नवनिर्मित सामुदायिक भवन में दिखने लगीं भ्रष्टाचार की दरारें, ग्राम पंचायत हरदी का मामला
सरपंच पति खुद बने पंचायत निर्माण कार्यों के ठेकेदार
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत हरदी में एक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है जहां पर नियमों और गुणवत्ता को ताक पर रखकर सामुदायिक भवन बनाया गया है। गुणवत्ता की पोल उस समय खुल गई जब नवनिर्मित भवन में जगह-जगह दरारे दिखने लगी । भवन की स्थिति को देखकर यह लगता ही नहीं है कि इसका निर्माण कुछ वर्ष पूर्व किया गया होगा।
सूत्रों ने बताया कि उक्त सामुदायिक भवन का निर्माण पंचायत द्वारा करवाया गया था जिसका ठेका सरपंच पति मनोज दीक्षित द्वारा लिया गया है। कुछ वर्ष पहले हुये इस सामुदायिक भवन के निर्माण में गुणवत्ता दरकिनार की गई और सरकारी पैसों का बंदरबांट किया गया। लगभग 10 लाख रूपये की लागत से तैयार करवाये गये इस भवन के देखकर यह नहीं लगता कि इस भवन को बनाने में 10 लाख रूपये की राशि खर्च की गई होगी।
सरपंच पति बने ठेकेदार
ग्राम पंचायत हरदी की मजेदार बात यह है कि ग्राम पंचायत के द्वारा जो भी निर्माण कार्य करवाये जाते है उसका ठेका सरपंच पति मनोज दीक्षित द्वारा लिया जाता है और उन्हीें के द्वारा कार्य करवाया जाता है जबकि यह नियम विरूद्ध है और पंचायत राज अधिनियम 1959 का घोर उल्लघंन है। पंचायत राज अधियिम की धारा में यह प्रावधान निहित किया गया है कि यदि घर का कोई भी सदस्य सरपंच है तब ऐसी स्थिति में घर का कोई सदस्य पंचायत के अंतर्गत करवाये जा रहे निर्माण कार्य का ठेका नहीं ले सकता है।
सचिव को मतलब नहीं
हरदी ग्राम पंचायत में पदस्थ सचिव मनोज पोर्ते को पंचायत द्वारा करवाये जा रहे निर्माण कार्यों से कोई लेना देना नहीं है। सचिव साहब का जब मन हुआ तब उनका आगमन हरदी ग्राम पंचायत में हो जाता है और अधिकांश समय पंचायत में ताला लगा रहता है। सवाल यह उठता है कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद सचिव द्वारा इस तरह से गैर जिम्मेदाराना काम क्यों किया जा रहा है या फिर दंबगई के आगे वह नतमस्क हैं। कई-कई दिनों तक सचिव द्वारा पंचायत में आमद दर्ज नहीं करवाई जाती है और ग्रामीण अपने काम के लिये इधर से उधर भटकते रहते है।




