धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 30 दिसम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 30 दिसम्बर 2024
30 दिसम्बर 2024 : दिन सोमवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज स्नान-दान एवं श्राद्ध आदि की पुण्यतमा सोमवासरीय अमावस्या है। आज के लिए लिखा है:- “अश्वत्थमूले प्रणिधाय विष्णुं विधायसम्यग्विविधोपचारै:प्रदक्षिणाभीष्टफलादि द्रब्यै: स्त्रिभिर्विधेया पति सौख्यवृध्यै।” अर्थात आज पीपल वृक्ष की जड़ में भगवान श्रीविष्णु की प्रतिष्ठा करके यथा विधान सम्यक प्रकार से पूजन करना चाहिए। उसके उपरान्त सामर्थ्य के अनुसार 108 प्रदक्षिणा करनी चाहिए। इससे सौभाग्यवती स्त्रियॉं को धन-सुख एवं सौभाग्यादी की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। आज शुभवार की अमावस्या होने से सुभिक्ष और प्रजा में सुख का योग बनेगा। आज की इस पूण्यतमा अमावस्या को नेपाल में दर्श हवेला अमावस्या भी कहा जाता है। उड़ीसा के लोग इस अमावस्या को बकुल अमावस्या भी कहते हैं। आज की अमावस्या में कपिलधरा तीर्थ में श्राद्ध का बहुत महत्त्व बताया गया है। आज मुंबई के कालबादेवी यात्रा का भी बहुत महत्त्व है। आप सभी सनातनियों को “सोमवासरीय अमावस्या” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – उतरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌑 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – सोमवार पौष माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 03:56 AM तक उपरांत प्रतिपदा
🖍️ तिथि स्वामी – अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं। अमावास्या में पितृगणों की पूजा करने से वे सदैव प्रसन्न होकर प्रजावृद्धि, धन-रक्षा, आयु तथा बल-शक्ति प्रदान करते हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल 11:57 PM तक उपरांत पूर्वाषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी : मूल नक्षत्र को सभी आक्रामक ग्रहों का केंद्र माना जाता है. कई बार ग्रहों की स्थिति पर इसका प्रभाव निर्भर करता है. इसका स्वामी ग्रह केतु है।
⚜️ योग – वृद्धि योग 08:32 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग
प्रथम करण : चतुष्पाद – 04:02 पी एम तक
द्वितीय करण – नाग – 03:56 ए एम, दिसम्बर 31 तक किंस्तुघ्न
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:47:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:24 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:03 पी एम से 12:45 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:49 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:32 पी एम से 05:59 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 05:34 पी एम से 06:56 पी एम
💧 अमृत काल : 05:24 पी एम से 07:02 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:57 पी एम से 12:51 ए एम, दिसम्बर 31
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंदिर सौं सौमाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को सफेद तिल से बनी मिठाई भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : देवपितृकार्ये अमावस्या/ सोमवती अमावस्या/ दर्शवेला अमावस्या/ अमावस्या समाप्ति् उ. रात्रि 03.56/ महान् संत रमण महर्षि प्राकट्योत्सव, अखिल भारतीय मुस्लीम लीग स्थापना दिवस, भारतीय शेर दलाल हर्षद मेहता पुण्य तिथि, प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता व निर्देशक मृणाल सेन स्मृति दिवस, आर्य समाज के नेता प्रकाशवीर शास्त्री जन्म दिवस, महान भाषाविद आचार्य रघुवीर जन्म दिवस, कादम्बिनी पत्रिका’ के सम्पादक राजेन्द्र अवस्थी पुण्य तिथि, विक्रम साराभाई स्मृति दिवस
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🛕
घर के मुख्य द्वार और मंदिर में स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष दूर होता है। इन दोनों जगहों पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं और उसके नीचे शुभ लाभ लिख दें। ऐसा करने से आपके घर में हमेशा सकरात्मकता बनी रहेगी। साथ देवी लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहेगी। ध्यान रखें कि स्वास्तिक का चिन्ह 9 उंगली लंबा और चौड़ा होना चाहिए।
कलश बनाने के फायदे घर के पूजा स्थल पर सिंदूर से मंगल कलश का चिन्ह बनाने से हर तरह की अड़चन दूर हो जाती है। वास्तु के मुताबिक, मंगल कलश मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इसे बनाने से घर-परिवार में सुख, समृद्धि बनी रहती है।
ओम चिन्ह बनाने के फायदे घर के मंदिर में केसर या चंदन से ओम चिन्ह बनाना काफी शुभ माना जाता है। इससे स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है। ओम का चिन्ह जीवन में तरक्की लाता है और सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
नारियल का तेल तेजी से मेटाबोलाइज होता है, एनर्जी बूस्ट करता है.
कब लगाना चाहिए नाभ‍ि में तेल?नेवल ऑयल‍िंग की बात आती है तो सवाल उठता है कि आखिर ये कब करना चाहिए या इसका सही समय क्‍या है. तो आयुर्वेद के एक्‍सपर्ट डॉक्‍टर व‍िवेक जोशी बताते हैं कि नेवल ऑयल‍िंग करने का बेस्ट टाइम है खाली पेट. ये आप सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले लगा सकते हैं. आपको बार-बार नाभी में तेल लगाने की जरूरत नहीं है. ऐसा आप द‍िन में बस 1-2 बार कर सकते हैं.
कैसे करें नेवल ऑयल‍िंग इसके ल‍िए आपको माल‍िश करने की या बहुत सारा तेल लगाने की जरूरत नहीं है. आप थोड़ा सा तेल या तेल की कुछ बूंदें नाभ‍ि में लगाएं. इसे नाभ‍ि में डालने के बाद अच्‍छे से मसलें. लेकिन याद रखें नाभि को ऑइल लगाने से पहले और बाद में साफ करना न भूलें. अक्‍सर लोग नहाते वक्‍त भी नाभ‍ि की सफाई सही से नहीं करते हैं. आपको इसका ध्‍यान रखना चाहिए.
🩻 आरोग्य संजीवनी 🩸
रिकवरी के लिए मेरी आयुर्वेदिक यात्रा
एक अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में, मुझे दवाओं और जीवनशैली सुधारों से परिचित कराया गया, जिसने मेरी स्थिति में काफी सुधार किया। इनमें शामिल हैं:
गंडमाला कंदन रस: 90 गोलियाँ प्रति माह (प्रत्येक 375 मि.ग्रा.)
कचनार गुग्गुल: 60 गोलियाँ प्रति माह (प्रत्येक 500 मि.ग्रा.)
टंकण भस्म: 15 ग्राम, मासिक 60 खुराकों में विभाजित (प्रत्येक 250 मि.ग्रा.)
निर्गुंडी तेल: गर्दन पर बाहरी अनुप्रयोग के लिए
वात गजंकुश रस: 120 गोलियाँ प्रति माह (प्रत्येक 250 मि.ग्रा.)
इन दवाओं के साथ-साथ, मैंने नियमित रूप से योग का अभ्यास किया, जिसने मेरे मन को शांत करने और मेरी हार्मोनल गतिविधि को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक साल के लगातार उपचार के बाद, मेरे थायरॉयड परीक्षण के परिणाम सामान्य थे, और तब से वे स्थिर बने हुए हैं, जैसा कि मेरे स्वास्थ्य से दिखता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
इस संसार मे सही गलत कुछ नही होता। सिर्फ कारण और परिणाम होता है। नियति होती है। तुमने आग में हाथ डाला तो जलेगा ही। तुम जल में तेरोगे नही तो डूबोगे ही। तुम जैसे दूसरे के साथ करोगे वैसा तुम्हारे साथ होगा। इसमे क्या सही और क्या गलत है? कुछ नही। सही गलत मनुष्य द्वारा बनाये गए मापदंड है जो मानव को मन के अनुकूल लगे तो सही और न लगे गलत।
कुछ समय पहले मैं एक आचार्य जी के पास गया था। उनकी उम्र 83 साल थी। घर मे गया तो वो माला जप कर रहे थे। घर में 6 लोग हुआ करते थे 10 साल पहले तक। अच्छा खासा भरापूरा परिवार था। बेटे की अकाल मौत हो गयी। बहु दूसरे शहर में रहने लगी। पोते पोती पढ़ाई के लिए बाहर चले गए। पीछे सिर्फ बूढ़े पति पत्नी बचे। कुछ दिन बाद उस बूढ़ी पत्नी की भी मौत हो गयी। अब आचार्य जी सिर्फ अकेले थे। मुझे उन सहानुभूति हुई। लगा कि देखो कितना गलत हुआ है इनके साथ। उनसे चला भी अच्छे से नही जाता। मैं जाकर उनसे कहा कि कुछ नया बताइये। क्या आप सारे दिन में कभी बेटे के लिए दुखी नही होते?
तो वो मुस्कुराने लगे। फ़ोटो की तरफ इशारा करते हुए कहने लगे कि, जिसे जाना है वो जाएगा। जिसे मरना है वो मरेगा। मेरे रोने से या दुखी होने से कोई वापस तो नही आने वाला। न तो मेरा बेटा वापस इस दुनिया मे आएगा और न ही मेरी पत्नी। फिर क्यों दुखी होउ? क्यों सोचु?
और यह कहकर वो मुस्कुराने लगे। मुझसे कहने लगे कि :-
आखिर तुम क्यों इतने चिंतित हो? कैसी चिंता पाल रखी है तुमने। भगवान तो सब अच्छा ही कर रहे है। जैसा कर्म किया है वैसा हमे मिला है। जैसा होना चाहिए था वही हुआ है। इसमे सही गलत कैसा? कैसा वाद विवाद करना। उस दिन साक्षात वैरागी से मिला मैं। कह रहे थे कि अब हमारी भी पारी आएगी जाने की। चले जायेंगे। तब तक भगवान को भज रहे है।
मैं कहता हूँ कि समस्त ब्रह्मण्ड अपने सिद्धांतों से चलता है। यहाँ कोई भी घटना संयोग नही है। सब कुछ सिद्धान्त से हो रहा है। अब तुम्हे सिद्धान्त की करनी सही लगी और खुशी मिली तो तुम उसे सही कहते हो। और जरा सा भी अगर सिद्धांत द्वारा तुम्हे दुख हुआ तो तुम बुरा कहते हो।इसलिए अच्छा बुरा कुछ नही है। जो हो रहा है वह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। तुमने ही इस खेल रचा है। तो फिर चिंता किस बात की?
सिद्धान्त को समझ लो। बस, यही काफी है।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।

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