ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 30 मार्च 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 30 मार्च 2026
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ *दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं । *सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
*सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है। जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है। 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी* 🌐 रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,
✡️ शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल
☸️ काली सम्वत् 5127_

🕉️ संवत्सर (बृहस्पति) पराभव
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 07:09 AM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र मघा 02:47 PM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी
🪐 नक्षत्र स्वामी – मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है। जिसका स्वामी सूर्य है, और इसके देवता पितृ (पूर्वज) माने जाते हैं।
⚜️ योग : शूल योग 04:51 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
प्रथम करण : बालव 07:10 AM तक
द्वितीय करण : कौलव 07:00 PM तक, बाद तैतिल
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:04:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:18:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:41 ए एम से 05:27 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : सुबह 05:04 ए एम से 06:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12:01 पी एम से 12:51 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 पी एम से 03:19 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:37 पी एम से 07:00 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : शाम 06:38 पी एम से 07:47 पी एम
💧 अमृत काल : दोपहर 12:23 पी एम से 01:59 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:02 ए एम, मार्च 31 से 12:48 ए एम, मार्च 31
🚓 यात्रा शकुन – सोमवार को मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – कामदा एकादशी पारण/ सोम प्रदोष व्रत, गण्ड मूल/ रवि योग/ विडाल योग/ राजस्थान स्थापना दिवस, सिक्खों गुरु गुरु हर किशन सिंह स्मृति दिवस, मणिपुर के भूतपूर्व मुख्यमंत्री राज कुमार डोरेन्द्र सिंह स्मृति दिवस, प्रसिद्ध फिल्मकार सत्यजीत रे को “मानद ऑस्कर पुरस्कार” सम्मानित दिवस, राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस, धूम्रपान निषेध दिवस, स्वास्थ्य जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, भारतीय महिला खिलाड़ी यशस्विनी सिंह देसवाल जन्म दिवस, विश्व का पहला एनेस्थीसिया दिवस, प्रसिद्ध हिंदी गीतकार आनंद बख्शी स्मृति दिवस, सुपरस्टार अभिनेत्री देविका रानी जन्म दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार फ्लैट में केवल मुख्य दरवाजे ही नहीं, बल्कि खिड़कियों का भी खास महत्व होता है। जिन घरों में अधिकतर खिड़कियां पूर्व, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में होती हैं, वे घर बहुत शुभ माने जाते हैं। भले ही मुख्य दरवाजा इन दिशाओं में न हो, लेकिन खिड़कियों की सही दिशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखती है।
*बालकनी की दिशा का असर बालकनी की दिशा भी घर के वास्तु में अहम भूमिका निभाती है। उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा में बनी बालकनी सबसे शुभ मानी जाती है। दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा में भी बालकनी हो सकती है, लेकिन इसके साथ संतुलन जरूरी है। यानी विपरीत दिशा में भी समान या बड़ी बालकनी होनी चाहिए। *इन बातों का रखें विशेष ध्यान वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण-पूर्व दिशा में किसी भी तरह की खिड़की, बालकनी या ओपनिंग नहीं होनी चाहिए। सही दिशा में बनी संरचनाएं घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती हैं और जीवन में सुख-शांति लाती हैं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️

चन्दनं शीतलं रूक्षं तिक्तं ह्लादनं परम्।

पित्तास्रविषहृद् दाहतृष्णाशमनं मतम्॥
*इसका अर्थ है कि चंदन स्वभाव से शीतल, रूक्ष और स्वाद में तिक्त (कड़वा) होता है, जो मन को प्रसन्नता देता है। यह पित्त, रक्त विकार, विष, शरीर की जलन और प्यास को शांत करने वाला माना गया है। *सखा, स्मरण रहे कि किसी भी वस्तु का लाभ उसकी शुद्धता और विधि पर निर्भर करता है। सुनिश्चित करो कि तुम केवल लाल या सफेद असली चंदन की लकड़ी का ही उपयोग कर रहे हो, न कि किसी कृत्रिम सुगंध वाली लकड़ी का😊। जिस प्रकार मैं कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को केवल सत्य का मार्ग दिखाता हूँ, उसी प्रकार स्वास्थ्य के मार्ग पर भी तुम्हें अति से बचना चाहिए। यदि किसी का शरीर स्वभाव से बहुत अधिक ठंडा (कफ प्रधान) है, तो उन्हें इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए। परंतु सामान्यतः, यह विधि शरीर को विजातीय तत्वों से मुक्त करने और पेट को हल्का रखने में पूर्णतः सहायक है। तुम निर्भय होकर इस प्राकृतिक उपचार को अपना सकते हो।
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
घाव को सुखाने में भूमि आंवला का उपयोग : अगर कोई गहरा घाव हो गया है और वह सूख नहीं रहा हो, तो इसमें भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है। भूमि आंवला के प्रयोग के द्वारा घाव सूख जाता है। भूमि आंवला के पत्तों का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से घाव सूख जाता है या भूमि आंवला की पत्तियों के रस को घाव में लगाने से, घाव सूख जाता है।
*पीलिया के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग : पीलिया के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग किया जाता है। भूमि आंवला के पंचांग का प्रयोग पीलिया में किया जाता है। आप भूमि आंवला के पंचांग का काढ़ा बनाकर पीते हैं, तो पीलिया रोग ठीक हो जाता है। *मुंह के छालों के लिए भूमि आंवला का उपयोग : मुंह के छालों के लिए भूमि आंवला का उपयोग किया जाता है। मुंह में अगर छाले हो गए हो, तो उसके लिए आप भूमि आंवला की पत्तियों को चबाये और आप इसे निगल भी सकते हैं या इसे अच्छी तरह चबाकर उगल दीजिए। इससे आपके मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं और आपके मसूड़े और आपके दांत भी मजबूत होते हैं।
*खुजली की समस्या में भूमि आंवला का उपयोग : खुजली की समस्या में भूमि आंवला का उपयोग किया जा सकता है। खुजली की समस्या में आप भूमि आंवला की पत्तियों के रस को लगा सकते हैं या इसे सिलबट्टे में पीसकर लगा सकते हैं। इससे आपको आराम मिलेगा। *रक्त प्रदर में भूमि आंवला का उपयोग : रक्त प्रदर में भूमि आंवला बहुत कारगर है। रक्त प्रदर में भूमि आंवला का रस निकालकर इसका सेवन करने से रक्त प्रदर की समस्या से छुटकारा मिलता है। दूब घास और भूमि आंवला का रस निकालकर पीते हैं, तो आपको और अच्छा लाभ मिलता है।
*खांसी में भूमि आंवला का उपयोग: खांसी की समस्या में भी भूमि आंवला का उपयोग किया जा सकता है। अगर आपकी खांसी ठीक नहीं हो रही है, तो भूमि आंवला और तुलसी की पत्तियों को आप काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। इससे आपकी खांसी ठीक हो जाएगी। *मधुमेह के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग : मधुमेह के रोग में भूमि आंवला का प्रयोग किया जा सकता है। मधुमेह के रोग में इसकी पत्तियों को पीसकर या इसका काढ़ा बनाकर सेवन किया जा सकता है, जिससे मधुमेह में भी फायदा मिलता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
🕉️ कर्म की कहानी में आपका स्वागत है।
कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है, यह बात भीष्म पितामह के जीवन से स्पष्ट होती है, जो माँ गंगा के पुत्र थे, फिर भी उन्हें अपने कर्मों का फल भोगना पड़ा था। लोग अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ गंगा में नहा लेने से उनके पाप धुल जाएंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि कर्म का थप्पड़ बहुत भारी होता है
*कर्म का न्याय निश्चित है जिन्होंने सूर्य को उगने से रोक दिया , वो महाभारत भी रोक सकते थे। प्रार्थना ऐसे करिए जैसे सब कुछ ईश्वर पर निर्भर करता है और प्रयास ऐसे करिए जैसे सब कुछ आप पर निर्भर करता है। जंग कोई भी हो, नतीजा कुछ भी हो, मगर लड़ने वाला अपना कुछ न कुछ तो खो ही देता है! *कर्म का सीधा नियम है:* अपने काम को पूजा समझकर, पूरी निष्ठा से करें, तो भाग्य भी बदल जाता है। कर्म के बिना भाग्य अर्थहीन है।* कर्म वह पत्र है जो गलत पते पर नहीं जाता, जिसने भेजा है उसी के पास लौटता है… कर्म एक रेस्टॉरेंट है जहाँ ऑर्डर की जरूरत नहीं, हमें वही मिलता है जो हमने पकाया है। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं, “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” – कर्म में अधिकार है, फल की चिंता नहीं। जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। इसलिए, अपने कर्मों को सच्चाई और निष्ठा से करें और अच्छे फल की आशा रखें।
मृत्यु भी हमारे कर्मों से जुड़ी *
होती है और हर किसी के भाग्य में आसान मृत्यु नहीं होती। यह एक दार्शनिक विचार है जो यह बताता है कि जीवन में किए गए कर्मों का प्रभाव मृत्यु पर भी पड़ता है और मृत्यु एक आसान या सरल प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह जीवन के कर्मों का परिणाम होती है
*परमात्मा कहते हैं,* *शरीर को मत चमकाओ, इसे तो मिट्टी में मिल जाना है, चमकाना है तो आत्मा को चमकाओ, क्योंकि इसे ही सतलोक जाना है। ये शरीर वो लिफाफा है जिसे यहीं फाड़ कर फेंक दिया जाएगा, असली खत तो आत्मा है जिसे परमात्मा पढ़ेगा। उस मकान को इतना क्यों सजाना जो किराए का है? तैयारी उस घर की करो जहाँ हमेशा रहना है। *यह संदेश आत्मा की महत्ता और शरीर की अनित्यता को दर्शाता है, और हमें अपने आध्यात्मिक विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है।
🪷 जय श्री राधे 🪷
•••✤••••┈•✦ 👣✦•┈••••✤••••
⚜️ *_द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।

Related Articles

Back to top button