मध्य प्रदेश

स्वास्थ्य मंत्री, पीएचई के अधिकारियों पर भारी बाँसखेड़ा के महिला सरपंच का देवर

नायब तहसीलदार नियति साहू पटवारी की मनमानी ने नल जल योजना का स्टार्टर, पानी की टँकी हटवाकर सरपंच ने खुद के हैंडओवर लिया
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। सांची विकासखण्ड की ग्राम पंचायत बाँसखेड़ा की महिला सरपंच उसके देवर व कांग्रेस नेता अरशद बेग स्वास्थ्य मंत्री और पीएचई अधिकारियों पर भारी पड़ गया है। सरपंच आयशा बेग के देवर अरशद बेग ने नल जल योजना पर कब्जा जमाने के लिए झूठी शिकायत कलेक्टर एसडीएम, पीएचई ई ई श्वेता औचट रायसेन को करके
मंगलवार को दोपहर नायब तहसीलदार सांची नियति साहू, बाँसखेड़ा पटवारी को बाँसखेड़ा बुलवाकर विधायक निधि से संचालित हरिजन मोहल्ला की नल जल योजना के पाइप मोटर टँकी स्टार्टर उठाकर खुद के कब्जे में कर लिया गया। जबकि हरिजन मोहल्ला बाँसखेड़ा के ग्रामीणजनों, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बताया कि इस नल जल योजना को विधायक निधि से लगभग 2 साल पहले स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी, शमशाबाद की भाजपा विधायक राजश्री रुद्र प्रताप सिंह द्वारा भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा महामंत्री वाहिद खान के बाड़े की जगह में बोर उत्खनन के बाद स्टार्टर व पानी की टँकी रखकर नल जल योजना को शुरू किया था। यहां से हरिजन बस्ती के गरीब मजदूर परिवारों सहित मुस्लिम समाज के लोगों को भरपूर पीने का पानी मिल रहा था। लेकिन महिला सरपंच बाँसखेड़ा और देवर अरशद बेग को यह मामला रास नहीं आ रहा था।नल जल योजना को हथियाने की साजिश के तहत शिकायतें जनपद पंचायत सीईओ साँची प्रदीप छलोतरे सहित नायब तहसीलदार नियति साहू को लगातार शिकवा शिकायतें की जाती रही। जबकि सारे मामले की सच्चाई तो यह है कि पिछले विस उपचुनाव में भाजपा की ओर से स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी प्रत्याशी बनाए गए।उन्हें भारी मतों 1 लाख 63 हजार 809 मतों से ऐतिहासिक जीत मिली थी। जबकि पहले के चुनावों में भाजपा उम्मीदवार को 5 से 8 वोट बमुश्किल मिला करते थे। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी को एक तरफा सैकड़ों वोट मिला करते थे। लेकिन उप चुनाव में बाँसखेड़ा के समाजसेवी व भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के महामंत्री वहीद खान की टीम ने भरपूर मेहनत के दम पर भाजपा उम्मीदवार व स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने यहां से 330 वोट से जीत दर्ज की थी। ताज्जुब की बात तो यह है कि भाजपा की प्रदेश में सरकार होने स्वास्थ्य मंत्री के सांची सीट से नेतृत्व होने के बावजूद भाजपा नेता खुद को छलावा महसूस कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा की आगामी विस चुनाव जीत की डगर अब आसान नहीं रहेगी।

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