
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 02 जनवरी 2026
02 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। आज व्रत की पूर्णिमा है। आज चन्द्रदर्शन के बाद ही पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाएगा। आज णमोकार 35 व्रत 14 उपवास जैन लोगों का है। आज रवियोग और स्थायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को आचार्य श्री गोपी राम की और से “व्रत के पूर्णिमा” की हार्दिक शुभकामनायें।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
*शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । *शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
*शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल* 🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352_
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌦️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार पौष माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 06:53 PM तक उपरांत पूर्णिमा
🖍️ तिथि स्वामी :- चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है । चतुर्दशी को चौदस भी कहते हैं। चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 08:04 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र के देवता सोम (चंद्रमा) हैं। इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल है, जबकि इसके देवता सोम, मन और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं।
⚜️ योग – शुक्ल योग 01:06 PM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
⚡ प्रथम करण गर 08:38 ए एम तक, बाद वणिज 06:53 पी एम तक,
✨ द्वितीय करण: विष्टि 05:11 ए एम तक, बाद बव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:52:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त – 05:25 एएम से 06:20 एएम
🌟 अभिजीत मुहूर्त – 12:04 पीएम से 12:46 पीएम
💧 अमृत काल – 12:16 पीएम से 01:41 पीएम
✡️ विजय मुहूर्त – 02:09 पीएम से 02:50 पीएम
🐃 गोधूलि मुहूर्त – 05:33 पीएम से 06:01 पीएम
🗣️ निशिता मुहूर्त – 11:58 पीएम से 12:53 एएम, जनवरी 03
🌌 संध्या मुहूर्त – 05:36 पीएम से 06:58 पीएम
🌏 भद्रा- 06:53 पीएम से 05:11 एएम, जनवरी 03
❄️ रवि योग- 07:14 एएम से 08:04 पीएम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/ रवि योग/ आडल योग/ राष्ट्रीय विज्ञान कथा दिवस, मन्नट्टू पद्मनाभन जयन्ती, जैनेंद्र कुमार जन्म दिवस, दारा नुसरवानजी खुरोडे जयन्ती, डॉ. राधाबाई पुण्य तिथि, हरेकृष्ण महाताब स्मृति दिवस, सफदर हाशमी पुण्य तिथि, महावीर चक्र’ से सम्मानित मेजर विवेक गुप्ता जयन्ती, प्रसिद्ध मुक्केबाज़ लाखा सिंह जन्म दिवस, राजनीतिज्ञ अश्विनी कुमार चौबे जन्म दिवस, रामदास मोहनदास गांधी जयन्ती, भूतपूर्व मुख्यमंत्री बूटा सिंह स्मृति दिवस, विश्व अंतर्मुखी दिवस, राष्ट्रीय एरिका दिवस, राष्ट्रीय प्रेरणा दिवस, राष्ट्रीय निजी प्रशिक्षक जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय पालतू पशु यात्रा सुरक्षा दिवस
✍🏼 *तिथि विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।। 🗽 *_Vastu tips* 🗼
आचार्य श्री गोपी राम से अनुसार कानों पर लंबे और घने बालों को ‘दीर्घायु’ (लंबी उम्र) का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि ऐसे व्यक्ति स्वस्थ जीवन जीती हैं और उन्हें बड़ी बीमारियां कम ही परेशान करती हैं।
*कान पर बाल वाले व्यक्ति अक्सर स्वभाव से गंभीर और विचारशील होती हैं। इनका झुकाव अध्यात्म, धर्म और दर्शन की ओर अधिक होता है। ये लोग केवल बाहरी दिखावे में विश्वास नहीं करतीं, बल्कि जीवन के गहरे अर्थों को समझने की कोशिश करती हैं। *ऐसे लोग स्वभाव से बहुत ही व्यावहारिक और स्पष्टवादी होती हैं। ये समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाती हैं और लोग इनके सुझावों को महत्व देती हैं। हालांकि, कई बार ये थोड़े अंतर्मुखी (Reserved) भी हो सकती हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं।
*सामुद्रिक शास्त्र व्यक्तित्व को समझने का एक प्राचीन माध्यम है, लेकिन व्यक्ति का वर्तमान और भविष्य उसके कर्मों पर भी निर्भर करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो कई बार हार्मोनल बदलाव के कारण भी कान पर बाल उग आते हैं। ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ आज हम बस एक बटन दबाते हैं और हमें गरमा-गरम पानी मिल जाता है, लेकिन उस समय एक बार नहाने के लिए घंटों की मेहनत और ढेर सारे ईंधन की ज़रूरत होती थी। *आपकी बात बिल्कुल सही है कि हम अक्सर अपनी ‘लक्ज़रीज’ को साधारण मान लेते हैं। आज हमारे पास जो सुविधाएं हैं, वे उस समय के राजा-महाराजाओं के पास भी नहीं थीं।
*आज हम जानते हैं कि बीमारियाँ कीटाणुओं से फैलती हैं, जबकि उस समय लोग इसे ‘बुरी हवा’ या ‘किस्मत’ मानते थे। एंटीबायोटिक्स और साबुन ने हमारी औसत आयु को दोगुना कर दिया है। *कल्पना कीजिए कि पूरे दिन की थकान के बाद भी आप स्नान न कर सकें या साफ़ कपड़े न पहन सकें। स्वच्छता न केवल शरीर को, बल्कि मन को भी सुकून देती है।
*शुद्ध पानी का घर तक पहुंचना मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। 🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
कुष्ठ रोग में हल्दी के फायदे हल्दी के प्रयोग से कुष्ठ रोग के प्रभाव को भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए 1-2 ग्राम हल्दी चूर्ण में गोमूत्र मिलाकर पिएं। इसके अलावा हरिद्राचूर्ण में बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर गोमूत्र के साथ सेवन करने से दाद और कुष्ठ रोग में फायदा होता है।
*दाद खुजली में हल्दी के फायदे अगर आपकी त्वचा पर कहीं दाद खुजली हो गयी है तो हल्दी के इस्तेमाल से आप इन समस्याओं को जल्दी ठीक कर सकते हैं। इसके लिए खुजली सूजन से आराम दिलाती है हल्दी शरीर के किसी हिस्से में अगर सूजन हो रही है तो हल्दी के उपयोग से आप सूजन कम कर सकते हैं। इसके लिए हल्दी, पिप्पली, पाठा, छोटी कटेरी, चित्रकमूल, सोंठ, पिप्पली, जीरा और मोथा को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इसे कपड़े से छान कर अलग रख लें। इस चूर्ण का 2-2 ग्राम की मात्रा गुनगुने जल के साथ मिलाकर खाने से सूजन में कमी आती है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
विष्णु के अश्वमुखी रूप की कथा :- प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच कई बार भयंकर युद्ध हुए, जिन्हें देवासुर संग्राम कहा जाता है। इन युद्धों में अधिकतर हानि असुरों की होती थी, फिर भी उनकी संख्या अधिक होने के कारण युद्ध कई हजार वर्षों तक चलते। एक बार ऐसा ही देवासुर संग्राम पांच हजार वर्षों तक चला। इस युद्ध में विष्णु स्वयं देवताओं की ओर से युद्ध लड़ रहे थे। अंततः देवताओं की विजय हुई, मगर इतने वर्षों तक युद्ध करने के कारण विष्णु अत्यधिक थक गए।
*थके हुए विष्णु एक घने वृक्ष के नीचे विश्राम करने बैठ गए और उनके हाथ में धनुष-बाण था। विष्णु जी बैठे-बैठे सो गए, लेकिन उनके हाथ में धनुष की प्रत्यंचा पर बाण चढ़ा हुआ था। नींद में उनका सिर धनुष के समीप आ गया और अचानक उनके हाथ से बाण छूट गया, जिससे उनका सिर कटकर दूर जा गिरा। यह सिर सीधा देवी लक्ष्मी के पास जाकर गिरा। अपने स्वामी की यह दशा देखकर देवी लक्ष्मी अत्यंत दुःखी हो गईं और रोने लगीं। *उसी समय वहां माता जगदंबा प्रकट हुईं और देवी लक्ष्मी से कहा, “ये सब तुम्हारे ही एक शाप के कारण हुआ है।” तब माता ने लक्ष्मी को स्मरण दिलाया कि एक बार विष्णु मन ही मन किसी कारणवश मुस्कुरा रहे थे, जिसे लक्ष्मी ने गलत समझ लिया और क्रोधित होकर उन्हें सिर कट जाने का शाप दे दिया। अब वह शाप पूरा हुआ है।
*माता जगदंबा ने कहा कि हर घटना के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है। इस समय एक भयंकर अश्वमुखी असुर हयग्रीव ने संसार में आतंक मचा रखा है। उसे वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल एक अश्वमुखी योद्धा ही कर सकता है। उसी समय ब्रह्मा जी और अन्य देवता वहां आ गए। माता जगदंबा के निर्देशानुसार ब्रह्मा जी ने एक घोड़े का सिर काटकर विष्णु के धड़ से जोड़ दिया। *जैसे ही घोड़े का सिर विष्णु के धड़ से जुड़ा, वे पुनः जीवित हो उठे और उनका नया स्वरूप अश्वमुखी हो गया। इस अश्वमुखी रूप में विष्णु ने भयंकर असुर हयग्रीव का अंत कर दिया और संसार को उसके आतंक से मुक्त किया। यही कारण है कि विष्णु का यह रूप हयग्रीव अवतार के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा से ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।

