मध्य प्रदेश

पहले दो नजराना तभी होता है काम, प्राईवेट व्यक्ति के हाथों में सरकारी ऑफिस की कमान

एसडीएम ऑफिस ढीमरखेड़ा में चरम पर भ्रष्टाचार
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान ।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेड़ा में वर्तमान समय में भ्रष्टाचार चरम सीमा में है और तथाकथित प्राईवेट व्यक्ति यहां पर बैठकर खुलेआम आम जनता को लूट रहे है और तो और यह सब एसडीएम ढीमरखेडा नदीमा शीरी के संरक्षण में चल रहा है।
स्मरण रहे कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ढीमरखेडा में कई वर्षों से लिपिक का काम कर रहे ब्रजेश जायसवाल निवासी सिहोरा के द्वारा एसडीएम ऑफिस में बैठकर सरकारी कामकाज किया जाता है, जबकि ब्रजेश जायसवाल न तो सरकारी कर्मचारी है और न ही शासन के द्वारा उसे यहां पर नियुक्त किया गया है इसके बावजूद कई वर्षों से वह एसडीएम ऑफिस ढीमरखेड़ा में अवैध रुप से काम करके आम जनता से खुलेआम रिश्वत मांगता है।
सूत्रों ने बताया कि ब्रजेश जायसवाल पर विभागीय अधिकारी की ही कृपा बनी हुई है और उसके द्वारा जो रिश्वत का पैसा लिया जाता है तो उसमें साहबों का भी कमीशन होता है जिस कारण से आज तक किसी एसडीएम के द्वारा इस संबंध में कोई पूछताछ नहीं की गई है कि आखिर जब ब्रजेश जायसवाल सरकारी कर्मचारी नहीं है तो वह किस हैसियत से एसडीएम का लिपिक बताकर शासकीय कामों का संपादन कर रहा है और किस आदेश के तहत वह यहां पर काम कर रहा है। वर्तमान एसडीएम नदीमा शीरी की भी कृपा ब्रजेश जायसवाल पर बनी हुई है और इनके द्वारा भी इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत नहीं कराया गया जो संदेह के घेरे में प्रतीत हो रहा है क्योंकि एक प्राईवेट व्यक्ति किसी सरकारी ऑफिस में सरकारी कार्य नहीं कर सकता है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ऐसी क्या मजबूरी है कि वे यह बात जानते है कि संबंधति व्यक्ति प्राईवेट है और उसे शासन द्वारा नियुक्त नहीं किया गया इसके बाद भी वे उनको यहां से हटा नहीं पा रहे है। लिहाजा स्पष्ट है कि रिश्वत की राशि इन अधिकारियों तक भी पहुंच रही है और अपनी मौन स्वीकृति इनके द्वारा दी गई है।
रिश्वत के लिये रखे गये हैं प्राईवेट व्यक्ति
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन प्राईवेट कर्मचारियों को इसलिये रखा गया है कि रिश्वत का लेने-देन इन्हीें के द्वारा किया जाये और कभी यदि किसी तरह की कार्यवाही या लोकायुक्त का छापा पडे तो उसकी जांच की आंच तथाकथित अधिकारियों तक न पहुंचे और ये सफेदपोश अधिकारी बचे रहे। सूत्रों ने यह भी बताया कि जो भी रिश्वत मिलती है उसमें एक निश्चित कमीशन इन प्राईवेट कर्मचारियों का होता है इससे स्पष्ट है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा स्वयं भ्रष्टाचार को बढावा देने के से इस तरह के तथाकथित कर्मचारियों को रखा गया है।
इस संबंध में प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर कटनी का कहना है कि सरकारी ऑफिस में प्राईवेट व्यक्ति काम नहीं कर सकता। ऐसा किसी ऑफिस में हो रहा है तो वह गंभीर है। इस मामले में संबंधित अधिकारी से जानकारी ली जायेगी।
विजय राघवेन्द्र सिंह विधायक बड़वारा का कहना है कि अधिकांश ऑफिसों में अधिकारियों द्वारा प्राईवेट व्यक्तियों को रखे जाने की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही है। इस संबंध में कलेक्टर कटनी को पत्र प्रेषित कर अवैध रूप से काम कर रहे है कर्मचारियों को तत्काल सरकारी ऑफिसों से हटवाया जायेगा।
पदमेश गौतम सांसद प्रतिनिधि का कहना है कि कुछ समय पहले भी इस तरह की शिकायत ग्रामीणों द्वारा प्राप्त हुई थी। कलेक्टर को इस संबंध में पत्र लिखा जायेगा।

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