशा करता है और संघ के विचार का समर्थन करता है। संघ के शून्य से शतक तक की यात्रा का उल्लेख किया। विजयादशमी का पर्व अधर्म से धर्म की जीत, राम चरित्र की विजय का प्रतीक है। शस्त्र पूजन की परम्परा दशहरा पर सदियों से चली आ रही है। देवी देवताओं के एक हाथ में एक शस्त्र रखते है। शास्त्रों की स्थापना के लिए शस्त्र की आवश्यकता पड़ती है। विजय प्राप्त करने की शक्ति वाले के मुख से ही संधि अच्छी लगती है। राष्ट्र भौगोलिक नहीं हमारी संस्कृति का प्रतीक है। सनातन संस्कृति प्राचीन से निवासरत है। भारत की संस्कृति सदैव विश्व का मार्गदर्शन करने वाली रही हैं।
विश्व में आज योग का डंका बज रहा है। यह भारत की देन है।भारत की संस्कृति विश्व को दिशा देता है। वैज्ञानिक ने ओम की ध्वनि को मान रही है। विज्ञान जो अब कह रही है। वह भारतीय संस्कृति में पूर्व से विद्यमान है। वैभवशाली भारत की संस्कृति के हम संवाहक है। हिन्दू समाज में अनुशासन की कमी आने लगी। जब जब समाज का विघटन होता है तब तब महापुरुष का अवतरण होता है। हिन्दू समाज का संगठित करने के लिए केशव बलिराम हेगडेवार ने संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में की थी। संघ की साधना और समर्पण के 100 वर्ष इस विजयादशमी को पूर्ण हुए है। इस दौरान संघ ने उपेक्षा भी झेली है। संघ पर तीन बार प्रतिबंध भी लगाया गया। संघ की पांच पीढ़ी हो गई, संघ की पहली पीढ़ी ने बीजारोपण किया। दूसरी पीढ़ी ने राष्ट्र व्यापी बनाया। अब पांचवी पीढ़ी को सर्व व्यापी बनाना है। शाखा समाज में परिवर्तन का केन्द्र बने, और स्वयं सेवक वाहक बने। यह जिम्मेदारी हम सबकी की है। संघ पंच परिवर्तन की बात करता है । समरसता, कुटुंब व्यवस्था, पर्यावरण, स्वदेशी स्व जागरण,
नारी शिष्टाचार, इस अब पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
बौद्धिक कार्यक्रम उपरांत पथ संचलन का शुभारंभ हुआ, जो कि न्यू सिविल हॉस्पिटल बरेली रोड, महावीर कॉलोनी बजरंग चौराहा, कुशवाहा धर्मशाला से गांधी चबूतरा, शिवाजी नगर, तहसील प्रांगण बस स्टेंड, से होते हुए न्यू सिविल हॉस्पिटल में सम्पन्न हुआ।



