
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 12 दिसम्बर 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । *शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
🌧️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌦️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार पौष माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 02:57 PM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 05:50 AM तक उपरांत हस्त
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह सूर्य है, और इसके अधिष्ठाता देवता भग (अर्यमन) हैं, जो मित्रता और विवाह के प्रतीक हैं
⚜️ योग – प्रीति योग 11:11 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 02:56 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 03:42 ए एम, दिसम्बर 13 तक गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:42:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:08:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:15 ए एम से 06:10 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:42 ए एम से 07:04 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:36 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:58 पी एम से 02:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:23 पी एम से 05:50 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:25 पी एम से 06:47 पी एम
💧 अमृत काल : 10:04 पी एम से 11:47 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:43 ए एम, दिसम्बर 13
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अन्नपूर्णा जयन्ती/ त्रिपुर भैरवी जयंती/ हनुमान अष्टमी/ राजधानी दिल्ली स्थापना दिवस/ अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज दिवस, ग्वाडालूप की कुंवारी कन्या पर्व, भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह जन्म दिवस, अभिनेता रजनीकांत जन्म दिवस, प्रसिद्ध हिंदी कवि मैथिलीशरण गुप्त स्मृति दिवस, भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान रवि कुमार दहिया जन्म दिवस, वरिष्ठ भारतीय राजनीतिज्ञ शरद पवार जयन्ती, ख्यातिप्राप्त धारावाहिक ‘रामायण’ के निर्माता रामानंद सागर स्मृति दिवस, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे जन्म दिवस, हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह), अंतर्राष्ट्रीय तटस्थता दिवस (International Day of Neutrality), अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर)
✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में शीशा जल तत्व का प्रतीक माना गया है, इसलिए इसे अग्नि और पृथ्वी तत्व वाली जगहों पर लगाने से बचना चाहिए. यही कारण है कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा को छोड़कर उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशा में शीशा लगाना शुभ माना गया है. कई लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि किसी भी दिशा में बने कमरे की उत्तर दीवार पर शीशा लगाने से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, जबकि यह पूरी तरह भ्रम है. दिशा का निर्धारण हमेशा पूरे घर की मुख्य दिशाओं से होता है, न कि किसी एक कमरे की स्थिति से इस आकार का होना चाहिए शीशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, जहां तक शीशे के आकार की बात है, तो चार फुट से छोटा मिरर (लगभग 1–2 फीट) किसी भी दिशा में लगाया जा सकता है. यहां तक कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में भी. ध्यान सिर्फ इतना रखना होता है कि इन दो दिशाओं में ऐसा बड़ा शीशा न हो जिसमें पूरी आकृति साफ दिखाई दे. माना जाता है कि दक्षिण दिशा में लगा बड़ा शीशा कैश फ्लो और धन की स्थिरता में रुकावट पैदा करता है, जबकि दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगा बड़ा मिरर रिश्तों, परिवारिक सामंजस्य और दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ा सकता है.
*शीशा बन सकता है दुर्भाग्य का कारण हर कमरे की उत्तर दिशा में शीशा लगाना जरूरी या शुभ नहीं होता. उत्तर-पूर्व और पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से कोई समस्या नहीं आती, लेकिन दक्षिण दिशा में लगा बड़ा शीशा कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकता है. अगर किसी कारणवश दक्षिण दिशा में बड़ा शीशा हटाया नहीं जा सकता, तो उसके प्रभाव को कम करने के लिए पीले रंग का पेंट करवाना अच्छा उपाय माना जाता है, क्योंकि पीला रंग दक्षिण दिशा के दोष को शांत करता है. *वास्तु के अनुसार, शीशा जल और आकाश तत्व का माना जाता है, इसलिए इसे वहां लगाया जा सकता है जहां ये दोनों तत्व अनुकूल प्रभाव देते हैं. इसी तरह, पलंग के सामने लगा शीशा भी वास्तु दोष नहीं माना जाता. लोग इसे दुर्भाग्य का कारण समझते हैं, जबकि वास्तविक परेशानी तब पैदा होती है जब शीशे में रात के समय रोशनी या चमक प्रतिबिंबित होकर असहजता या बेचैनी पैदा करें अर्थात समस्या मनोवैज्ञानिक होती है, वास्तु संबंधी नहीं.
*यह दिशा बढ़ा सकती है खर्चे साउथ-ईस्ट में लगा बड़ा शीशा धन से जुड़ी परेशानियां, साउथ-वेस्ट में रिश्तों में तनाव और साउथ-साउथ-वेस्ट में अनावश्यक खर्चो को बढ़ा सकता है. इसलिए शीशा तभी लाभ देता है जब इसे सही दिशा और सही आकार के साथ लगाया जाए, अन्यथा अनजाने में घर में ऊर्जा असंतुलन पैदा हो सकता है. ♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️ सर्दियों मे अजवाइन को काम मे लेने के लिए बताया गया है।यह सर्दियों मे होने वाले दर्द को कम करने के लिए बहुत कारगर है। अजवाइन को आप गरमपानी मे एक चम्मच मिलाकर पानी से आपके होने वाले joint pain को गीला करना है। 5 से 10 मिनट के लिए इसको करते रहना है। यह joint मे आने वाली सूजन व Pain को कम करता है।आप इसके बीजो को पीसकर पेस्ट भी बना सकते है। इस पेस्ट को अपने जोड़ो पर लगा ले। जिससे आपको दर्द को दूर करने मे काफी मदद मिलेगी। आप रोजाना आजवाइन का पानी भी पी सकते है। *मेथी के दानों में एस्ट्रोजन भरपूर होता है जिससे स्तनों का आकार बढ़ता है। इसका पेस्ट बनाएं और इसमें सरसो का तेल मिलाएं और फिर इससे धीरे-धीरे अपने स्तनों की मालिश करें।
*सौंफ अपने खाने में सौंफ का पाउडर मिलाएं या इसका पेस्ट बनाकर इसमें जैतून का तेल (ऑलिव ऑयल) मिलाकर स्तनों की मालिश करें। *कई बार पैरों या हाथों पर सूजन आ जाती है. ऐसे में समझ नहीं आता कि क्या करें. नमक के पाने से सिकाए के बाद भी अगर सूजन कम न हो तो नारियल के तेल में कपूर उबाल लें और इसे सूजी हुई जगह पर लगा लें. इससे सूजन कम हो जाती है.
*किसी की भी हेल्थ तब अच्छी होती है, जब तीनों दोष (वात, पित्त और कफ) पाचन अग्नि (पाचन, आत्मसात और मेटाबॉलिज्म) शरीर के सभी ऊतक और घटक (धातु) (संपूर्ण भौतिक शरीर) सभी उत्सर्जन कार्य (यूरिन के शारीरिक कार्य और शौच) एक सुखद स्वभाव और संतुष्ट मन, इंद्रियों और आत्मा के साथ सही क्रम में रहते हैं। 💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
सरसों का साग – सर्दियों में हड्डियों की मजबूती सर्दियों में मिलने वाला सरसों का साग सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि हड्डियों के लिए भी बहुत ताकतवर है। 100 ग्राम सरसों के साग में 200 mg कैल्शियम पाया जाता है। यह बोन डेंसिटी बढ़ाने में मदद करता है और महिलाओं में होने वाले जोड़ों के दर्द को भी कम करता है। मेनोपॉज के बाद महिलाओं को इसे डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
*तिल – छोटी सी चीज, बड़े फायदे तिल को प्राचीन समय से हड्डियों की मजबूती का शानदार स्रोत माना गया है। 1 टेबलस्पून तिल में 80 mg कैल्शियम होता है। रोजाना तिल खाने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं, जोड़ों का दर्द कम होता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी घटता है। इसे हल्का रोस्ट करके खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
*अमरंथ सीड्स (राजगिरा) – नवरात्रि का सुपरफूड राजगिरा न सिर्फ व्रत का खाना है बल्कि महिलाओं के लिए सुपरफूड है। 100 ग्राम अमरंथ सीड्स में 160 mg कैल्शियम मिलता है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम कैल्शियम को हड्डियों में जमा करने में मदद करता है, जिससे वे मजबूत और लचीली बनती हैं। ये उन लोगों के लिए खास तौर पर लाभदायक है जिन्हें हड्डियां कमजोर होने का डर रहता है। *सोयाबीन – प्रोटीन + कैल्शियम की डबल ताकत सोयाबीन महिलाओं के लिए वरदान है क्योंकि इसमें कैल्शियम और प्रोटीन दोनों भरपूर होते हैं। एक कप सोयाबीन में लगभग 175 mg कैल्शियम मिलता है। इसे रातभर भिगोकर सुबह पकाकर खाने से शरीर इसे आसानी से पचा लेता है। यह हड्डियों की कमजोरी दूर करने और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️ शबरी को आश्रम सौंपकर महर्षि मतंग जब देवलोक जाने लगे, तब शबरी भी साथ जाने की जिद करने लगी। शबरी की उम्र दस वर्ष थी। वो महर्षि मतंग का हाथ पकड़ रोने लगी। महर्षि शबरी को रोते देख व्याकुल हो उठे। शबरी को समझाया “पुत्री इस आश्रम में भगवान आएंगे, तुम यहीं प्रतीक्षा करो।” अबोध शबरी इतना अवश्य जानती थी कि गुरु का वाक्य सत्य होकर रहेगा, उसने फिर पूछा- कब आएंगे.?महर्षि मतंग त्रिकालदर्शी थे। वे भूत भविष्य सब जानते थे, वे ब्रह्मर्षि थे। महर्षि शबरी के आगे घुटनों के बल बैठ गए और शबरी को नमन किया। आसपास उपस्थित सभी ऋषिगण असमंजस में डूब गए। ये उलट कैसे हुआ। गुरु यहां शिष्य को नमन करे, ये कैसे हुआ? महर्षि के तेज के आगे कोई बोल न सका। महर्षि मतंग बोले- पुत्री अभी उनका जन्म नहीं हुआ। अभी दशरथ जी का लग्न भी नहीं हुआ। उनका कौशल्या से विवाह होगा।फिर भगवान की लम्बी प्रतीक्षा होगी। फिर दशरथ जी का विवाह सुमित्रा से होगा।फिर प्रतीक्षा.. फिर उनका विवाह कैकई से होगा।फिर प्रतीक्षा.. फिर वो जन्म लेंगे, फिर उनका विवाह माता जानकी से होगा।फिर उन्हें 14 वर्ष वनवास होगा और फिर वनवास के आखिरी वर्ष माता जानकी का हरण होगा। तब उनकी खोज में वे यहां आएंगे।तुम उन्हें कहना आप सुग्रीव से मित्रता कीजिये। उसे आतताई बाली के संताप से मुक्त कीजिये, आपका अभीष्ट सिद्ध होगा। और आप रावण पर अवश्य विजय प्राप्त करेंगे। शबरी एक क्षण किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। अबोध शबरी इतनी लंबी प्रतीक्षा के समय को माप भी नहीं पाई। वह फिर अधीर होकर पूछने लगी- “इतनी लम्बी प्रतीक्षा कैसे पूरी होगी गुरुदेव?” महर्षि मतंग बोले- “वे ईश्वर है, अवश्य ही आएंगे।यह भावी निश्चित है। लेकिन यदि उनकी इच्छा हुई तो काल दर्शन के इस विज्ञान को परे रखकर वे कभी भी आ सकते है। लेकिन आएंगे “अवश्य”…! जन्म मरण से परे उन्हें जब जरूरत हुई तो प्रह्लाद के लिए खम्बे से भी निकल आये थे। इसलिए प्रतीक्षा करना। वे कभी भी आ सकते है। तीनों काल तुम्हारे गुरु के रूप में मुझे याद रखेंगे। शायद यही मेरे तप का फल है।” शबरी गुरु के आदेश को मान वहीं आश्रम में रुक गई। उसे हर दिन प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा रहती थी।वह जानती थी समय का चक्र उनकी उंगली पर नाचता है, वे कभी भी आ सकतें है। हर रोज रास्ते में फूल बिछाती है और हर क्षण प्रतीक्षा करती। कभी भी आ सकतें हैं। हर तरफ फूल बिछाकर हर क्षण प्रतीक्षा। शबरी बूढ़ी हो गई।लेकिन प्रतीक्षा उसी अबोध चित्त से करती रही। और एक दिन उसके बिछाए फूलों पर प्रभु श्रीराम के चरण पड़े। शबरी का कंठ अवरुद्ध हो गया। आंखों से अश्रुओं की धारा फूट पड़ी। गुरु का कथन सत्य हुआ।भगवान उसके घर आ गए। शबरी की प्रतीक्षा का फल ये रहा कि जिन राम को कभी तीनों माताओं ने जूठा नहीं खिलाया, उन्हीं राम ने शबरी का जूठा खाया। ऐसे पतित पावन मर्यादा, पुरुषोत्तम, दीन हितकारी श्री राम जी की जय हो। जय हो। जय हो। एकटक देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद वृद्धा भीलनी के मुंह से स्वर/बोल फूटे- “कहो राम ! शबरी की कुटिया को ढूंढ़ने में अधिक कष्ट तो नहीं हुआ..?” राम मुस्कुराए- “यहां तो आना ही था मां, कष्ट का क्या मोल/मूल्य..?” “जानते हो राम! तुम्हारी प्रतीक्षा तब से कर रही हूँ, जब तुम जन्मे भी नहीं थे, यह भी नहीं जानती थी कि तुम कौन हो ? कैसे दिखते हो ? क्यों आओगे मेरे पास ? बस इतना ज्ञात था कि कोई पुरुषोत्तम आएगा, जो मेरी प्रतीक्षा का अंत करेगा। राम ने कहा- “तभी तो मेरे जन्म के पूर्व ही तय हो चुका था कि राम को शबरी के आश्रम में जाना है।” “एक बात बताऊँ प्रभु ! भक्ति में दो प्रकार की शरणागति होती है। पहली ‘वानरी भाव’ और दूसरी ‘मार्जारी भाव’। ”बन्दर का बच्चा अपनी पूरी शक्ति लगाकर अपनी माँ का पेट पकड़े रहता है, ताकि गिरे न… उसे सबसे अधिक भरोसा माँ पर ही होता है और वह उसे पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। यही भक्ति का भी एक भाव है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर को पूरी शक्ति से पकड़े रहता है। दिन रात उसकी आराधना करता है…!” (वानरी भाव) पर मैंने यह भाव नहीं अपनाया। ”मैं तो उस बिल्ली के बच्चे की भाँति थी, जो अपनी माँ को पकड़ता ही नहीं, बल्कि निश्चिन्त बैठा रहता है कि माँ है न, वह स्वयं ही मेरी रक्षा करेगी, और माँ सचमुच उसे अपने मुँह में टांग कर घूमती है। मैं भी निश्चिन्त थी कि तुम आओगे ही, तुम्हें क्या पकड़ना…।” (मार्जारी भाव) राम मुस्कुराकर रह गए. भक्तवत्सल मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सदा ही जय हो!*
जयति जयति जय पुण्य सनातन संस्कृति,
जयति जयति जय पुण्य भारतभूमि*
मङ्गल कामनाओं के साथ सदासुमङ्गल,* जय जय श्री राम
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⚜️ *अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
*_मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।



