आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 22 जुलाई 2024
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
🌤️ मास – श्रावण मास प्रारंभ
🌔 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 01:11 PM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र श्रवण 10:21 PM तक उपरांत धनिष्ठा
🪐 नक्षत्र स्वामी : श्रवण नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। श्रवण नक्षत्र का देवता भगवान विष्णु को माना गया है।
⚜️ योग – प्रीति योग 05:58 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग
⚡ प्रथम करण : कौलव – 01:11 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 11:48 पी एम तक गर
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:18:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:40:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:15 ए एम से 04:56 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:35 ए एम से 05:37 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:39 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:17 पी एम से 07:37 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:18 पी एम से 08:20 पी एम
💧 अमृत काल : 12:46 पी एम से 02:14 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 23 से 12:48 ए एम, जुलाई 23
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:37 ए एम से 10:21 पी एम
🚓 यात्रा शकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मन्त्र – ॐ सौ सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय – शिवलिंग का दुग्धाभिषेक करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्रावण मास प्रारंभ/ साईं बाबा उत्सव समाप्ति शिर्डी, अशून्य शयन व्रत, श्रावण माह प्रथम सोमवार, राष्ट्रीय आम दिवस, प्रसिद्ध पार्श्व गायक मुकेश जन्म दिवस, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जन्म दिवस, राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस, पाई सन्निकटन दिवस, राष्ट्रीय चूहा पकड़ने वाला दिवस, फ्रैजाइल एक्स जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय अच्छा टीममेट दिवस, राष्ट्रीय झूला दिवस, राष्ट्रीय पेनुचे फज दिवस
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🗽 Vastu tips 🗺️
पूजा स्थल पर भगवान शिव या भगवान शिव के परिवार की तस्वीर लगानी चाहिए। वास्तु के अनुसार भगवान शिव के परिवार की तस्वीरें उत्तर दिशा में लगानी चाहिए।
शिव पूर्णता के प्रतीक हैं। अपने घर में शिव तांडव की मूर्तियां या भगवान शिव की क्रोधित तस्वीरें न रखें।
अगर आप अपने घर में शिवलिंग स्थापित करने के बारे में सोच रहे हैं तो सावन का महीना आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। हालांकि, शिवलिंग की दिशा का भी ध्यान रखना जरूरी है। घर के ईशान कोण यानि उत्तर और पूर्व की दिशा के बीच में शिवलिंग रखें। उत्तर और पूर्व के मध्य की या दिशा सदैव शुभ रहती है।
वास्तु शास्त्र में इस दिशा को बहुत शुभ माना जाता है। इस दिशा को देवी-देवताओं की दिशा कहा जाता है। साथ ही सावन के दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जाप भी अवश्य करें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
चूना जो पान में लगा के खाया जाता है , उसकी एक डिब्बी ला कर घर में रखे
यह सत्तर प्रकार की बीमारियों को ठीक कर देता है। गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी #पीलिया ठीक हो जाता है।
चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है – अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे। जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उन्हें भी इस चूने का सेवन करना चाहिए।
शुगर रोज़ सुबह ख़ाली पेट एक गिलास पानी में एक छोटे चने के बराबर चुना मिलकर पीने से शुगर जड़ से ख़त्म हो जाती हैं ( समय समय पर जाँच करवाते रहे.. वरना शुगर का लेवल माइनस भी हो सकता हैं )
🍷 आरोग्य संजीवनी 🥃
गुणकारी आँवले के कुछ औषधीय प्रयोग
जिन्हें भोजन में अरुचि हो या भूख कम लगती हो उन्हें भोजन से पहले 2 चम्मच आँवला रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर लेना लाभकारी है ।
नाक, मूत्रमार्ग, गुदामार्ग से रक्तस्राव, योनिमार्ग में जलन व अतिरिक्त रक्तस्राव, पेशाब में जलन, रक्तप्रदर, त्वचा-विकार आदि समस्याओं में आँवला रस अथवा आँवला चूर्ण दिन में दो बार लेना लाभदायी है ।
आँवला रस में 4 चुटकी हल्दी मिलाकर दिन में दो बार लें । यह सभी प्रकार के प्रमेहों में श्रेष्ठ औषधि है ।
अम्लपित्त, सिरदर्द, सिर चकराना, आँखों के सामने अँधेरा छाना, उलटी होना आदि में आँवला रस या चूर्ण मिश्री मिलाकर लेना फायदेमंद है ।
रक्ताप्लता या पीलिया जैसे विकारों में आँवला चूर्ण का दिन में 2 बार उपयोग करने से रस-रक्त का पोषण होकर इन विकारों में लाभ होता है।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
एक भक्त के श्राप से पत्थर के बन गए थे भगवान, माता सीता से भी होना पड़ा था अलग
पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस कुल में एक वृंदा नाम की लड़की का जन्म हुआ था. वह लड़की भगवान विष्णु की परम भक्त थी. वह भगवान श्रीहरिविष्णु की पूजा में लीन रहती थी.जब वह लड़की बड़ी हुई तो उसका विवाह राक्षस कुल में दानवराज जलंधर से हुआ था. जालंधर के विषय में देवीभागवतपुराण में कथा है कि एक बार भगवान शिव ने अपने तेज का अंश समुद्र में छोड़ दिया था, जिससे जालंधर नाम बालक का जन्म हुआ. जब दैत्य गुरु शुक्राचार्य की दृष्टि उस बालक पर पड़ी तो वे उसे अपने साथ ले आए
दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने मायावी ज्ञान जालंधर को दे दिया, इससे वह काफी अधिक बलशाली हो गया था. इसके चलते उसे दैत्यों का राजा नियुक्त कर दिया गया. उसका विवाह वृंदा से हुआ था. वृंदा भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थीं. उनकी भक्ति और पति प्रेम के कारण जालंधर का सामना कोई भी नहीं कर पाता था. सभी देवता उससे पराजित हो जाते थे.
शक्तियों पर हो गया था अहंकार जालंधर को अपनी शक्तियों पर अहंकार हो गया था. उसने भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी को मारना चाहा. इसके लिए वह जब बैकुंठ धाम गया तो वहां पर माता लक्ष्मी को देखकर वह मोहित हो गया. माता लक्ष्मी ने अपनी रक्षा के कहा कि ‘हे जालंधर तुम्हारे मन में जो भी ख्याल आया है उसे त्याग दो. जल से जन्म लेने के कारण मैं और तुम भाई-बहन हैं. इस कारण जो तुम सोच रहे हो, वह संभव नहीं है.’ इस बात से जालंधर प्रभावित हो गया और उसने माता लक्ष्मी को पाने का ख्याल खुद से निकाल दिया.
माता पार्वती के लिए कैलाश पहुंचा जालंधर जालंधर ने माता पार्वती को पाने का विचार बनाया और वह कैलाश पर माता के सामने पहुंचा. माता पार्वती ने जालंधर के मन की बात जान ली और गुस्से में आकर उन्होंने अस्त्र उठा लिया. जालंधर को पता था कि माता देवी दुर्गा का ही रूप हैं. इस कारण वह वहां से भाग गया और भगवान शिव के साथ युद्ध करने लगा. उसकी पतिव्रता स्त्री वृंदा के तप के कारण भगवान शिव के हर प्रहार जालंधर का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे थे.
माता पार्वती पहुंची भगवान विष्णु के पास जब माता पार्वती ने यह देखा तो वे भगवान विष्णु के पास पहुंची और उनको सारी बात बताई. माता पार्वती की बात सुनकर भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप बनाया और वृंदा के पास पहुंच गए. वृंदा ने भगवान विष्णु को अपना पति समझकर उनके साथ पत्नी जैसा व्यहार करना शुरू कर दिया. इससे वृंदा का पतिव्रता धर्म टूट गया और इससे जालंधर का भगवान शिव ने वध कर दिया.
पत्थर के बन गए भगवान जालंधर के वध की बात जब देवी वृंदा को पता चली तो उन्होंने उनके पति के रूप में रहने वाले भगवान विष्णु से उनके असली रूप में आने को कहा, जब उन्होंने देखा कि वे भगवान विष्णु हैं तो उन्होंने क्रोध में आकर उनको श्राप दिया कि आप पत्नी वियोग में दर-दर भटकेंगे. इसके साथ ही आप काले पत्थर के हो जाएंगे. वृंदा के श्राप के चलते भगवान विष्णु काले पत्थर के हो गए. इसी को भगवान विष्णु का शालिग्राम स्वरूप कहा गया. इसको देखते हुए सारे देवताओं में हाहाकार मच गया. सारे देवता और माता लक्ष्मी वृंदा के पास पहुंची और भगवान विष्णु को पत्थर बनने से श्राप से मुक्त करने को कहा. इस पर वृंदा ने उनको पूर्व रूप वापस दे दिया. इसके बाद उनका वृंदा से विवाह हुआ.
खुद हो गईं सती वृंदा खुद जालंधर के साथ सती हो गईं. उनकी राख के ऊपर तुलसी का पौधा उगा. उस दिन से तुलसी के पौधे को वृंदा का स्वरूप माना गया है. भगवान विष्णु बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं करते हैं. वृंदा के श्राप के कारण ही भगवान विष्णु को प्रभु श्रीराम स्वरूप में दर-दर पत्नी वियोग में दर-दर भटकना पड़ा था.
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।



